ब्रिटेन से आई चौंकाने वाली रिपोर्ट, यहां भारतीय और पाकिस्तानियों की अधिक हो रही कोरोना से मौत, आखिर क्या है वजह

नई दिल्ली। पूरी दुनिया इस वक्त कोरोना वायरस (कोविड-19) महामारी से जूझ रही है। दुनियाभर में इसके मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। दुनियाभर में अब तक कोरोना से 36 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं तो वहीं अब तक 2.52 लाख से अधिक लोगों की मौत हो गई है। इसी बीच लंदन से एक चौकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है जिसनें कोरोना वायरस पर रिसर्च कर रहे वैज्ञानिकों और डॉक्टर्स को हौरान कर दिया है। यूके के सांख्यिकी विभाग द आफिस फॉर नेशनल स्टैटिस्टिक्स (ओएनएस) के मुताबिक, कोरोना वायरस संक्रमण से मरने का खतरा श्वेत लोगों की तुलना में बांग्लादेशी, पाकिस्तानी, भारतीय और अन्य जातीय समूहों में अधिक है।

कोरोना वायरस से मौत को लेकर आई चौकाने वाली रिपोर्ट

कोरोना वायरस से मौत को लेकर आई चौकाने वाली रिपोर्ट

ब्रिटेन में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या 2 लाख के पार जा चुकी है वहीं, इस महामारी से अब तक देश में कुल 30,076 लोगों की मौत हो चुकी है। ओएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक लंदन में कोरोना वायरस के मौरने वालों में श्वेत (गोरे) लोगों की तुलना में भारतीय एवं अन्य समूहों के लोगों की मौत अधिक हुई है। गुरुवार को जारी किए गए नए आंकड़ों के मुताबिक, ब्रिटेन में अश्वेत लोगों को कोविद-19 से श्वेत लोगों की तुलना में चार गुना अधिक मरने की संभावना है और कई अन्य जातीय समूह भी बढ़े हुए जोखिम में हैं।

अश्वेत महिलाओं में भी मौत की संभावना ज्यादा

अश्वेत महिलाओं में भी मौत की संभावना ज्यादा

रिपोर्ट में पाया गया कि अश्वेत महिलाओं (कैरिबियन, अफ्रीकन और अन्य) में कोरोना वायरस से मौत की संभावना श्वेत महिलाओं की तुलना में 4.3 गुना अधिक है, जबकि अश्वेत पुरुषों के मरने की संभावना 4.2 है। रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेशी, पाकिस्तानी, भारतीय और मिश्रित नस्ल के लोगों के कोरोना वायरस से मौत का मामला बाकियों से अधिक था। ओएनएस ने दो मार्च से 10 अप्रैल के बीच इंग्लैंड और वेल्स के लिए कोविड-19 संबंधित मौत के आंकड़ों का अध्ययन किया।

भारतीय मूल के 483 व्यक्तियों की मौत

भारतीय मूल के 483 व्यक्तियों की मौत

मौत के आंकड़ों के जातीय समूह आधारित विश्लेषण से पाया कि इस खतरनाक वायरस से भारतीय मूल के 483 व्यक्तियों की मौत हुई। इनमें से अधिकतर की आयु 65 वर्ष से अधिक थी। ओएनएस ने अपने निष्कर्ष में कहा, कोविड-19 की मृत्यु दर में जातीय समूहों के बीच का अंतर आंशिक रूप से सामाजिक-आर्थिक प्रतिकूल परिस्थितियों और अन्य परिस्थितियों का परिणाम है, लेकिन अंतर का शेष हिस्सा अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ है।

श्वेतों के मुकाबले 4.2 गुना अधिक हुई अश्वेत लोगों की मौत

श्वेतों के मुकाबले 4.2 गुना अधिक हुई अश्वेत लोगों की मौत

यहां तक ​​कि मृतकों के उम्र, जनसांख्यिकीय कारकों और सेल्फ रिपोर्ट की गई स्वास्थ्य समस्याओं के उपायों को ध्यान में रखने के बाद भी पाया गया कि अश्वेत पुरुषों में कोविड-19 से मौत का खतरा श्वेतों के मुकाबले 4.2 गुना अधिक है। कुछ ऐसा ही महिलाओं के मामले में भी है, अश्वेत महिलाओं में श्वेत महिलाओं के मुकाबले 4.3 गुना अधिक है। हालंकि मौत के बीच ऐसा अंतर क्यों है इस पर शोधकर्ता रिसर्च कर रहे हैं। उधर, ब्रिटेन के न्याय सचिव डेविड लैमी ने गुरुवार को ट्वीट कर इन निष्कर्षों को भयावह बताया है। उन्होंने कहा, अश्वेत पुरुषों और महिलाओं की रक्षा के लिए कार्रवाई की जानी चाहिए।

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