क्या अमेरिका ने और भड़का दी है यूक्रेन युद्ध की आग? पोलैंड में बाइडेन ने बो दिया विश्वयुद्ध का बीज!

दुनियाभर के विश्लेषकों को यह चिंता सताने लगी है, कि धीरे धीरे यूक्रेन युद्ध काफी विनाशक होने की तरफ बढ़ रहा है और ये संघर्ष जितना आगे बढ़ेगा...

वॉरसॉ/वॉशिंगटन/मॉस्को, मार्च 27: शुक्रवार को एक के बाद एक कई रिपोर्ट्स आनी शुरू हो गईं, कि रूस ने यूक्रेन युद्ध में अपना उद्येश्य बदल लिया है और रूसी सेना के वरिष्ठ अधिकारी ने बयान देते हुए कहा, कि रूस के सैन्य अभियान का प्रथम चरण खत्म हो गया है और अब रूस का ध्यान डोनबास पर केन्द्रित करने की है। रूस का यूक्रेन युद्ध पर बदला रवैया पूरी तरह से पश्चिमी देशों के विश्लेषकों के अब तक के दावे से अलग है। लेकिन, पोलैंड के दौरे पर पहुंचे जो बाइडेन ने क्या यूक्रेन युद्ध की आग को और भड़का दिया है और क्या अमेरिका ही नहीं चाहता है, कि ये युद्ध खत्म हो? बाइडेन के पोलैंड दौरे के बाद कई सवाल उठ रहे हैं।

रूस को फेल बताने का सिलसिला

रूस को फेल बताने का सिलसिला

पश्चिमी देश लगातार यूक्रेन युद्ध में रूस के अवैध आक्रमण के बाद उसे फेल बता रहे हैं औऱ लगातार दावे किए जा रहे हैं, कि यूक्रेन युद्ध में अपने उद्येश्यों की पूर्ती करने में रूस पूरी तरह से नाकाम रहा है। लिहाजा, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की घरेलू राजनीति पर काफी ज्यादा प्रेशर बढ़ चुका है और वास्तव में, पिछले हफ्ते की शुरुआत में यह बताया गया था कि, पुतिन ने अपनी सेना को 9 मई तक यूक्रेन युद्ध खत्म करने का आदेश दिया हुआ है। लेकिन, तब तक इस युद्ध के 11 हफ्ते बीत जाएंगे। रूस ने 9 मई की तारीख इसलिए चुनी है, क्योंकि इसीदिन सोवियत संघ की रेड आर्मी ने नाजी जर्मनी को हराया था और पुतिन भी 9 मई तक युद्ध खत्म कर कथित 'नाजियों' के खिलाफ जीत का ऐलान करने की कोशिश में हैं।

खौफनाक संघर्ष की तरफ बढ़ता यूक्रेन युद्ध

खौफनाक संघर्ष की तरफ बढ़ता यूक्रेन युद्ध

इस बीच दुनियाभर के विश्लेषकों को यह चिंता सताने लगी है, कि धीरे धीरे यूक्रेन युद्ध काफी विनाशक होने की तरफ बढ़ रहा है और ये संघर्ष जितना आगे बढ़ेगा, ये धीरे धीरे साइबर स्पेस हमलों, रायायनिक हथियार हमलों या फिर जैविक हथियार हमलों की तरफ बढ़ सकता है। वहीं, पोलैंड में नाटो देशों ने यूक्रेन की सीमा के बेहद करीब हथियारों का जखीरा भर दिया है और रूस को उन हथियारों को नष्ट करने का एक तरह से ऑफर दे रहा है। रूस की कोशिश यूक्रेन की सीमा में दाखिल होने के साथ ही उन हथियारों को नष्ट करने की है और रूस एक बार ऐसा कर भी चुका है, लिहाजा अगर गलती से भी रूस की एक गोली भी पोलैंड में गिरती है, तो वहां से विश्वयुद्ध की शुरूआत हो जाएगी। वहीं, रूस की तरफ से साफ कहा गया है, कि उसने अपना लक्ष्य बदलते हुए यूक्रेन के पूर्वी डोनबास हिस्से की तरफ बढ़ना शुरू कर दिया है, जिसे कई लोगों मे माना है कि, पुतिन अपनी सेना को अब निकालने के मूड में आ चुके हैं, उस वक्त पोलैंड के रास्तों से और हथियार भेजना, क्या रूस को भड़काने के इरादे से नहीं है?

जेलेंस्की भी करना चाहते थे समझौता

जेलेंस्की भी करना चाहते थे समझौता

यूक्रेन युद्ध के बीच पिछले कुछ हफ्तों में लगातार यूक्रेन और रूस के बीच कूटनीति के जरिए युद्ध को खत्म करने पर बात चल रही थी और लगातार दोनों देशों की तरफ से बयान आ रहे थे, कि बातचीत सकारात्मक दिशा में हैं। वहीं, यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने भी नाटो में शामिल होने की जिद छोड़ दी थी और वीडियो संदेश में बयान जारी करते हुए कहा था, कि 'अगर रूस यूक्रेन को सुरक्षा की गारंटी दे, तो वो नाटो में शामिल नहीं होगा'। इसके साथ ही यूक्रेनी राष्ट्रपति ने क्रीमिया के साथ साथ डोनबास को लेकर भी समझौते की तरफ आगे बढ़ने की बात कही थी और माना जा रहा था, कि यूक्रेन ने प्रमुख रूसी शर्तों को मान लिया है और युद्ध खत्म होने की दिशा में बदल रहा है, लेकिन ऐसी रिपोर्ट है, कि ये 'शांति समझौता' बाइडेन के पोलैंड दौरे के साथ ही पटरी से उतर चुकी है। और अब रूस जिस दिशा में आगे बढ़ना शुरू हुआ है, वो साफ बता रहा है, कि पागल हो चुकी रूसी सेना यूक्रेन को पूरी तरह से कुचलने के मूड में आ चुकी है।

पोलैंड दौरे पर क्यों गए बाइडेन?

पोलैंड दौरे पर क्यों गए बाइडेन?

यूक्रेन में युद्ध की स्थिति धीरे धीरे कमजोर पड़ने लगी थी और कीव की स्थिति भी मजबूत होती दिख रही थी, उसी वक्त अचानक बाइडेन पोलैंड के उड़ान भरते हुए एयरफोर्स वन पर सवार हो जाते हैं। हालांकि, अमेरिका ने अभी तक भी यूक्रेन में सेना भेजने की मंजूरी नहीं दी है, लेकिन यूक्रेन में भारी संख्या में हथियार लगातार भेजे जा रहे हैं। वहीं, पोलैंड पहुंचने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने दो ऐसे बयान दिया, जो इस नाजुक समय को देखते हुए काफी ज्यादा गलत साबित हो सकते हैं।

यूक्रेन में सेना भेजने की कह दी बात

अपने अनुचित गलतियों के लिए कुख्यात रहे जो बाइडेन ने पोलैंड में तैनात अमेरिकी सेना के 82 वें एयरबोर्न को बता दिया, कि वे यूक्रेन जा रहे हैं। इसके साथ ही राष्ट्रपति बाइडेन ने अमेरिकी सैनिकों के साथ एक सेल्फी भी ली। रिपोर्ट के मुताबिक, अपनी सावधानीपूर्वक लिखी गई टिप्पणियों से अलग होकर, जो बाइडेन ने इस बात पर जोर दे दिया, कि मॉस्को में व्लादिमीर पुतिन के आतंक के शासन को समाप्त करने की आवश्यकता है। यूक्नेन की सीमा पर पहुंचकर रूस में शासन परिवर्तन की बात करना, राजनीतिक तौर पर एक ब्लंडर मिस्टेक माना जा रहा है, जिसको लेकर अब अमेरिकी विदेश मंत्रालय की तरफ से सफाई भी दी गई है। इसके ठीक एक हफ्ते पहले राष्ट्रपति बाइडेन रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को सीधे तौर पर 'युद्ध अपराधी' करार दिया था और पोलैंड में एक बार फिर से बाइडेन ने पुतिन को 'युद्ध अपराधी' करार दिया। वहीं, अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक, देश की आधिकारिक नीति के विपरीत जाकर बाइडेन ने रूस को लेकर ये बयान दिए हैं, जिससे तनाव और भड़क चुका है।

बाइडेन के बयान कैसे भड़का सकती है आग?

बाइडेन के बयान कैसे भड़का सकती है आग?

सबसे पहले, बाइडेन कहते हैं, कि पुतिन एक युद्ध अपराधी हैं, फिर बाइडेन कहते हैं, पुतिन हत्यारे हैं, फिर बाइडेन ऐलान करते हैं, कि यूक्रेन में तैनात अमेरिका के 82वें एयरबोर्न फोर्स को यूक्रेन में तैनात करने का फैसला लिया गया है, फिर बाइडेन कहते हैं, रूस में पुतिन के हिंसक शासन का अंत होना चाहिए, तो फिर परिभाषा के मुताबिक क्या माना जाना चाहिए, कि क्या बाइडेन प्रशासन की भी रूस को लेकर यही नीति है? और अगर औपचारिक तौर पर अमेरिका की ये नीति नहीं है, तो फिर बाइडेन प्रशासन को सार्वजनिक तौर पर अपने बयानों को लेकर स्पष्टीकरण देने की जरूरत होगी।

चीन से समझौता को भी तैयार

चीन से समझौता को भी तैयार

एशिया टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति जो बाइडेन की टीम में शामिल उनके सलाहकार राष्ट्रपति पुतिन को इतिहास मे रूसी शासन की सबसे बड़ी बुराई मान रहे हैं और बाइडेन के ये सलाहकार पुतिन को 'सजा' देने के लिए चीन के साथ भी समझौता करने को तैयार हैं। यह विश्वास करना इतना कठिन नहीं है, कि राष्ट्रपति बाइडेन, वास्तव में, यूक्रेन में अमेरिकी सैनिकों को तैनात करने का समर्थन करते हैं या वह पुतिन शासन को उखाड़ फेंकना चाहते हैं जैसा कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने सद्दाम हुसैन या मुअम्मर गद्दाफी के शासन के लिए किया था (और बशर अल सरकार को उखाड़ फेंकने का प्रयास किया था)। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये पूछे जाने की जरूरत है, कि आखिर क्यों? आखिर क्यों अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन इस भू-राजनीतिक संकट को परमाणु युद्ध की तरफ या फिर विश्वयुद्ध की तरफ मोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, जब यूक्रेन और रूस की सरकार शांति के लिए समझौते करने को तैयार हैं?

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