G20 Kashmir: चीन के अलावा 4 मुस्लिम देशों ने भी जी-20 से बनाई दूरी, क्या रही वजह?
श्रीनगर में G20 की अहम बैठक से तीन देशों ने दूरी बना ली। चीन, तुर्की और सऊदी अरब ने इस बैठक में शामिल न होना ही ठीक समझा। इससे पहले चीन ने इसे लेकर बयान दिया था मगर तुर्की और सऊदी ने अब तक अपनी प्रतिक्रिया नहीं दी है।

श्रीनगर में 22 से 24 मई तक G20 पर्यटन समूह की बैठक हो रही है। डल झील के तट पर हो रही इस बैठक में कला और विरासत की समृद्धि को दुनिया के समक्ष उजागर किया जाएगा। लेकिन इस बैठक में G20 के तीन अहम सदस्य देश शामिल नहीं हो रहे हैं।
चीन, तुर्की और सऊदी अरब G20 के सदस्य देश हैं जिन्होंने श्रीनगर में चल रही बैठक में हिस्सा नहीं लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक 17 देशों के 120 विदेशी प्रतिनिधि सोमवार को श्रीनगर पहुंचे लेकिन चीन से कोई प्रतिनिधि नहीं आया।
हालांकि तुर्की और सऊदी के कुछ निजी पर्यटन प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। भारत के अलावा अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, जर्मनी, फ्रांस, इंडोनेशिया, इटली, जापान, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको, रूस, दक्षिण अफ्रीका, ब्रिटेन, अमेरिका और यूरोपीय संघ कश्मीर में तीन दिवसीय कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं।
इससे पहले चीन ने शनिवार को आधिकारिक रूप से इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया था। वहीं तुर्की और सऊदी अरब ने इसे लेकर कोई टिप्पणी नहीं की है। जानकारी के मुताबिक बैठक में भाग लेने को लेकर इनमें से किसी भी देश के दिल्ली स्थित दूतावास ने कोई जवाब नहीं दिया है।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वैनबिन ने कहा, चीन विवादित क्षेत्र पर किसी भी प्रकार की जी-20 बैठक का पूरी तरह से विरोध करता है। चीन के इस बयान पर भारत ने आपत्ति जताई।
भारत ने चीन को जवाब देते हुए कहा, वह अपने क्षेत्र में बैठकें आयोजित करने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र है। चीन इससे पहले अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख में G-20 की बैठकों में शामिल नहीं हुआ था। वह इसे विवादित इलाका मानता है।
जी20 सदस्यों के अलावा भारत ने कई अतिथि देशों और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया था। इनमें बांग्लादेश, मिस्र, मॉरीशस, नीदरलैंड, नाइजीरिया, ओमान, सिंगापुर, स्पेन और यूएई शामिल हैं। इसमें मिस्र और इंडोनेशिया के अलावा बाकी सभी देश शामिल हुए।
चीन, तुर्की और सऊदी अरब के साथ आमंत्रित देश मिस्र और इंडोनेशिया की अनुपस्थिति को G20 बैठक की मेजबानी करने के भारत के निर्णय के संदर्भ में एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि अगस्त 2019 में धारा 370 हटाने के बाद से जम्मू और कश्मीर में पहला बड़ा इंटरनेशनल प्रोग्राम है।
मई की शुरुआत में चीन और पाकिस्तान दोनों ने एक संयुक्त बयान जारी करते हुए लंबे समय से चल रहे कश्मीर विवाद मुद्दे को उठाया था। तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन भी कश्मीर मसले पर खुलकर पहले ही पाकिस्तान का पक्ष लेते रहे हैं। वहीं सऊदी अरब भी लंबे वक्त तक पाकिस्तान का करीबी देश रहा है।












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