भारत अगर NATO प्लस में शामिल हुआ तो... चीन ने अमेरिका के ऑफर पर दी दिल्ली को चेतावनी, जानें क्या कहा?

नाटो प्लस में अभी ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जापान, इजरायल और दक्षिण कोरिया हैं, जिसे अमेरिका ने बनाया है। अमेरिका बहुत जल्द नाटो का एक ऑफिस जापान में खोलने जा रहा है, जिसका मकसद चीन की आक्रामकता को काउंटर करना है।

NATO Plus India

NATO Plus India: अमेरिकी संसद की चीन संबंधित कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि इंडो-पैसिफिक में चीन की आक्रामकता को काउंटर करने के लिए भारत को नाटो प्लस का हिस्सा बनाना चाहिए।

हालांकि, भारत की तरफ से अभी तक कोई संकेत नहीं दिए गये हैं, कि भारत नाटो प्लस का हिस्सा बनना चाहता या नहीं, लेकिन चीन की तरफ से भारत के लिए चेतावनियां जारी की जाने लगी है।

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी को भोंपू ग्लोबल टाइम्स ने एक लंबा लेख लिखकर नाटो प्लस में शामिल होने पर भारत को होने वाले नुकसानों का गिनाया है। जाहिर है, चीन भारत के नाटो प्लस में शामिल होने की संभावना से डरा हुआ है, क्योंकि चीन जानता है, कि अगर भारत नाटो प्लस का सदस्य बनता है, तो फिर उसके लिए भारतीय सीमा पर घुसपैठ करना मुश्किल हो जाएगा।

ग्लोबल टाइम्स ने क्या कहा?

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, कि 'अमेरिका ने भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की वाशिंगटन यात्रा से पहले भारत को लुभाने के प्रयास तेज कर दिए हैं, भारत में अमेरिका के दूत ने हाल ही में नई दिल्ली को "वाशिंगटन के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक" बताया है और कहा है, कि भारत को यह तय करना चाहिए, कि अमेरिका के नेतृत्व वाले नाटो में शामिल होना है या नहीं।'

इसके बीच चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ने लिखा है, कि 'विशेषज्ञों ने कहा, कि अमेरिका इंडो-पैसिफिक के मुद्दे को अपने फायदे के लिए अनुकूल वातावरण बनाने के लिए उसकी सुरक्षा ढांचा को लेकर बढ़ा-चढ़ाकर मुद्दे को पेश कर रहा है।'

इसके बाद चीनी मीडिया ने लिखा है, कि 'अगर भारत नाटो प्लस की सदस्यता स्वीकार करता है, तो ये मूर्खतापूर्ण फैसला होगा।'

ग्लोबल टाइम्स ने विशेषज्ञ का हवाला देते हुए लिखा है, कि 'हालांकि, नाटो प्लस सदस्यता के प्रति भारत का आधिकारिक रवैया अज्ञात है, लेकिन, अगर भारत नाटो की ओर झुकाव का मूर्खतापूर्ण विकल्प बनाता है, तो यह नई दिल्ली की रणनीतिक स्वायत्तता, अंतर्राष्ट्रीय स्थिति और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को बहुत नुकसान पहुंचाएगा।'

ग्लोबल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में भारतीय न्यूज चैनल WION और भारत में अमेरिका के राजदूत एरिक गार्सेटी के इंटरव्यू का हवाला दिया है, जिसमें भारत के नाटो प्लस में शामिल होने के सवाल पर वो कहते हैं, कि 'फिलहाल सबकुछ टेबल पर है।'

अमेरिकी राजदूत गार्सेटी ने कहा, कि यह नई दिल्ली को तय करना है कि क्या वह नाटो प्लस में शामिल होना चाहता है? इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया, कि भारत वाशिंगटन के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक है।

आपको बता दें, कि नाटो प्लस, पांच देशों के बीच बना एक सुरक्षा व्यवस्था है, जो रक्षा और खुफिया संबंधों को बढ़ावा देने के लिए नाटो और पांच गठबंधन देशों, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जापान, इज़राइल और दक्षिण कोरिया को एक साथ लाती है। नाटो प्लस को नाटो का ही एक्सटेंशन कहा जाता है, जिसे नाटो से खुफिया, टेक्नोलॉजिकर, सामरिक मदद मिलती है।

27 मई को यूएस हाउस कमेटी ने नाटो प्लस में भारत को शामिल करने के लिए एक नीतिगत प्रस्ताव को अपनाया है, ताकि ताइवान के सवाल पर "चीन की आक्रामकता को रोका जा सके"।

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नाटो और भारत को लेकर क्या सोचता है चीन?

सिंघुआ विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय रणनीति संस्थान में अनुसंधान विभाग के निदेशक कियान फेंग के हवाले से ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, कि 'चीन का मुकाबला करने के लिए अमेरिका, नाटो ढांचे के माध्यम से रूस का सामना करने के मॉडल को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भी दोहराना चाहता है, जिसमें अमेरिका, भारत को एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में मानता है, जो यह निर्धारित करेगा, कि उसकी "हिंद-प्रशांत रणनीति" सफल होगी या नहीं?।

यानि, चीन ये मानता है, कि अमेरिका की "हिंद-प्रशांत रणनीति" कामयाब हो पाएगी या नहीं, ये भारत पर निर्भर करता है, कि भारत अमेरिका के साथ अपने संबंधों को लेकर किस तरह से आगे बढ़ता है।

वहीं, ग्लोबल टाइम्स ने आगे लिखा है, कि 'भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 22 जून को अमेरिका की यात्रा पर होंगे और अमेरिका इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी को नाटो प्लस में शामिल होने के लिए लुभाने की कोशिश करेगा।'

वहीं, अखबार ने आगे लिखा है, कि '5 जून को अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन अपने सातवें "हिंद-प्रशांत" दौरे के दौरान नई दिल्ली में अपने भारतीय समकक्ष राजनाथ सिंह से मुलाकात करेंगे, जहां उनसे "अमेरिका-भारत प्रमुख रक्षा साझेदारी को और गहरा करने" की उम्मीद है।

ग्लोबल टाइम्स लिखता है, कि 'भविष्य में नाटो के साथ भारत के घनिष्ठ सहयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है, लेकिन फिलहाल भारत चीन के साथ सीधे टकराव में धकेले जाने को लेकर सावधान है, भले ही भारत और चीन के रिश्ते न्यूनतम स्तर पर हों।'

चाइना फॉरेन अफेयर्स यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर ली हैदोंग के हवाले से ग्लोबल टाइम्स लिखता है, कि 'अमेरिका नाटो प्लस में भारत के शामिल होने को लेकर बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं, लेकिन निकट भविष्य में भारत नाटो प्लस में शामिल होगा, इसकी उम्मीद नहीं है, लेकिन अमेरिका, भविष्य में भारत और नाटो तंत्र के बीच घनिष्ठ संबंध की संभावित स्थापना के लिए आधार तैयार कर रहा है, ताकि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी प्रभाव को और बढ़ाया जा सके'।

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    इसके अलावा चीनी अखबार ने कहा है, कि "भारत तेजी से वैश्विक शक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, लेकिन अगर वो अमेरिका के गुट में शामिल होता है, तो फिर भारत के वैश्विक संबंध खराब होंगे, वहीं क्षेत्रीय संगठन, जैसे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) में भारत की स्थिति प्रभावित होने के साथ साथ चीन और रूस के साथ भी भारत के संबंध खराब हो जाएंगे।'

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