Corona Side Effects: हार्ट-किडनी हो रहे फेल, 3 साल बाद भी 'जान' ले रहा कोरोना! रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा
Corona Side Effects: कोरोना वायरस ने न सिर्फ जिंदगियां लीं, बल्कि अनगिनत लोगों के स्वास्थ्य को भी गंभीर रूप से प्रभावित किया। कोरोना का आतंक भले ही खत्म हो गया है, लेकिन इसके साइड इफेक्ट्स तीन साल बाद भी लोगों की जान पर भारी पड़ रहे हैं। हालिया शोध में इस बात का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।

कोरोना के बाद से हार्ट, किडनी फेल होने के मामलों में इजाफा हुआ। हाल ही में पेरिस के बिचैट अस्पताल के शोधकर्ताओं ने इस पर अध्ययन किया। इस अध्ययन में सामने आया कि इस कोविड-19 से अस्पताल में भर्ती हुए लोगों में डिस्चार्ज होने के 30 महीने बाद तक विभिन्न अंग विकारों के कारण मृत्यु या अस्पताल में भर्ती होने का खतरा बढ़ गया था।
इस ताजा अध्ययन में पाया गया है कि कोरोना के बाद अस्पताल से छुट्टी मिलने के ढाई साल बाद तक भी इन लोगों को मौत या अंगों से जुड़ी बीमारियों का खतरा बना रहता है। पहले के अध्ययनों में भी ये बात सामने आई थी कि 'लॉन्ग कोविड' से पीड़ित लगभग 60 प्रतिशत मरीजों में अंगों को नुकसान पहुंचता है। 'लॉन्ग कोविड' का मतलब है, बीमारी से ठीक होने के बाद भी थकान जैसे लक्षण बने रहना।
पेरिस के बिचैट अस्पताल के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस अध्ययन में लगभग 64,000 फ्रांसीसी नागरिकों को शामिल किया गया। इसमें यह भी पाया गया कि कोविड-19 के कारण अस्पताल में भर्ती हुए लोगों में, किसी भी कारण से होने वाली मौतों की दर, उन लोगों की तुलना में ज़्यादा थी जो अस्पताल में भर्ती नहीं हुए थे। यानी, अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी, वह पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो सके।
दिल, दिमाग और सांस पर असर (Corona Side Effects on Body Organs)
टीम ने बताया कि कोविड-19 के मरीज़ों को किसी भी कारण से अस्पताल में भर्ती होने की संभावना ज़्यादा थी, खासकर न्यूरोलॉजिकल, मनोरोग, हृदय और सांस संबंधी समस्याओं के लिए। महिलाओं में पुरुषों की तुलना में मनोरोग कारणों से अस्पताल में भर्ती होने का खतरा ज़्यादा पाया गया।
कोरोना गया, लेकिन बीमार कर गया!
बिचैट अस्पताल में संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. सारा टुबियाना ने कहा, "यह अध्ययन कोविड-19 के दूरगामी प्रभाव की एक सख्त याद दिलाता है, जो शुरुआती संक्रमण से कहीं आगे तक फैला हुआ है।" उन्होंने आगे कहा, "सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए इसके दीर्घकालिक निहितार्थ महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि हमारे शोध से पता चलता है कि कोविड-19 के कारण अस्पताल में भर्ती हुए लोगों को महीनों और सालों बाद भी गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं का खतरा बना रहता है।" आसान शब्दों में कहा जाए तो कोरोना से अस्पताल में भर्ती होने वालों को अपनी सेहत का ख़ास ख्याल रखना होगा।
पुराने डेटा पर आधारित, लेकिन चेतावनी गंभीर
शोधकर्ताओं ने जनवरी से अगस्त 2020 के बीच कोविड-19 के कारण अस्पताल में भर्ती हुए 63,990 वयस्कों को 30 महीनों तक फॉलो किया। उन्होंने मौतों और अस्पताल में भर्ती होने की घटनाओं पर नज़र रखी। अध्ययन में शामिल लोगों की औसत आयु 65 वर्ष थी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा दावा डेटाबेस का विश्लेषण किया गया। इसके अलावा, सामान्य आबादी के लगभग 3.2 लाख लोगों को भी शामिल किया गया, जो उसी अवधि के दौरान कोविड-19 के कारण अस्पताल में भर्ती नहीं हुए थे।
लेखकों ने लिखा, "कोविड-19 से अस्पताल में भर्ती हुए लोगों में डिस्चार्ज होने के 30 महीने बाद तक विभिन्न अंग विकारों के कारण मृत्यु या अस्पताल में भर्ती होने का खतरा बढ़ गया था, जो बीमारी के बहु-अंग परिणामों को दर्शाता है।" हालाँकि, लेखकों ने यह भी माना कि यह अध्ययन 2020 की शुरुआत में संक्रमित रोगियों पर आधारित है, इसलिए नए वेरिएंट के लिए यह पूरी तरह से लागू नहीं हो सकता है। फिर भी, यह अध्ययन कोविड-19 के कारण अस्पताल में भर्ती हुए लोगों के लिए निरंतर स्वास्थ्य देखभाल और निगरानी की आवश्यकता पर जोर देता है।












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