श्रीलंका के पत्रकारों-कलाकारों को खरीदने की तैयारी, फ्री में चीन बनाकर देगा मकान, समझिए पूरा प्लान
चीन श्रीलंका में कम आय वाले लोगों, कलाकारों और पत्रकारों के लिए लगभग 2,000 घर बनाने जा रहा है। इसके लिए अगले महीने बीजिंग में दोनों देशों के बीच समझौता होगा। ये जानकारी श्रीलंका के शहरी विकास और आवास मंत्री प्रसन्ना रणतुंगा ने दी।
शहरी विकास और आवास मंत्रालय ने कहा कि कम आय वाले लोगों और कलाकारों और पत्रकारों के लिए चीनी सरकार की मदद से निर्मित 1,996 आवास इकाइयों के संबंध में समझौते पर अगले महीने हस्ताक्षर किए जाएंगे। समझौतों पर हस्ताक्षर अक्टूबर में बीजिंग, चीन में "बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव" (बीआरआई) शिखर सम्मेलन के दौरान होंगे।

शहरी विकास और आवास मंत्री प्रसन्ना रणतुंगा ने कहा कि कोट्टावा पलाथुरू वट्टे क्षेत्र में बने 108 घर कलाकारों और पत्रकारों को दिए जाएंगे। वहीं, कम आय वालों के लिए 1,888 घर आवंटित किए जाएंगे।
चीनी सरकार इस हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए श्रीलंका को 552 मिलियन युआन (76 मिलियन अमेरिकी डॉलर) की वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। नगर विकास एवं आवास मंत्री प्रसन्ना रणतुंगा ने कहा कि इस परियोजना के माध्यम से कम सुविधाओं वाली बस्तियों के निवासियों की बसावट की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सकेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि ये भारत के लिए एक संकेत है। इससे पहले भारत ने भी श्रीलंका में निम्न आय वर्ग के लिए आवास बनाने का वादा किया है, लेकिन ये परियोजनाएं अटकी हुई हैं।
श्रीलंका और भारत ने दिसंबर 2020 में बेघर और कम आय वाले परिवारों के आवास कार्यक्रमों के तहत 1.2 अरब रुपये लागत के कुल 2,400 घर बनाने के लिए चार समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किया था।
आपको बता दें कि साल 2010 में भारत सरकार ने भारतीय आवास कार्यक्रम के तहत श्रीलंका में करीब 50,000 घरों का निर्माण करने का वायदा किया था। इसके लिए भारत ने श्रीलंका में लगभग 3.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च किए जाने थे। लेकिन अब तक महज 1,000 घरों का ही निर्माण किया जा चुका है।
विशेषज्ञों का कहना है कि चीन की मदद का उद्देश्य श्रीलंका में पैठ बढ़ाना है। इसके साथ ही अगर भारतीय परियोजनाएं अटकी रहीं और चीन की परियोजना सफल हो गई तो उसके प्रति सोच बदल जाएगी।
आपको बता दें कि हाल में ही चीन अपने मंहगे लोन की नीति के चलते भारी अलोकप्रियता का सामना कर रहा है। ऐसे में वह कलाकारों और पत्रकारों को फ्री के घर देकर अपने पाले में करना चाहता है। चीन के ऊपर दुनिया भर में पत्रकारों को पैसे देकर अपने पक्ष में प्रोपेगेंडा फैलाने का आरोप लगता रहा है।












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