तो US Army में भी ट्रंप समर्थक ? क्यों टॉप जनरल को सैनिकों को लिखना पड़ा ऐसा पत्र ?

Top US generals Wrote Letter to Troops: अमेरिका सेना का मुख्यालय पेंटागन में हैं इसलिए कई बार मीडिया में अमेरिकी सेना को संबोधित करते हुए पेंटागन शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। इसी पेंटागन के प्रवक्ता ने जोनाथन हॉफमैन ने कहा है कि सेना अतिवादियों को बर्दाश्त नहीं करती है। जोनाथन ने ये उस सवाल के जवाब में कहा था जो उनसे जो बाइडेन के शपथ ग्रहण समारोह में सुरक्षा के लिए तैनात किए जाने वाले 15 हजार नेशनल गार्ड के बारे में पूछा गया था। सवाल था कि नेशनल गार्ड के जवान तैयार किए जा सकते हैं उसमें कई ट्रंप समर्थक भी हो सकते हैं।

क्या लिखा है पत्र में ?

क्या लिखा है पत्र में ?

सेना के प्रवक्ता ने भले ही कह दिया हो कि वह अतिवादियों को बर्दाश्त नहीं करती है लेकिन इससे ये सवाल खत्म नहीं हो जाता। शायद यही वजह है कि अमेरिकी सेना के टॉप जनरल को सैनिकों को पत्र लिखना पड़ा है। ज्वाइंट चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल मार्क मिली और टीम के सभी 8 सदस्यों ने एक संयुक्त पत्र लिखा है जिसमें 6 जनवरी को कैपिटल बिल्डिंग हिंसा की निंदा की गई है और इसे संवैधानिक व्यवस्था पर हमला बताया है।

पत्र में लिखा गया है "हिंसक हमला... अमेरिकी कांग्रेस, कैपिटल बिल्डिंग और हमारी संवैधानिक व्यवस्था पर सीधा हमला था। अभिव्यक्ति और रैली करने की आजादी का अधिकार किसी को हिंसा, देशद्रोह या विद्रोह करने का अधिकार नहीं देता है।"

पत्र में कहा गया है कि सेना के सदस्य संविधान की रक्षा के लिए वचनबद्ध हैं। "संवैधानिक व्यवस्था को भंग करने का कोई भी काम न केवल हमारी परंपरा, मूल्यों और शपथ के खिलाफ है, ये कानून के भी खिलाफ है।"

टॉप जनरल के पत्र से उठे कई सवाल

टॉप जनरल के पत्र से उठे कई सवाल

सेना के टॉप जनरलों का ये पत्र तब आया है जब ये कहा जा रहा है कि जो बाइडेन को राष्ट्रपति बनने से रोकने के लिए अमेरिकी कांग्रेस में घुसने वाले ट्रंप समर्थकों के लिए सेना और दूसरी प्रशासनिक एजेंसियों में कई सारे समर्थक हैं। याद कीजिए कैपिटल हिंसा में जो चार प्रदर्शनकारी मारे गए थे जिनमें एक महिला एश्ली बैबिट भी थी। बैबिट की पहचान पूर्व अमेरिकी सैनिक के रूप में की गई थी जिसने एयरफोर्स से जुड़े विभाग में 14 साल सेवा दी थी। यही नहीं हिंसा के पहले कैपिटल पुलिस के कुछ जवान प्रदर्शनकारियों के साथ सेल्फी लेते गए थे। इसे लेकर बाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में नव निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी चिंता जताई थी और जांच की मांग की थी।

ट्रंप और उनके समर्थन चुनाव नतीजों को मानने से इनकार करते रहे हैं। ट्रंप का कहना है कि उनके वोट को चुराया गया है। हालांकि ट्रंप इसके लिए कोई सबूत पेश नहीं करते लेकिन दुखद यह है कि उनके समर्थक इस बात का यकीन कर रहे हैं। ऐसे में सेना में भी सवाल उठना चिंता की बात है।

राष्ट्रपति होता है सेना का कमांडर इन चीफ

राष्ट्रपति होता है सेना का कमांडर इन चीफ

ऐसे इनपुट मिले हैं कि डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक 20 जनवरी को होने वाले बाइडेन के शपथ ग्रहण समारोह में भी हिंसा करने की तैयारी कर रहे हैं। इसके चलते राजधानी में सुरक्षा के लिए नेशनल गार्ड तैनात किए जा रहे हैं। लोगों को आशंका है कि इनमें भी कई ट्रंप के समर्थक हो सकते हैं जो कि गंभीर चिंता की बात है। इसी को लेकर जब पेंटागन के प्रक्वता से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि "हम रैंक में अतिवादियों को बर्दाश्त नहीं कर सकते।"

प्रवक्ता जोनाथन हॉफमैन सेना के ज्वाइंट चीफ्स के संविधान की रक्षा की बात का हवाला देते हुए कहा "संविधान के अनुसार 20 जनवरी को राष्ट्रपति पद संभालने के बाद जो बाइडेन हमारे 46वें कमांडर इन चीफ होंगे।

कोरिया में तैनात जनरल ने दी कड़ी चेतावनी

कोरिया में तैनात जनरल ने दी कड़ी चेतावनी

वहीं दक्षिण कोरिया में अमेरिकी फोर्स कोरिया के कमांडर जनरल रॉबर्ड अब्राम्स ने ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ के बयान को रिट्वीट करते हुए लिखा "कैपिटल बिल्डिंग में हुई घटना को लेकर कोई संदेह नहीं है कि ये विद्रोह का प्रयास थी।"

उन्होंने आगे लिखा "अगर आप वर्दी में हैं और आप सोच रहे हैं कि यह कुछ और है, तो मैं (आपसे) बैठ जाने को कहूंगा और संविधान को पढ़ने को कहूंगा जिसे आपने समर्थन करने और उसकी रक्षा करने की कसम खाई है। आपके लिए हमारी टीम में कोई जगह नहीं है अगर सभी विदेशी और घरेलू शत्रुओं से संविधान की रक्षा करने को तैयार नहीं हैं।"

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