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Kim Jong Un की जासूसी कराने निकले थे Trump, ओसामा का सफाया करने वाली टीम का मिशन कैसे फेल हुआ?

Donald Trump kim jong un spy mission: डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल का एक बड़ा रहस्य अब सामने आया है। दरअसल, उस वक्त उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग-उन की जासूसी कराने के लिए अमेरिकी नेवी की सबसे खुफिया इकाई SEAL टीम 6 को भेजा गया था।

इस टॉप-सीक्रेट मिशन का खुलासा न्यूयॉर्क टाइम्स की ताज़ा रिपोर्ट में हुआ है, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मच गई है। माना जा रहा है कि यह ऑपरेशन परमाणु वार्ता से पहले उत्तर कोरिया की गतिविधियों पर नज़र रखने के मकसद से किया गया था, लेकिन मिशन असफल रहा और अब इस पर बड़ा घमासान छिड़ गया है।

Donald Trump kim jong un spy mission

ट्रंप की मंजूरी से शुरू हुआ था सीक्रेट ऑपरेशन

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस टॉप-सीक्रेट मिशन को शुरू करने से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सीधी मंजूरी ली गई थी। ऑपरेशन इतना संवेदनशील था कि इसकी नाकामी से अमेरिका-उत्तर कोरिया की परमाणु वार्ता पूरी तरह पटरी से उतर सकती थी। इसके लिए नेवी SEALs को महीनों तक बर्फीले पानी में कठोर प्रशिक्षण दिया गया। योजना यह थी कि सील्स एक परमाणु पनडुब्बी से "वेट सब्स" (छोटी स्टेल्थ सबमरीन) के जरिए तट तक पहुंचेंगे, वहां गुप्त जासूसी डिवाइस लगाएंगे और बिना पकड़े सुरक्षित वापस लौट आएंगे।

ओसामा का सफाया करने वाले स्क्वाड्रन को मिली जिम्मेदारी

यह खतरनाक ऑपरेशन SEAL टीम 6 के रेड स्क्वाड्रन को सौंपा गया था, वही स्क्वाड्रन जिसने ओसामा बिन लादेन को ढेर किया था। लेकिन हालात तब बिगड़ गए जब अचानक एक स्थानीय नाव तट के पास आ गई। मिशन की गुप्तता भंग होने के डर से हालात नियंत्रण से बाहर हो गए और पूरा ऑपरेशन विफल हो गया।

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कैसे नाकाम हुआ मिशन?

योजना के मुताबिक सब कुछ सुचारू रूप से चल रहा था, लेकिन जैसे ही अमेरिकी SEAL टीम 6 उत्तर कोरिया के तट पर पहुंची, अचानक हालात बदल गए। अंधेरे में एक स्थानीय मछली पकड़ने वाली नाव सामने आ गई। संचार का कोई साधन न होने और मिशन के खुलने के डर से एक वरिष्ठ सील ने तुरंत फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद बाकी टीम के सदस्य भी गोलाबारी में शामिल हो गए। गोलीबारी में नाव पर मौजूद तीन निर्दोष नागरिकों की मौत हो गई, जो सिर्फ शेलफिश डाइविंग कर रहे थे। इसी अनियोजित घटना ने पूरे मिशन को असफल बना दिया और टीम को पीछे हटना पड़ा।

नाव से हुई इस मुठभेड़ के बाद मिशन बीच में ही रोक दिया गया। सील्स डिवाइस लगाने में नाकाम रहे और बिना कोई सबूत छोड़े वहां से निकल गए। बाद में अमेरिकी सैटेलाइट ने इलाके में उत्तर कोरिया की सैन्य गतिविधि बढ़ने के संकेत दर्ज किए, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हुआ कि उन्हें मिशन का पता चला या नहीं।

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