लॉकडाउन तोड़ने पर इस देश में ड्रग माफिया जान भी ले लेती है, जानिए क्यों?
नई दिल्ली- दक्षिण अमेरिकी देश कोलंबिया में कोरोना-लॉकडाउन को लेकर वहां की सरकार ने पाबंदियां तो लगा रखी हैं, लेकिन ड्रग माफिया उससे भी आगे बढ़कर इसका उल्लंघन करने वालों की जान तक ले रही है। मानव अधिकार संगठन ने कोलंबिया की इस हालात को लेकर चिंता जताई है और वहां की सरकार से ऐसे अराजक तत्वों पर लगाम लगाने की मांग की है। बता दें कि कोलंबिया ऐसा देश है, जो 5 दशकों तक गृहयुद्ध झेल चुका है और वहां अभी भी ऐसे संगठन हैं, जो एक तरह से अपना ही कानून चलाते हैं।

कम से कम 8 नागरिकों की हो चुकी है हत्या
कोलंबिया में ड्रग माफिया और विद्रोही गुट (पुराने) कोरोना वायरस लॉकडाउन को लेकर बहुत ही ज्यादा सख्त हैं। अंग्रेजी अखबार द गार्डियन के अनुसार ये इतने सख्त हैं कि उनके हिंसक तेवरों को देखकर मानवाधिकार संगठनों का भी माथा ठनक गया है। जो लोग लॉकडाउन के नियमों का पालन नहीं करते, उनकी हत्याएं तक कर दे रहे हैं। ऐसे गुटों ने अबतक कम से कम 8 नागरिकों की इन्हीं वजहों से जान ले ली है। इन हथियारबंद लोगों में कुछ तो उन विद्रोही गुटों की पैदाइश हैं, जो आधी शताब्दी तक चली कोलंबिया के गृहयुद्ध में शामिल थे। ऐसे हथियारबंद लोग ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में सक्रिय हैं और लोगों को घरों में बंद रहने के लिए बाकायदा व्हाट्सऐप या पर्चों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

लोगों के सामने पैदा हो रहा है रोजी-रोटी का संकट
प्रशांत तट पर हिंसक घटनाओं के लिए बदनाम बंदरगाह शहर टुमाको में इन गुटों ने वहां के निवासियों के मछली पकड़ने पर भी पाबंदी लगा रखी है, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट आ गया है। इनका 5 बजे शाम तक का कर्फ्यू सरकारी पाबंदियों से कहीं ज्यादा सख्त है। स्थानीय निवासियों में इनका खौफ इस कदर बैठ गया है कि सड़कों पर छोटे-मोटे काम करने वाले वेंडर्स को भी घरों से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं है।

कोरोना मरीजों को इलाका छोड़ देने का देते हैं फरमान
ये सिर्फ एक शहर की बात नहीं है, पूरे देश में ऐसे हिंसक गैंग सक्रिय हैं, जो लोगों को घरों से निकलने से रोक रहे हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के मुताबिक बीमारों को भी घरों से निकलने की आजादी नहीं है। Cauca और Guaviare जैसे शहरों में इन लोगों ने कई मोटरसाइकिलों में आग लगा दी है, क्योंकि उनकी बात नहीं सुनी गई। कोलंबिया के दक्षिणी प्रांत Putumayo एक स्थानीय नेता ने बताया कि, 'उन लोगों ने गांवों के बीच यातायात रोक दी है और जब किसी को कोविड-19 से संक्रमित होने का संदेह होता है तो कहा जाता है कि इलाका छोड़ दे या उनका कत्ल कर दिया जाएगा।....और लोगों के पास उनका हुक्म मानने के अलावा कोई उपाय नहीं है, क्योंकि उन्होंने यहां पर कभी सरकार देखी ही नहीं है।'

कोलंबिया में तेजी से बढ़ रहे हैं कोरोना के केस
8 जून को इन माफियाओं ने एक स्थानीय नेता की इसलिए हत्या कर दी थी, क्योंकि उन्होंने स्थानीय अधिकारियों से गैंग के लॉकडाउन पाबंदियों से लोगों को छुटकारा दिलाने की मांग की थी। बता दें कि कोलंबिया कोरोना वायरस से बुरी तरह प्रभावित है और वहां संक्रमण के 1,59,898 मामले सामने आ चुके हैं और अब तो रोजाना 5,000 से ज्यादा केस बढ़ रहे हैं। अबतक 5,625 की मौत भी हो चुकी है। संक्रमण रोकने के लिए सरकार ने राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर लॉकडाउन जरूर लगा रखा है, लेकिन उसका पालन असल में यही जानलेवा गैंग करवा रहे हैं।

ह्यूमन राइट्स वॉच ने सरकार से की सुरक्षा देने की मांग
इन परिस्थियों में मानवाधिकार संगठन ने वहां के राष्ट्रपति इवान ड्यूक सरकार से मांग की है कि नागरिकों को ऐसे माफिया गिरोहों के रहमो-करम पर न छोड़ें और उनकी रक्षा के लिए कदम उठाए जाएं। ह्यूमन राइट्स वॉच अमेरिका के डायरेक्टर जोस मिगुएल ने कहा है, 'कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए हथियारबंद ग्रुपों की ओर से बेरहमी से सजा दी जा रही है। पूरे कोलंबिया में दूर-दराज में रहने वाले और कमजोर तबकों के लोगों पर हमले का खतरा है और वो अपने घर से निकलते हैं तो उनकी हत्या तक हो सकती है।......सरकार को इन समुदायों को बचाने के लिए अपनी कोशिशें तुरंत बढ़ा देनी चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि उन्हें भरपूर मात्रा में भोजन और पानी मिले और कोविड-19 के प्रभाव से उनका स्वास्थ्य सुरक्षित रहे।' बता दें कि 5 दशक के गृहयुद्ध की वजह से कोलंबिया का हिंसा का इतिहास रहा है, जिसमें 2,60,000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और 70 लाख से ज्यादा लोगों को अपना घर छोड़कर भागना पड़ा है।












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