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भारत की नाक के नीचे चीन ने बनाया नौसैनिक अड्डा! ये दो बंदरगाह बन जाएंगे इंडिया-अमेरिका के सिरदर्द

Chinese Construction Of Naval Bases In Bangladesh & Cambodia: हालांकि, चीन का कहना है, कि बांग्लादेश और कंबोडिया में नौसैनिक अड्डे बनाने के पीछे उसका प्रभाव क्षेत्र विकसित करना मकसद नहीं है, लेकिन बीजिंग की इन कोशिशों को नई दिल्ली और वॉशिंगटन में काफी सावधानी से देखा जा रहा है।

कंबोडिया (दक्षिण पूर्व एशिया) और बांग्लादेश (दक्षिण एशिया) में नौसैनिक अड्डों के निर्माण को लेकर भले ही चीन कितनी की सफाई क्यों ना दे दे, लेकिन दुनिया जानता है, कि इन नौसैनिक अड्डों के निर्माण को लेकर चीन की मंशा क्या है। बांग्लादेश और कंबोडिया में बने चीनी नौसैनिक अड्डों ने भारत के लिए गंभीर सुरक्षा चिंताएं पैदा कर दी हैं।

Chinese Construction Of Naval Bases

डिफेंस एक्सपर्ट्स का दावा है, कि बीजिंग अपने प्रभाव क्षेत्र का विस्तार करने के लिए और क्षेत्रीय ताकतों के साथ वैश्विक ताकतों को चुनौती देने के लिए दुनिया भर में सैन्य चौकियों का एक नेटवर्क तैयार करने की योजना बना रहा है।

कंबोडिया में चीन का रीम नेवल बेस

कंबोडिया में रीम नेवल बेस पिछले कुछ समय से सवालों के घेरे में है। हालांकि संयुक्त राज्य अमेरिका ने रीम को भारत-प्रशांत क्षेत्र में चीन की पहली सैन्य सुविधा के रूप में विकास के संबंध में चिंता जताई है और चेतावनी जारी की है, लेकिन कंबोडिया ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी तक पहुंच प्रदान करने की किसी भी योजना से इनकार किया है।

लेकिन, साफ तौर पर पता चलता है, कि चीन और कंबोडिया के बीच काफी सीक्रेट तरीके से समझौते हुए हैं और निक्केई एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में नौसैनिक अड्डे पर कम से कम दो चीनी युद्धपोतों की मौजूदगी की पुष्टि होने के साथ, अब यह व्यापक रूप से स्वीकार कर लिया गया है, कि चीनी सेना अब कंबोडिया के रीम नेवल बेस का इस्तेमाल कर रही है।

चीनी जहाजों ने पिछले साल दिसंबर की शुरुआत में पहली बार इस सुविधा पर लंगर डाला था। रिपोर्ट में पाया गया है, कि 20 मार्च को देखा गया चीनी युद्धपोत, अमेरिकी चिंताओं के साथ मेल खाता है, कि चीन अपने विशेष उपयोग के लिए साइट पर एक सुविधा का निर्माण कर रहा है।

निक्केई एशिया की तरफ से जारी तस्वीरों में चीनी नौसेना के कार्वेट वेनशान के रूप में पहचाने जाने वाले दो जहाजों में से एक पर चीन के साथ-साथ चीनी पीएलए नौसेना के झंडे लगे हुए दिखाई दे रहे हैं। जब चीनी जहाजों ने पहली बार दिसंबर में बेस का दौरा किया, तो कंबोडियाई रक्षा मंत्री टी सेहा ने स्पष्ट किया था, कि यह एक नियमित यात्रा थी। चीनी युद्धपोत जनवरी के मध्य तक बेस पर मौजूद थे।

बांग्लादेश में भी चीन का नौसैनिक अड्डा!

एक प्रसिद्ध डिफेंस ओसियन इंटरनेशनल एक्सपर्ट डेमियन साइमन, जो प्लेटफ़ॉर्म X पर @detresfa_ नाम से जाने जाते हैं, उन्होंने 1 अप्रैल को चीनी मदद से बने बांग्लादेश के पनडुब्बी बेस की सैटेलाइट तस्वीर प्रकाशित की थी।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दावा किया, कि "बांग्लादेश में चीनी मदद से जो पनडुब्बी बेस बनाया गया है, उसकी सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है, की चीन इस जगह पर एक जहाजों को रखने के लिए एक dry dock का निर्माण कर रहा है, जहां पनडुब्बियों रखरखाव का समर्थन करने की संभावना है। चीन के इस एडवांस रक्षा सहयोग प्रयास से बीजिंग को क्षेत्र में अपनी उपस्थिति और प्रभाव को मजबूत करने में मदद मिलती है।"

हालिया तस्वीरों में एक dry dock दिखाई दे रही है, जहां पनडुब्बी की मरम्मत की जाती है। dry dock की लंबाई लगभग 135 मीटर और चौड़ाई लगभग 30 मीटर आंकी गई है।

जैसे ही ये तस्वीर सोशल मीडियो पर पोस्ट की गई, भारत में काफी तेजी से इस बात पर चर्चा होने लगी, कि क्या चीन अपनी पनडुब्बियों को रखने के लिए बांग्लादेश के नौसैनिक अड्डे का इस्तेमाल करेगा?

भारत की चिंताओं की वजह समझिए

भारत की ये चिताएं काफी लंबे समय से बनी हुई हैं। पिछले साल दिसंबर में प्रकाशित इस बेस की सैटेलाइट तस्वीरों से पता चल रहा था, कि चीन ने नौसैनिक अड्डे पर महत्वपूर्ण प्रगति की है, और नेवल बेस के आकार से संकेत मिलता है, कि पीएलए-नौसेना जल्द ही बेस तक "लॉजिस्टिक पहुंच" हासिल कर लेगी।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है, कि चीनी पनडुब्बियां मेंटिनेंस और सर्विसिंग के लिए बांग्लादेश बंदरगाह पर कॉल और डॉक कर सकती हैं। विशेषज्ञों ने इसे चीन की "पनडुब्बी कूटनीति" करार दिया है।

बांग्लादेश में निर्माणाधीन नौसैनिक अड्डे की सैटेलाइट तस्वीरों के पिछले विश्लेषण से पता चला है, कि "बंगाल की खाड़ी में पैर जमाने से पीएलए की चीन के तटों से दूर तक काम करने की क्षमता काफी बढ़ जाएगी और भारत के लिए नई चुनौतियां पैदा होंगी।"

दूसरी तरफ, चीन ने अपनी दो पनडुब्बियां बांग्लादेश को औने-पौने दाम में (सिर्फ 203 मिलियन डॉलर) में बेच दी है और ये पनडुब्बियां हमलावर मिंग-क्लास टाइप 035जी डीजल-इलेक्ट्रिक जहाज हैं, जिन्हें शुरुआत में 1990 में पीएलए नेवी (पीएलएएन) द्वारा सेवा में रखा गया था। लेकिन, सवाल ये है, कि कौड़ियों के दाम पनडुब्बी बेचने के पीछे चीन का मकसद क्या है?

बांग्लादेश को पनडुब्बियों की डिलीवरी करने के ठीक एक साल बाद, चीन स्थित राज्य के स्वामित्व वाले रक्षा ठेकेदार पॉली टेक्नोलॉजीज ने, बांग्लादेश के दक्षिण-पूर्वी तट पर 1.2 अरब अमेरिकी डॉलर में एक नया पनडुब्बी सहायता स्टेशन बनाने का समझौता हासिल कर लिया।

1.75 वर्ग किलोमीटर में बने इस बेस का नाम बांग्लादेश की वर्तमान प्रधान मंत्री शेख हसीना के नाम पर रखा गया है, और इसे बीएनएस शेख हसीना नेवल बेस के रूप में जाना जाता है। मार्च 2023 में उद्घाटन के दौरान पीएम हसीना ने बेस को "अति-आधुनिक" घोषित किया था। उस समारोह में कम से कम दो वरिष्ठ पीएलए-एन अधिकारियों सहित कई चीनी अधिकारियों ने भाग लिया था।

इसके अलावा, इस बात के भी सबूत हैं, कि बांग्लादेश ने पहले से ही अपनी चीनी मूल की पनडुब्बियों को वहां तैनात कर दिया है। एक बार काम पूरा होने पर, ये नेवल बेस, एक साथ छह पनडुब्बियों और आठ युद्धपोतों को डॉक करने में सक्षम होगा। हालांकि, चिंताएं बनी हुई हैं, कि इनमें से कुछ चीनी पनडुब्बियां हो सकती हैं, जो निश्चित तौर पर भारत के लिए खतरनाक होगा।

अमेरिकी रक्षा विभाग ने भी पहले चेतावनी दी थी, कि बांग्लादेश और म्यांमार दोनों उसकी उन स्थानों की सूची में हैं, जहां चीन विदेशी सैन्य सुविधाएं स्थापित करने का प्रयास कर रहा है।

प्रधान मंत्री हसीना ने यह भी कहा था, कि इस सुविधा का उपयोग "बंगाल की खाड़ी में नौकायन करने वाले जहाजों के लिए एक सर्विस प्वाइंट" के रूप में किया जा सकता है और यह एक संकेत है, कि पीएलए-एन एक ना एक दिन वहां बंदरगाह पर जरूर कॉल करेगा। लिहाजा, भारत को इसे काउंटर करने के लिए भी सोचना होगा, ताकि चीनी वर्चस्व को खत्म किया जा सके।

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