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Zebrafish: इस छोटी सी मछली को अंतरिक्ष में क्यों भेज रहा है चीन ?

चीन छोटी मछली की प्रजाति जेब्राफिश को रिसर्च के इरादे से अपने तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन भेजने की योजना पर काम कर रहा है। यह सूचना भी चीन की सरकारी मीडिया के हवाले से ही सामने आई है।

शंघाई स्थित Guancha.cn की रिपोर्ट के अनुसार चीन के वैज्ञानिक यह प्रयोग छोटे से बंद इकोसिस्टम में मछली और सूक्ष्मजीवों के बीच पारस्परिक प्रभावों के आकलन के लिए कर रहे हैं।

china to send zebrafish in space

अंतरिक्ष यात्रियों के हड्डियों के नुकसान पर भी होगी रिसर्च
चीन के वैज्ञानिकों ने इस रिसर्च कार्यक्रम में माइक्रोग्रैविटी में अंतरिक्ष यात्रियों को होने वाली हड्डियों के नुकसान को भी शामिल किया गया है। पिछले 10 जुलाई को बीजिंग में इस योजना के बारे में चीन के मैन्ड स्पेस इंजीनियरिंग स्पेस एप्लिकेशन सिस्टम के असिस्टेंट कमांडर इन चीफ जैंग वी ने अंतरिक्ष स्टेशन से जुड़े एक सेमिनार में मीडिया को इसके बारे में जानकारी दी है।

पहले भी अंतरिक्ष में भेजी जा चुकी हैं मछलियां
हालांकि, उस दौरान इस प्रयोग की टाइमलाइन से जुड़ी जानकारियों का खुलासा नहीं किया गया है। वैसे यह पहली बार नहीं हो रहा है कि मछली अंतरिक्ष में भेजी जा रही है। स्पेस डॉट कॉम के मुताबिक नासा के अक्वेटिक हैबिटेट या एक्यूएच को 2012 में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर भेजा गया था।

माइक्रोग्रैविटी से समुद्री जीवन पर प्रभाव जानने के लिए भेजी गई थी मछली
नासा की ओर से भेजे गए एक्यूएच के साथ मूल रूप से जापान में पायी जाने वाली ताजे पानी की मछली मेडका भेजी गई थी। एक्यूएच को यह पता लगाने के लिए डिजाइन किया गया था कि माइक्रोग्रैविटी समुद्री जीवन को किस तरह से प्रभावित करता है।

माइक्रोग्रैविटी में जेब्राफिश के बर्ताव में आया था बदलाव
इससे पहले 1976 में जेब्राफिश (डैनियो रेरियो) को ही सोयुज 21 मिशन पर सोवियत संघ के सैल्यूट 5 अंतरिक्ष स्टेशन पर भेजा गया था। सोवियत अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने पाया था कि माइक्रोग्रैविटी में रहने के लिए जेब्राफिश ने अपने बर्तावों में कुछ बदलाव कर लिया है।

तियांगोंग पर 'अक्वेरीअम' में रहेगी जेब्राफिश
जेब्राफिश को बार-बार अंतरिक्ष में भेजे जाने की मूल वजह ये है कि ये मछली इंसान की जीन के साथ 87% तक उच्च समरूपता दिखाती है। तियांगोंग पर इन मछलियों के लिए एक खास जगह तैयार की गई है। यह एक बंद अक्वेरीअम की तरह है, जिसमें करीब एक लीटर पानी में चार से पांच जेब्राफिश के अलावा कुछ शैवाल और सूक्ष्मजीव मौजूद होंगे।

रिपोर्ट के अनुसार मछलियों को खिलाने के लिए एक ऑटोमेटिक डिवाइस विकसित की गई है। इसमें एक इंटेलिजेंट सिस्टम लगा है, जो मछलियों का विकास मॉनिटर कर सकता है और उन्हें खाना दे सकता है। इसे 2022 में वेंटियन लैब मॉड्यूल के साथ अंतरिक्ष में भेजा जा चुका है।

लाइका के साथ क्या हुआ था?
वैसे अंतरिक्ष में जीवों को भेजने का काम 1947 में ही शुरू हो चुका था। लेकिन, यह तब ज्यादा चर्चा में आया जब सोवियत यूनियन ने स्पेस डॉग लाइका को अपने चर्चित फ्लाइट स्पुतनिक 2 से 1957 में अंतरिक्ष की ओर रवाना किया था। लेकिन, लाइका के लिए यह यात्रा त्रासदी में बदल गई। क्योंकि, बहुत ज्यादा गर्म हो जाने की वजह से वह उड़ान के कुछ ही घंटों बाद मौत की नींद सो गई थी।

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