UK Election Result 2024: कंजर्वेटिव पार्टी का सूपड़ा साफ, इन 5 वजहों से ऋषि सुनक पर फोड़ा जा रहा हार का ठीकरा!
UK General Election Result 2024: कंजर्वेटिव पार्टी आज जिस "अराजकता" में फंसी हुई है, उसके लिए आखिरकार अंतम रूप से ऋषि सुनक ही जिम्मेदार हैं। इस साल की शुरुआत में टीज वैली के मेयर के रूप में फिर से चुने गए लॉर्ड बेन हौचेन ने मई में यही कहा था।
उन्होंने कहा, कि बहुत सारे टोरी "एक दूसरे से बोरी में बंद चूहों की तरह लड़ रहे हैं" और इसका दोष "आखिरकार ऋषि सुनक पर है"।

उनकी टिप्पणी प्रधानमंत्री ऋषि सुनक के लिए हैरानी भरा होने के साथ साथ एक करारा झटका थी था और आज जब यूके इलेक्शन का रिजल्ट जारी हो रहा है और जिस तरह से इलेक्शन में कंजर्वेटिव पार्टी का सूपड़ा साफ हुआ है, उसे देखने के बाद यही कहा जा सकता है, कि ऋषि सुनक अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकते हैं।
टीज वैली जब टिप्पणी की थी, वो वह समय था, जब ऋषि सुनक की पार्टी से या तो सांसदों का पलायन हो रहा था, या फिर सांसद चुनाव लड़ने से इनकार कर रहे थे। कम से 75 से ज्यादा मौजूदा सांसदों ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया और दर्जनों सांसदों ने कंजर्वेटिव पार्टी छोड़कर या तो लेबर पार्टी, या फिर दूसरी पार्टियों में शामिल होने का फैसला ले लिया।
वरिष्ठ नेता और डोवर की सांसद नताली एल्फिके ने कंज ने अप्रवासियों के मुद्दे पर ऋषि सुनक के रिकॉर्ड का विरोध करते हुए लेबर पार्टी का दामन थाम लिया था।
इन घटनाओं के दो महीने बाद जब ब्रिटेन में संसदीय चुनाव हुए, तो पोलिटिको ने टिप्पणी की, कि गुरुवार को होने वाले चुनाव "ऋषि सुनक को गुमनामी के अंधेरे में धकेलने वाले चुनाव होंगे।" पोलिटिको ने कहा, कि आठ वर्षों में कंजर्वेटिव पार्टी के पांचवें प्रधानमंत्री के रूप में, ऋषि सुनक को "अब कभी भी उनकी शर्तों पर नहीं आंका जाएगा, और यह उनका अभिशाप है।"
पार्टी में मची भगदड़ को संभालने में नाकाम रहे सुनक
सिर्फ सांसद लॉर्ड हाउचेन और एल्फिके ही अपवाद नहीं थे। इस साल की शुरुआत में ऐसी अफवाहें थीं, कि टोरी सांसदों का एक समूह सुनाक की जगह उनके पूर्व नेतृत्व प्रतिद्वंद्वी और अब उनके मंत्रिमंडल में हाउस ऑफ कॉमन्स के नेता पेनी मोर्डंट को प्रधानमंत्री बनाना चाहते थे।
डेली टेलीग्राफ ने मार्च में बताया था, कि टोरी पार्टी के दक्षिणपंथी प्रमुख लोगों और मॉर्डॉन्ट के प्रमुख समर्थकों के बीच एक बैठक हुई थी, जब वह 2022 में बोरिस जॉनसन के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री पद की रेस में शामिल हुई थीं। बैठक में इन सांसदों ने कहा, कि वे उनका समर्थन करने के लिए तैयार थे।
हालांकि, सुनक अपने पद पर बने रहे, क्योंकि पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने चुनावी साल के इस मोड़ पर भारतीय मूल के ब्रिटिश नेता को बदलने के विचार को "पागलपन" करार दिया।
उस समय, ऋषि सुनक अपनी पार्टी से दलबदलुओं से भी निपट रहे थे। वरिष्ठ नेता और डोवर सांसद नताली ने ऋषि सुनक की आलोचना करते हुए कंजर्वेटिव पार्टी को छोड़ते हुए लेबर पार्टी का दामन थाम लिया।
जब ब्रिटेन में संसदीय चुनाव के लिए मतदान हुआ, तो पोलिटिको ने टिप्पणी की, कि ऋषि सुनक "चुनावी गुमनामी के लिए अभिशप्त" लग रहे थे, और कहा, कि आठ वर्षों में कंजर्वेटिव पार्टी के पांचवें प्रधानमंत्री के रूप में, सुनक को उनकी योग्यता के आधार पर नहीं आंका जाएगा, और यह एक ऐसी स्थिति है, जो उनके लिए एक "अभिशाप" है।

आर्थिक संकटों का समाधान करने में रहे नाकाम
ऋषि सुनक को महामारी से होने वाले आर्थिक नुकसान और यूक्रेन में युद्ध के कारण ऊर्जा बाजार में आई रुकावटों से निपटने में संघर्ष करना पड़ा है, जिसके कारण जीवन-यापन की लागत में संकट पैदा हो गया, जिससे सबसे गरीब ब्रिटेनवासी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
हालांकि उन्होंने तर्क दिया था, कि ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में सुधार हो रहा है, मुद्रास्फीति में कमी आने लगी है, लेकिन ये सुधार कई लोगों के लिए बहुत देर से आए हैं।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक एंड सोशल रिसर्च के एक स्टडी में अनुमान लगाया गया है, कि ब्रिटेन की वास्तविक जीडीपी यूरोपीय संघ में बने रहने की तुलना में दो से तीन प्रतिशत कम है, और वास्तविक आय महामारी-पूर्व स्तर की तुलना में लगभग आठ से नौ प्रतिशत कम है।
ऋषि सुनक की माइग्रेशन पॉलिसी रही नाकाम
ऋषि सुनक का इमिग्रेशन पॉलिसी, विवाद का एक महत्वपूर्ण बिंदु रहा है। इंग्लिश चैनल पार करने वाले अप्रवासियों और शरण चाहने वालों की संख्या में दिनों दिन हो रहे इजाफे की वजह से सरकार के सीमा नियंत्रण उपायों की आलोचना होती रही।
जिसके बाद प्रवासियों को निर्वासित करने की ऋषि सुनक की योजना, जिनमें से कई प्रवासियों को रवांडा भेज दिया गया, उसको लेकर यूके सरकार पर अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने और अमानवीय होने के आरोप लगे हैं। आलोचकों का तर्क है, कि यह रणनीति लोगों को अपने देश से भागने के लिए प्रेरित करने वाले कारणों को संबोधित करने में विफल रही है।
कंजर्वेटिव पार्टी ने ब्रेक्सिट अभियान अवैध प्रवासियों को आधार बनाकर ही चलाया था, ताकि देश में अवैध घुसपैठ को रोका जाए, लेकिन पार्टी ऐसा करने में बुरी तरह से नाकाम रही।
हेल्थकेयर संकट का समधान करने में नाकाम
ब्रिटिश समाज की आधारशिला NHS (नेशनल हेल्थ स्कीम) गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है और इसमें कर्मचारियों की कमी की वजह से मरीजों को लंबे समय तक मेडिकल मदद नहीं मिल पा रहा है, जिसकी वजह से ऋषि सुनक की सरकार के खिलाफ लोगों में भारी गुस्सा था। एम्बुलेंस और अस्पताल के बिस्तरों के लिए लंबे समय तक प्रतीक्षा करने वाले रोगियों की रिपोर्ट ने स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर दबाव को सार्वजनिक कर दिया है।
लेकिन, ऋषि सुनक एक साल से ज्यादा वक्त तक सत्ता में रहने के बाद भी स्वास्थ्य संबंधी इस समस्या का समाधान नहीं कर पाए। NHS में कर्मचारियों और डॉक्टरों की भर्ती नहीं की गई। NHS के साथ एक और बड़ी बात ये है, कि इसमें भारी संख्या में भारतीय समुदाय के लोग काम करते हैं, लिहाजा उनकी नाराजगी भी ऋषि सुनक को झेलनी पड़ी है। जिससे उनके नेतृत्व में जनता का भरोसा और कम होता गया।
जॉनसन-स्ट्रस की नाकामी से नहीं उबर पाए सुनक
ऋषि सुनक पर अपनी पार्टी के पूर्व प्रधानमंत्रियों बोरिस जॉनसन और लिज ट्रस की विरासत का भी बोझ पड़ा है। कंजर्वेटिव पार्टी पिछले 14 सालों से ब्रिटेन की सत्ता पर काबिज थी और पिछले पांच सालों में कोविड संकट के साथ साथ ब्रेक्सिट, यूक्रेन युद्ध जैसी गंभीर समस्याएं यूके के सामने आईं। जिससे उबरने में बोरिस जॉनसन और लिज ट्रस बुरी तरह से नाकाम रहे, जिसकी जिम्मेदारी भी ऋषि सुनक को लेनी पड़ी।
लिज ट्रस के विनाशक आर्थिक फैसले ने पूरे ब्रिटेन को हिलाकर रख दिया और सिर्फ 49 दिनों के बाद ही उन्हें इस्तीफा देना पड़ा, और इसने कंजर्वेटिव पार्टी से जनता के विश्वास को हिला कर रख दिया।
सीवेज रिसाव, अविश्वसनीय ट्रेन सेवाएं, जीवन-यापन की लागत का संकट, बढ़ती अपराध दर और इंग्लिश चैनल पार करने वाले प्रवासियों की संख्या में वृद्धि जैसे मुद्दों को संबोधित करने में बोरिस जॉनसन बुरी तरीके से नाकाम रहे और ऋषि सुनक, जिनके पास करीब डेढ़ साल सत्ता रही, इतने कम समय में उनके लिए इन चुनौतियों को संबोधित करना संभव नहीं था।
इसके अलावा, बोरिस जॉनसन की पार्टी गेट ने भी कंजर्वेटिव पार्टी की प्रतिष्ठा को धूल में मिलाकर रख दिया था। बोरिस जॉनसन ने उस वक्त अपने दोस्तों के साथ शराब पार्टी की थी, जब वो खुद प्रधानमंत्री थे और उन्होंने देश में सख्त कोविड लॉकडाउन लगा रखा। इस घटना ने लोगों को गुस्से में भर दिया।
इसके अलावा, ऋषि सुनक को अपने आलीशान जीवनशैली के लिए भी कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा। वैसे भी वह हाउस ऑफ कॉमन्स में सबसे अमीर सांसद हैं और किंग चार्ल्स III से भी अमीर हैं।
इसके अलावा, इस वक्त पूरे यूरोप में सत्ता विरोधी लहर चल रही है और इटली, नीदरलैंड के बाद फ्रांस में भी मौजूदा सरकार के खिलाफ वोट डाले गये हैं। और काफी हद तक ऋषि सुनक भी सत्ता विरोधी लहर के शिकार बने हैं।












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