कैसे जानलेवा बन जाता है कफ सिरप? इन देशों में भी भारी तबाही मचा चुकी है खांसी की दवाई

कंपनी ने मीडिया रिपोर्टों पर हैरानी जताई है। कंपनी ने कहा है कि बच्‍चों की मौत के बारे में मीडिया रिपोर्टों द्वारा मिली जानकारी से उसे हैरानी है। इसे लेकर वह बहुत ज्‍यादा दुखी है।

Gambia children tragedy: गाम्बिया की पुलिस ने कथित तौर पर कफ सिरप (cough syrup) पीने से हुई 66 बच्चों की मौत के मामले की जांच कराने का ऐलान किया है। ऐसा दावा किया गया है कि अधिकतर बच्चों की मौत किडनी फेल होने से हुई है। पुलिस ने आयातित दवाओं को लेकर पैदा हुई चिंताओं से बढ़ते दबाव के बीच जांच का यह एलान किया है। पुलिस का कहना है कि इस मामले की जांच में कई सीनियर अधिकारियों को लगाया गया है। इस बीच भारतीय दवा कंपनी मैडेन फार्मास्‍यूटिकल्‍स (Maiden Pharma) ने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी है।

Image- File

कंपनी ने दावे को नकारा

कंपनी ने दावे को नकारा

शनिवार को सोनीपत स्थित मैडेन फार्मास्‍यूटिकल्‍स कंपनी ने कहा है कि बच्‍चों की मौत के बारे में मीडिया रिपोर्टों से उसे हैरानी है। इसे लेकर वह बहुत ज्‍यादा दुखी है। कंपनी ने बताया कि बच्चों के साथ हुई इस घटना की जानकारी उसे 5 अक्‍टूबर 2022 को गाम्बिया में अपने एजेंट से माध्यम से मिली है। इसके अगले दिन विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (WHO) ने कंपनी के खिलाफ अलर्ट जारी किया। कंपनी ने बचाव में अपना तर्क देते हुए कहा कि उसके पास अपने उत्‍पादों का निर्यात करने के लिए जरूरी अप्रूवल है। घरेलू बाजार में वह किसी भी उत्पाद की बिक्री नहीं करती है। कंपनी दवा बनाने के लिए कच्‍चा माल भी सर्टिफाइड और प्रख्‍यात कंपनियों से लेती है।

कई अफ्रीकी देशों में मिलता है ये कफ सीरप

कई अफ्रीकी देशों में मिलता है ये कफ सीरप

इससे पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने हरियाणा के सोनीपत स्थित मेडेन फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड द्वारा निर्मित चार कफ सिरप के खिलाफ अलर्ट जारी करते हुए कहा कि वे पश्चिम अफ्रीकी राष्ट्र में मौतों का कारण हो सकते हैं। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि गाम्बिया ने मौतों के लिए जिम्मेदार बताए जा रहे खांसी के सिरप को इकट्ठा करने के लिए घर-घर अभियान शुरू किया है। जानकारी के मुताबिक मौतों से जुड़े ये चार कफ सिरप प्रोमेथाजिन ओरल सॉल्यूशन, कोफेक्समालिन बेबी कफ सिरप, मैकॉफ बेबी कफ सिरप और मैग्रीप एन कोल्ड सिरप हैं। इस कंपनी के सिरप की अल्जीरिया, सेनेगल, नाइजीरिया, कैमरून, केन्या और तंजानिया जैसे देशों में मजबूत उपस्थिति है।

इंसानों के लिए जहरीला है DEG

इंसानों के लिए जहरीला है DEG

प्रयोगशाला विश्लेषण से पता चला है कि चार कफ सिरप में से प्रत्येक में प्रदूषकों के रूप में डायथिलीन ग्लाइकोल और एथिलीन ग्लाइकोल की मात्रा मानक रूप से अधिक है। WHO की ओर से कहा गया है कि डायथिलीन ग्लाइकोल यानि DEG इंसानों के लिए जानलेवा है। इससे किडनी को नुकसान पहुंचने के अलावा, तंत्रिकातंत्र को भी नुकसान पहुंच सकता है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के रिसर्च पेपर के मुताबिक इस पदार्थ का इस्तेमाल प्रोडक्ट को जमने से रोकने के लिए किया जाता है। लेकिन अधिक मात्रा में इसके इस्तेमाल व्यक्ति कोमा में जा सकता है और फिर उसकी मौत भी हो सकती है।

क्या लक्षण होते हैं ?

क्या लक्षण होते हैं ?

यह केमिकल बिना किसी गंध के मीठे स्वाद लिए होता है और यह पानी में नहीं घुलता है। इस केमिकल के इस्तेमाल से पेट में दर्द, उल्टी, डायरिया, मानसिक तनाव, पेशाब करने में समस्या, सिर दर्द, किडनी को गंभीर नुकसान जैसी समस्या हो सकती है। रिसर्च पेपर के अनुसार इस केमिकल के इस्तेमाल से 10 बड़े मामले ऐसे सामने आ चुके हैं जब बड़ी संख्य़ा में लोगों ने इसे पीया और बीमार पड़ गए।

इन देशों में भी मचा चुका है तबाही

इन देशों में भी मचा चुका है तबाही

बांग्लादेश में 1990 और 1992 के बीच, इस केमिकल के सेवन से 339 बच्चों की किडनी खराब हो गई और उनमें से अधिकांश की मृत्यु हो गई। नाईजीरिया में भी 2009 में इस केमिकल से जुड़े कुल 13 मामले सामने आए थे। वर्ष 2006 में पनामा में डायथिलीन ग्लाइकोल से सौ से अधिक लोगों की मृत्यु हो गई थी। वहीं भारत के जम्मू में साल 2020 में इस केमिकल के कारण 9 बच्चों की मौत हो गई थी।

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