लंदन में भारतीय उच्चायोग पर हमला, ब्रिटेन में रहने वाले हिन्दुस्तानी भड़के, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर काला साया
ब्रिटेन की सरकार पर सवाल इसलिए उठ रहे हैं, क्योंकि सिख चरमपंथियों के इस हरक को लेकर मोदी सरकार ने ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी MI-5 को पहले ही अलर्ट कर दिया था।

Diaspora uproar as Khalistanis attack on indian high commission: यूनाइटेड किंगडम की राजधानी लंदन में खालिस्तानी चरमपंथियों के एक समूह भारतीय उच्चायोग पर हमला किया है और भारतीय तिरंगे को हटाकर खालिस्तानी झंडा लगाने की कोशिश की, जिसके बाद यूके में भारतीय प्रवासी के भीतर भारी आक्रोश है, लिहाजा, यूके-भारत द्विपक्षीय संबंधों और दोनों देशों के बीच चल रही व्यापार वार्ता पर इसके प्रभाव को लेकर खतरे की घंटी बज रही है।
भारतीय समुदाय में भारी गुस्सा
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) के यूके डायरेक्टर परम शाह ने कहा है, कि "जब तक यूके सरकार तेजी से और निर्णायक रूप से कार्रवाई नहीं करती है, मुझे डर है कि लंदन में भारतीय उच्चायोग पर यह अपमानजनक हमला भारत-ब्रिटेन द्विपक्षीय संबंधों को गंभीर असर डालेगा, खासकर जब हम फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) को फाइनल करना चाहते हैं।" वहीं, भारतीय अधिकारियों ने कहा है, कि खालिस्तानी झंडे लगाने की कोशिश की गई थी, जिसे फेल कर दिया गया है। वहीं, भारतीय उच्चायोग ने एक विशालकाय तिरंगा भी लगाया है, जो खालिस्तानियों के मुंह पर जोरदार तमाचा है। हालांकि, ब्रिटेन सरकार ने भी तत्काल इस घटना की निंदा की है, लेकिन ब्रिटेन के विदेश कार्यालय मंत्री लॉर्ड तारिक अहमद और यूके में ब्रिटिश उच्चायुक्त एलेक्स एलिस ने इस घटना को लेकर जोरदार कार्रवाई की मांग की है।
सवालों के घेरे में यूके की सुनक सरकार
वहीं, फ्रेंड्स ऑफ इंडिया सोसाइटी इंटरनेशनल (FISI) यूके ने इसी तरह की पिछली घटनाओं का संदर्भ दिया है इसे एक "अपमानजनक कृत्य" बताकर इसकी कड़ी निंदा की है। वहीं, FISI ने यूके सरकार से "सख्त कार्रवाई" करने का आह्वान किया है। FISI यूके ने कहा, कि "इस तरह के प्रयास अतीत में भी हुए हैं, इसलिए यह भारतीय राजनयिक परिसरों में यूके सरकार द्वारा प्रदान की गई सुरक्षा से संबंधित है, जो वियना कन्वेंशन के मूल दायित्वों के खिलाफ भी है"। FISI ने कहा, कि "इस विशेष घटना में, भारतीय उच्चायोग ने गुंडों का बहादुरी से मुकाबला किया और उनसे झंडा हटाकर भारत का गौरव बहाल किया। भारतीय अधिकारी को परिसर में उपयुक्त सुरक्षा की कमी के कारण कार्रवाई करनी पड़ी।"
इंडियन नेशनल स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने भी निंदा
वहीं, इंडियन नेशनल स्टूडेंट्स एसोसिएशन (INSA) यूके ने भी गहरी चिंता व्यक्त की और हमले की निंदा की है। INSA ने कहा, कि "हमारी संप्रभुता और गरिमा पर हमला करने के अलावा, हिंसा का यह कृत्य हमारे राजनयिकों और कर्मचारियों को खतरे में डालता है। हम आक्रामकता के इस कृत्य की कड़ी निंदा करते हैं और अपराधियों को न्याय के कठघरे में लाने के लिए यूके के अधिकारियों से तत्काल और निर्णायक कार्रवाई करने का आह्वान करते हैं"। INSA ने कहा, कि "हम अपने देश के प्रतिनिधियों के साथ एकजुटता से खड़े हैं और तब तक चैन से नहीं बैठेंगे, जब तक कि जिम्मेदार लोगों को उनके इस काम के लिए जवाबदेह नहीं ठहराया जाता है।"
सिख नेताओं ने की घटना की कड़ी निंदा
वही, ब्रिटेन में कई गुरुद्वारों और ब्रिटिश सिख नेताओं ने भी हिंसा के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई है। वहीं, यूके सेवा ट्रस्ट के संस्थापक और अध्यक्ष चरण सिंह सेखों एमबीई ने समुदाय के नेताओं के एक संयुक्त बयान में कहा, कि "हर किसी को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है, लेकिन भारतीय उच्चायोग के कर्मचारियों के खिलाफ हिंसा या धमकियों का उपयोग और बलपूर्वक तिरंगा हटाने की कोशिश स्वीकार्य नहीं है और हम इन कार्यों की निंदा करते हैं"। उन्होंने कहा, कि "इस तरह की कार्रवाइयां यूके और भारत के संबंधों और हमारे सामुदायिक सामंजस्य को नुकसान पहुंचाने के अलावा कुछ भी हासिल नहीं कर सकती हैं।"
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कड़ी कार्रवाई की मांग
वहीं, श्री गुरु रविदास सभा बेडफोर्ड के अध्यक्ष जसविंदर कुमार, और रामगढ़िया सिख सोसाइटी बेडफोर्ड के उपाध्यक्ष गुरमेल सिंह ने भी इस घटना की निंदा की है और गुंडों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। आपको बता दें, कि अतीत में भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं और पहले भी इंडिया हाउस पर पथराव किया जा चुका है। इनसाइट यूके ने कहा, कि "हम यूके सरकार से इंडियन हाई कमीशन के खिलाफ हमलों में शामिल चरमपंथियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हैं। हम आह्वान करते हैं, कि उनके खिलाफ तेजी से और कड़ी कार्रवाई की जाए और सभी राजनयिक मिशनों और कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।"












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