भाई का खात्मा, तीसरा बेटा होकर भी देश पर नियंत्रण, जानिए किम जोंग का 10 साल का शासनकाल कैसा रहा?

स्विटजरलैंड में पढ़ने की वजह से लोगों का अनुमान था, कि किम जोंग उन देश को तानाशाही शासन से आजादी देंगे, लेकिन किम जोंग उन को लेकर की गई तमाम भविष्यवाणियां गलत साबित हुईं।

प्योंगयांग, दिसंबर 17: किम जोंग उन 30 साल के भी नहीं थे जब उन्होंने दिसंबर 2011 में अपने पिता की मृत्यु के बाद उत्तर कोरिया पर अधिकार कर लिया था। किम जोंग उन के शासन को संभालने के बाद कुछ लोगों ने भविष्यवाणी की थी, कि जब पूरे देश पर शासन करने का भार स्विटजरलैंड में पढ़े गोल-मटोल युवक पर डाला जाएगा, तो वह सुधार का रास्ता चुनेगा और देश को तानाशाही शासन पद्धति से आजादी देगा, लेकिन लोगों की भविष्यवाणी पूरी तरह से गलत साबित हुईं और किम जोंग उम, अपने पिता किम जोंग इल की तरह ही क्रूर तानाशाह निकले, जिसे किसी की हत्या करने में मिनट नहीं लगते।

सत्ता के प्रति किम का जुनून

सत्ता के प्रति किम का जुनून

स्विटजरलैंड में पढ़ने की वजह से लोगों का अनुमान था, कि किम जोंग उन देश को तानाशाही शासन से आजादी देंगे, लेकिन किम जोंग उन को लेकर की गई तमाम भविष्यवाणियां गलत साबित हुईं। उत्तर कोरिया की राजनीति पर गहरी नजर रखने वाले आसन इंस्टीट्यूट फॉर पॉलिसी स्टडीज के एक रिसर्चर गो मायोंग-ह्यून ने अल जजीरा को बताया कि, "किम जोंग उन में हमेशा सत्ता के लिए एक स्वाभाविक प्रवृत्ति रही है"। उन्होंने कहा कि, शायद इसीलिए उन्हें उनके पिता द्वारा "जूचे क्रांति के एकमात्र उत्तराधिकारी और नेता" के रूप में चुना गया था, भले ही वह अपने पिता के सबसे छोटे बेटे थे और पिता ने बाकी बच्चों को सिंहासन का सही उत्तराधिकार नहीं समझा''। गो ने कहा कि, "उनके पास उत्तर कोरिया का नेता बनने का सबसे महत्वपूर्ण गुण था, सत्ता के प्रति उनका जुनून।"

हथियारों के परीक्षण को बढ़ाया आगे

हथियारों के परीक्षण को बढ़ाया आगे

किम जोंग उन ने उत्तर कोरिया में हथियारों के परीक्षण के कार्यक्रम को तेजी के साथ आगे बढ़ाया है और अब थर्मोन्यूक्लियर हथियारों और इंटरकॉन्टिनेम्टल बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण उत्तर कोरिया में किया जा रहा है। उत्तर कोरिया जिन मिसाइलों का परीक्षण कर रहा है, उसकी मारक क्षमता सीधे तौर पर अमेरिका तक है और 2017 में उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच परमाणु युद्ध का खतरा भी बन गया था। किम जोंग उन ने अब तक ऐसे कम ही संकेत दिए हैं, जिससे पता चले कि उत्तर कोरिया में सैन्य शक्ति के विकास को आसान किया जाएगा।

'मिसाइल कार्यक्रम नहीं कीमती तलवार'

'मिसाइल कार्यक्रम नहीं कीमती तलवार'

किम जोंग उन, अपने देश उत्तर कोरिया के मिसाइल कार्यक्रम को अपनी कीमती तलवार कहते हैं। कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस में न्यूक्लियर पॉलिसी प्रोग्राम में स्टैंटन सीनियर फेलो और ''किम जोंग उन और बम'' के लेखक अंकित पांडा ने कहा कि, ''किम जोंग उन अपने शासन के अस्तित्व के लिए मिसाइल कार्यक्रम को बेहद जरूरी मानते हैं।'' लेकिन, किम जोंग उन ने अपने शासन काल के 10 सालों के बाद अपना वजन आश्चर्यजनक तरीके से कम कर भारी सुर्खियां बटोरी हैं, वो देश के सबसे 'अज्ञात देश' के सबसे रहस्यमयी नेता बन गये हैं, जिनमें उनकी भविष्य की योजनाएं भी शामिल हैं। दक्षिण कोरिया में सेजोंग इंस्टीट्यूट में सेंटर फॉर नॉर्थ कोरिया स्टडीज के डायरेक्टर चेओंग सेओंग-चांग बताते हैं, कि "यदि आप वास्तव में जानना चाहते हैं कि किम जोंग उन कौन हैं, तो आपको पहले उनके परिवार और उनकी परवरिश को देखकर जानने की शुरुआत करनी चाहिए।"

''भविष्य के जनरल''

''भविष्य के जनरल''

चेओंग के अनुसार, बेहद कम उम्र से ही किम जोंग उन को सैन्य शक्ति के बारे में जानना उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया था। किम जोंग उन के बचपन की कई ऐसी तस्वीरें हैं, जिनमें वो सेना की वर्दी में नजर आ रहे हैं। किम जोंग उन की एक सैन्य ड्रसे में पूर्ण रैंक के प्रतीक चिन्ह लगे हुए हैं, जो उन्हें कथित तौर पर अपने आठवें जन्मदिन पर मिला था और देश के तमाम अधिकारियों को उसी वक्त आदेश दिया गया था कि, वो किम जोंग उन को एक वरिष्ठ की तरह सलाम करें। चेओंग बताते हैं कि, यह स्पष्ट रूप से एक संकेत था कि किम जोंग उन का पालन-पोषण उनके पिता द्वारा 'भविष्य के जनरल' के रूप में किया जा रहा था"।

किंग जोंग उन का बचपन

किंग जोंग उन का बचपन

जब किम जोंग उन बड़े हुए, तो उन्हें अपने बड़े भाई, किम जोंग चोल के साथ स्विटजरलैंड की राजधानी बर्न के एक निजी स्कूल में पढ़ने के लिए भेजा गया, जिसे उस समय उत्तर कोरिया का उत्तराधिकारी माना जाता था। हालांकि चेओंग का कहना है कि, ''किम जोंग उन का बड़ा भाई जोंग चुल कोई ''महत्वाकांक्षी'' आदमी नहीं था, इसीलिए उसके पिता की नजर में उत्तर कोरिया पर शासन करने के लिए उपयुक्त नहीं माना गया।" और जब किम जोंग उन देश लौटे, तो फिर भविष्यवाणी की गई, कि किम जोंग उन एक ऐसे नेता बनेंगे, जो पश्चिम से प्रभावित होगा, जो आदमी बास्केटबॉल से प्यार करता है और जो एनबीए स्टार डेनिस रोडमैन को पसंद करता है, वो उत्तर कोरिया में ऐसे शासन की स्थापना करेगा, जो पूरी तरह से अलग होगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।

पिता की मौत के बाद संभाली सत्ता

पिता की मौत के बाद संभाली सत्ता

बर्न में पढ़ाई करने के बाद किम जोंग उन ने किम इल सुंग मिलिट्री यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया जहां उन्होंने अपनी सैन्य पढ़ाई पूरी की। 2008 में उन्हें उत्तर कोरिया का उत्तराधिकारी नामित किया गया था और 2011 में अपने पिता के दिल का दौरा पड़ने से निधन होने के बाद अपने दादा द्वारा स्थापित उत्तर कोरिया पर शासन करने का मौका मिला और इसके साथ ही किम जोंग उन ने देश पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया। किम जोंग उन को अपनी तानाशाही पहचान बनाने में काफी कम वक्त लगा। गो मायोंग ह्यून बताते हैं कि, "लोगों ने सोचा था कि, किम जोंग उन को उत्तर कोरिया का नब्ज समझने में काफी वक्त लगेगा, लेकिन आप जानते हैं, किम जोंग उन ने हर उस व्यक्ति को खत्म करने में केवल तीन या चार साल लगाए, जो प्रभावशाली या शक्तिशाली हो सकते थे"। स्विटजरलैंड किम जोंग उन को बदलने में नाकाम रहा।

सौतेले भाई की हत्या

सौतेले भाई की हत्या

फरवरी 2017 में किम जोंग उन ने पूरी दुनिया को उस वक्त चौंका दिया, जब उसने कुआलालंपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के बजट टर्मिनल पर घातक जहर 'नर्व एजेंट' के जरिए अपने सौतेले भाई की हत्या करवा दी। 'किम जोंग नाम' की हत्या के बाद उत्तर कोरिया और मलेशिया के बीच भारी राजनीतिक गतिरोध शुरू हो गया। मलेशिया उन चुनिंदा देशों में से एक है, जिसके यहां उत्तर कोरिया का दूतावास है। हमले में शामिल उत्तर कोरिया के दो एजेंट्स ने फौरन मलेशिया छोड़ दिया, लेकिन वो जल्दबाजी के चक्कर में इंडोनेशिया और वियतनाम की दो महिलाओं को छोड़ गये, जिन्होंने कैमरे के सामने बताया कि, किम जोंग नाम की हत्या किसने की है, क्यों की है और हत्या का इरादा क्या था। महिलाओं ने कहा था कि, उन्हें बिल्कुल नहीं पता था कि, क्या हो रहा है, वो सिर्फ एक गेम शो में हिस्सा ले रही थीं। बाद में महिलाओं की बात को सही पाया गया और उन्हें छोड़ दिया गया था।

विनाशक मिसाइलों की टेस्टिंग

विनाशक मिसाइलों की टेस्टिंग

भाई की हत्या के कुछ समय बाद किम जोंग उन ने मिसाइल परीक्षणों की झड़ी लगाकर पूरी दुनिया में सुर्खियां बटोरनी शुरू कर दीं। जिनमें से दो इंटरकॉन्टिनेन्टल बैलिस्टिक मिसाइलें भी शामिल हैं, जो अमेरिका के प्रमुख शहरों को उड़ाने में सक्षम हैं। जिसके बाद अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आग बबूला हो गये थे और उन्होंने उत्तर कोरिया को परमाणु बम से उड़ाने की धमकी दे दी थी। अमेरिकी पत्रकार बॉब वुडवर्ड ने अपनी एक किताब में इस घटना का जिक्र करते हुए लिखा है कि, इस घटना के बाद राष्ट्रपति ट्रंप के रक्षा प्रमुख ने कथित तौर पर दुनिया में परमाणु युद्ध होने की आशंका जताई थी। हालांकि, अगले ही साल स्थिति पूरी तरह से पलट गई और डोनाल्ड ट्रम्प ने जनता को बताया कि, वह किम जोंग उन के साथ एक बैठक करने के लिए राजी हो गये हैं और फिर कुछ समय के लिए परमाणु युद्ध का तनाव कम हो गया था। इसके साथ ही डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग उन की मुलाकात भी हुई थी, जिसमें दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन भी शामिल हुए थे।

ट्रंप के साथ मुलाकात, नहीं बनी बात

ट्रंप के साथ मुलाकात, नहीं बनी बात

साल 2018 में पहली बार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के प्रमुख किम जोंग उन के बीच शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात हुई, लेकिन हर तरह की उम्मीद जल्द ही फीकी पड़ गई, क्योंकि दोनों पक्ष इस बात पर सहमत नहीं हो पाए कि किसे अपना लाभ पहले छोड़ना चाहिए। परमाणु हथियार और परमाणु हथियार बनाने को लेकर प्रतिबंध, इन मुद्दों पर बात फंसी रह गई। वहीं, 2019 में ट्रम्प के साथ किम जोंग उन का दूसरा शिखर सम्मेलन भी विफल हो गया। हालांकि, इस दौरान उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया की सीमा रेखा पर कुछ यादगार तस्वीरें जरूरी खींची गईं थीं। ट्रम्प ने किम को "छोटा रॉकेट मैन" कहा था और जबाव में किम जोंग उन ने डोनाल्ड ट्रंप का मजाक उड़ाते हुए उन्हें "डॉटर्ड" कहा था। यूनाइटेड नेशंस ने कहा कि, उसे कथित तौर पर सेवामुक्त किए जा चुके योंगब्योन परिसर में परमाणु सामग्री के उत्पादन के सबूत मिले हैं।

किम जोंग उन को लेकर अफवाह

किम जोंग उन को लेकर अफवाह

साल 2020 के शुरूआती महीनों में अचानक किम जोंग उन कई महीनों के लिए गायब हो गये थे और फिर किम जोंग उन की मौत की अफवाह भी उड़ी थी। लेकिन, कुछ महीने के बाद किम जोंग उन एक बार फिर से सार्वजनिक कार्यक्रम में दिखे और इस बार उनका वजन काफी कम हो गया था। किम जोंग उन सार्वजनिक रूप से दिखते ही फिर से अमेरिका को धमकी दे डाली थी और कहा था कि, उत्तर कोरिया अमेरिकी आक्रमण को रोकने के लिए विनाशक हथियार तैयार कर रहा है। 'किम जोंग उन और बम'' नामक किताब लिखने वाले अंकित पांडा ने अलजजीरा से बात करते हुए कहा कि, "मुझे लगता है कि यह उत्तर कोरिया ने सुरक्षा को लेकर स्थिति और गंभीर कर दी है, क्योंकि उत्तर कोरिया को देखते हुए जापान चिंतित है और उसने रक्षा क्षेत्र में अतिरिक्त निवेश किया है और अमेरिका को भी दक्षिण कोरिया के साथ बातचीत करनी पड़ रही है।'' वो बताते हैं, कि अपने पिता की तुलना में किम जोंग उन 'महान' बनने में कामयाब रहा है और वो अपनी क्षमता के साथ अमेरिका के सामने खड़ा हुआ है।

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