दुनिया की सबसे बड़ी कोरोना वैक्सीन स्टडी अपने फाइनल स्टेज में, 30,000 लोगों पर ट्रायल शुरू
वॉशिंगटन। कोरोना वायरस के वैक्सीन बनाने के लिए दुनियाभर के बड़े-बड़े देश जुटे हैं और मौजूदा समय वैक्सीन के कई ट्रायल चल रहे हैं। इसमें अमेरिका की कंपनी सबसे आगे है। अमेरिका में कोरोना की वैक्सीन ट्रायल के लिए तैयार है और इसका 30000 लोगों पर ट्रायल सोमवार को शुरू हो गया। ये तमाम वॉलंटियर अपनी स्वेच्छा से इस वैक्सीन का ट्रायल अपने उपर करा रहे हैं, जिसे अमेरिकी सरकार ने तैयार किया है। हालांकि अभी तक इसकी कोई पुख्ता गारंटी नही है कि अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड मॉडर्ना का यह वैक्सीन कोरोना से लोगों की रक्षा करेगा या नहीं।
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दरअसल जिन लोगों को कोरोना का यह वैक्सीन दिया जा रहा है उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि उन्हें वास्तविक टीका दिया जा रहा है या फिर अभी उन्हें इसका डमी संस्करण दिया जा रहा है। वालंटियर्स को इस वैक्सीन की दो खुराक देने के बाद वैज्ञानिक इन लोगों पर पैनी नजर रखेंगे। जब ये वालंटियर अपने सामान्य दिनचर्या पर लौटेंगे तो इनपर नजर रखी जाएगी। डॉक्टर एंथनी फाउसी का कहना है कि दुर्भाग्य से अमेरिका में कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या बहुत अधिक है, लिहाजा ये लोग जब ऐसी जगहों पर जाएंगे जहां संक्रमण बहुत है तो इनपर पैनी नजर रखी जाएगी।
वहीं मॉडर्ना का कहना है कि सबसे पहले टीकाकरण सवाना, जॉर्जिया में किया गया। देश में सात दर्जन से अधिक ट्रायल साइट को स्थापित किया गया है, जहां लोगों पर इस वैक्सीन का ट्रायल किया जा रहा है। बता दें कि इससे पहले चीन और ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने भी ब्राजील और अन्य कोरोना प्रभावित देशों में कोरोना की वैक्सीन का ट्रायल इसी महीने शुरू किया है, जोकि अपने फाइनल स्टेज पर है। बता दें कि अमेरिका में कोरोना संक्रमण के मामले सर्वाधिक हैं। यहां डेढ़ लाख से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 30 लाख से अधिक लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं।












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