Defense Budget: पाकिस्तान की GDP से ज्यादा भारत का डिफेंस बजट, जानिए फिर किस बात की कमीं
Defense Budget: पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान में तनाव चरम पर है। ऐसे में पाकिस्तान की तरफ से मिल रही तमाम धमकियों में कितना वजन है ये आंकने के लिए हमने कुछ आंकड़ों का अध्ययन किया। जिसमें कुछ ऐसे आंकड़े सामने आए हैं जिनके आधार पर यह कहा जा सकता है कि पाकिस्तान, भारत से कम से कम एक सदी पीछे है।
पाकिस्तान, भारत के मुकाबले कितना पीछे?
भारत अपने डिफेंस बजट में होने वाले खर्च के आधार पर ग्लोबल लेवल पर पांचवें नंबर पर आता है। भारत का डिफेंस बजट पाकिस्तान के पूरे बजट से भी ज्यादा बैठता है। वहीं पाकिस्तान, भारत से लगभग 9 गुना पीछे है। पाकिस्तान का कुल बजट 5.65 लाख करोड़ रुपए है, जबकि भारत का सिर्फ डिफेंस बजट ही 7.19 लाख करोड़ है। इस लिहाज से यदि भारत-पाकिस्तान में युद्ध होता है तो पाकिस्तान ज्यादा दिन टिक नहीं पाएगा।
डिफेंस पर खर्च क्यों बढ़ा?
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) ने ग्लोबल डिफेंस खर्च में बढ़ोतरी बताते हुए डेटा जारी किया है। 2024 में, दुनिया भर में डिफेंस खर्च रिकॉर्ड 2,718 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो कोल्ड वॉर खत्म होने के बाद से साल-दर-साल सबसे अधिक वृद्धि को दर्शाता है। इस उछाल का कारण दुनिया भर में चल रही जंगों और जियो-पॉलिटिकल कारणों को दिया जाता है।

कौन-सा देश डिफेंस पर कितना करता है खर्च?
SIPRI के मुताबिक, शीर्ष पांच देशों का ग्लोबल डिफेंस खर्च में 60% हिस्सा है, जो कुल 1,635 बिलियन डॉलर है। संयुक्त राज्य अमेरिका 997 बिलियन डॉलर के साथ सबसे आगे है, उसके बाद चीन 314 बिलियन डॉलर, रूस 149 बिलियन डॉलर, जर्मनी 88 बिलियन डॉलर और भारत 86 बिलियन डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर है। अन्य उल्लेखनीय व्यय करने वालों में यूके ($82 बिलियन), सऊदी अरब ($80 बिलियन), यूक्रेन ($65 बिलियन), फ्रांस ($65 बिलियन) और जापान ($55 बिलियन) शामिल हैं। पाकिस्तान 10 बिलियन डॉलर के व्यय के साथ 29वें स्थान पर है।
भारत डिफेंस में कहां-कहां खर्च करता है?
2025-26 के लिए भारत के 6.8 लाख करोड़ रुपये ($80 बिलियन) के पर्याप्त रक्षा बजट के बावजूद, केवल 22% ही नए हथियार सिस्टम और प्लेटफ़ॉर्म खरीदने के लिए आवंटित किया गया है। इसका अधिकांश हिस्सा 1.4 मिलियन सशस्त्र बलों के कर्मियों के वेतन और परिचालन लागतों और 3.4 मिलियन से अधिक पूर्व सैनिकों और रक्षा नागरिकों की पेंशन पर खर्च किया जाता है।
क्या कम है भारत का डिफेंस बजट?
भारत का रक्षा व्यय उसकी GDP का मात्र 1.9% है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि चीन और पाकिस्तान से होने वाले खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के लिए कम से कम 2.5% खर्च करना अब भारत की जरूरत है। डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में पीछे होने के कारण भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार इम्पोर्ट करने वाला देश है। इसके अलावा, भारत के जियो पॉलिटिकल लक्ष्यों के मुताबिक डिफेंस कैपेसिटी को बढ़ाने की भी जरूरत दिखाई देनी लगी है। भारत को लड़ाकू विमानों, पनडुब्बियों, हेलीकॉप्टरों, एयर डिफेंस टेक्नोलॉजी, एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों और रात में लड़ने की क्षमताओं में अभी और अपडेट होने की सख्त जरूरत है।
चीन की डिफेंस में की बेतहाशा बढ़ोतरी
SIPRI की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन का डिफेंस खर्च 2024 में पिछले साल की तुलना में 7% बढ़कर 314 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। यह 2015 के बाद से चीन की सबसे बड़ी सालाना बढ़ोतरी है। 2024 में, चीन ने नए स्टील्थ फाइटर जेट और ऑटोमेटिक एयर व्हीकल (UAV) सहित कई शानदार डिफेंस टेक्नोलॉजी को दुनिया के सामने लाया। इसके अलावा, चीन ने 2024 में अपने न्यूक्लियर स्टॉक का तेजी से विस्तार किया और साथ ही अंतरिक्ष और साइबर युद्ध क्षमताओं को बढ़ाया। इस दौरान उसने अलग-अलग एयरोस्पेस और साइबरस्पेस सेनाएं भी तैनात की हैं।
भारत को LAC और LOC दोनों तरफ से खतरा
SIPRI की यह रिपोर्ट पाकिस्तान और चीन के साथ भारत की सीमाओं पर बढ़ते तनाव के बीच सामने आई है। पहलगाम हत्याकांड जैसी हालिया आतंकी घटनाओं के बाद पाकिस्तान के साथ LOC पर तनाव और पूर्वी लद्दाख में कुछ सैनिकों की वापसी के बावजूद चीन ने LAC पर 100,000 से ज़्यादा सैनिक तैनात कर रखे हैं, ये भारत के लिए एक आदर्श स्थिति नहीं कही जा सकती। अगर भारत, पाकिस्तान और चीन दोनों से सुरक्षा चुनौतियों के कारण ग्लोबल डिफेंस खर्च में एक प्रमुख खिलाड़ी बना हुआ है, फिर भी उसे अपने रक्षा बजट में अभी भी बढ़ोतरी करना ही होगी, क्योंकि पाकिस्तान, चीन के अलावा शेख हसीना के जाने के बाद से भारत के लिए बांग्लादेश एक नया फ्रंट बनकर सामने आ रहा है। देखना होगा कि भारत अब अपने डिफेंस बजट को कितना बढ़ाता है और किस तरह खर्च करता है।
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