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अंतरिक्ष में चीन ने किया महाविनाशक परमाणु मिसाइल का परीक्षण, डिफेंस सिस्टम होंगे बर्बाद, मचा कोहराम

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बीजिंग, अक्टूबर 17: दुनिया को काबू करने की तमन्ना में ड्रैगन अब दुनिया में बर्बादी फैलाने पर आमादा हो गया है और दुनिया में विध्वंस मटचाने की तैयारियों में जुट गया है। इस बार चीन ने अंतरिक्ष में परमाणु हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण किया है, जिसके बाद पूरी दुनिया में दहशत फैल गई है और कोहराम मच गया है। सबसे खतरनाक बात ये है कि, चीन ने सीक्रेट तरीके से न्यूक्लियर मिसाइल का परीक्षण किया है और उसकी जानकारी अब जाकर दुनिया को लगी है, जिसके बाद चीन की जिम्मेदारी तय करने की मांग की जा रही है। (सभी तस्वीर प्रतीकात्मक)

China ने उड़ा दी America की नींद, अंतरिक्ष से ही दागी परमाणु मिसाइल | वनइंडिया हिंदी
अंतरिक्ष में हाइपरसोनिक परीक्षण

अंतरिक्ष में हाइपरसोनिक परीक्षण

रिपोर्ट के मुताबिक, जिस वक्त पूरी दुनिया कोरोना महामारी से बचने का रास्ता खोज रही थी, उस वक्त चीन ने अंतरिक्ष में हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण किया है। खुलासा हुआ है कि, चीन ने अगस्त महीने में एक परमाणु हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण अंतरिक्ष में किया है, जिसने अपने लक्ष्य की ओर गति करने से पहले दुनिया का चक्कर लगाया और एक हाई टेक्नोलॉजी मिसाइल क्षमता का प्रदर्शन किया है, जिसका खुलासा होने के बाद अमेरिकी खुफिया एजेंसी पूरी तरह से सदमे में है। परीक्षण से परिचित पांच जानकारों ने बताया है कि, चीनी सेना ने एक रॉकेट लॉन्च किया था, जिसमें एक हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन था, जो अपने लक्ष्य की ओर जाने से पहले लोअर ऑर्बिट में उड़ान भरा था।

दुनिया में निकला सबसे आगे

दुनिया में निकला सबसे आगे

ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन अपनी पहली कोशिश में पूरी तरह से कामयाब नहीं हो पाया है और करीब 24 मील से अपने टार्गेट को भेदने में चूक गया है, लेकिन दो विशेषज्ञों ने कहा है कि, चीन ने अब इस तरह की टेक्नोलॉजी तैयार कर ली है और वो अब परीक्षण में कामयाब हो सकता है। दो खुफिया विशेषज्ञों ने कहा है कि, चीन ने हाइपरसोनिक हथियारों के क्षेत्र में आश्चर्यजनक प्रगति की है और अमेरिकी टेक्नोलॉजी की तुलना में चीन के पास अब कहीं ज्यादा उन्नत टेक्नोलॉजिकल क्षमता हासिल हो गई है और काफी ज्यादा खतरनाक है और चीन अब पूरी दुनिया का एकछत्र बादशाह बनना चाहता है।

अमेरिका में आश्चर्य

अमेरिका में आश्चर्य

फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक, एक विशेषज्ञ ने कहा है कि, अमेरिकी रक्षा से जुड़े लोगों ने हमेशा से चीन की क्षमताओं को कम करके आंका है, लेकिन अब इस बात से किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि, चीन टेक्नोलॉजी की दिशा में काफी ज्यादा आगे निकल चुका है। वहीं, चौथे विशेषज्ञ ने कहा कि, 'हमें अभी तक नहीं पता कि उन्होंने ये कैसे किया है'। अमेरिका, रूस और चीन सभी हाइपरसोनिक हथियार विकसित कर रहे हैं, जिसमें ग्लाइड वाहन भी शामिल हैं जो रॉकेट पर अंतरिक्ष में लॉन्च किए जाते हैं, लेकिन अपनी गति के तहत पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं। वे ध्वनि की गति से पांच गुना तेज गति से उड़ते हैं, बैलिस्टिक मिसाइल की तुलना में थोड़ी कम रफ्तार उनकी होती है। लेकिन वे बैलिस्टिक मिसाइल के रास्ते को फॉलो नहीं करती हैं, लिहाजा उन्हें ट्रैक करना काफी ज्यादा मुश्किल हो जाता है।

अमेरिका के पैरों तले खिसकी जमीन

अमेरिका के पैरों तले खिसकी जमीन

चीन के परमाणु कार्यक्रम पर नजर रखने वाले विशेषज्ञ टेलर फ्रैवेल को भी चीन के इस परीक्षण के बारे में पता नहीं चल पाई और वो अभी भी सदमे में हैं। उन्बोंने कहा कि, न्यूक्लियर हथियारों से लैस एक हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन की क्षमता हासिल करने के बाद ऐसा लगता है कि अंतरिक्ष टेक्नोलॉजी में चीन ने अमेरिका को तगड़ा झटका दिया है और मिसाइल रक्षा प्रणालियों की मदद से अब चीन अमेरिका को अंतरिक्ष में 'रोक' सकता है। इस बैलिस्टिक मिसाइलों को ध्वस्त करने के लिए ही डिजाइन किया गया है। कई विशेषज्ञ पिछले कुछ सालों से कहते आए हैं कि, अगली लड़ाई अब अंतरिक्ष में होने वाली है और चीन ऐसे हथियार बना रहा है, जिससे वो एक पल में सैटेलाइट को अंतरिक्ष में नष्ट करके किसी भी देश को घुटनों पर ला सकता है।

अभेद्य होता है हाइपरसोनिक मिसाइल

अभेद्य होता है हाइपरसोनिक मिसाइल

"हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन" को लेकर मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रोफेसर फ्रैवेल ने कहा कि, लोअर ट्रैजेक्टरी में उड़ान भरना और लगातार अपनी दिशा में परिवर्तन करना, इसकी सबसे बड़ी खासियत होती है, जिसकी वजह से हाइपसोनिक मिसाइल को ट्रैक करना काफी ज्यादा कठिन है और उन्हें ध्वस्त करना इस वक्त धरती पर मौजूद टेक्नोलॉजी के हिसाब से नामुमकिन। फ्रैवेल ने कहा कि, अगर चीन इस तरह के हथियार को पूरी तरह से विकसित और तैनात करता है तो यह दुनिया की शांति को "अस्थिर" करेगा। दरअसल, सबसे बड़ी चिंता इस बात की है कि, अगर चीन इस तरह के हथियारों का परीक्षण करता है, तो दुनिया के दूसरे शक्तिशाली देश भी अब निश्चित तौर पर अंतरिक्ष में परमाणु हथियारों का परीक्षण करेंगे, जो हमारी पृथ्वी के लिए ही विध्वंसकारी साबित हो सकता है।

अमेरिका से और बढ़ेगा तनाव

अमेरिका से और बढ़ेगा तनाव

अमेरिका और चीन के बीच का तनाव पहले से ही ज्यादा है, लेकिन अब यही माना जा रहा है कि, अमेरिका और चीन के बीच का दरार और ज्यादा बढ़ जाएगा और जो बाइडेन प्रशासन बीजिंग को लेकर काफी सख्त रूख अपनाएगा। चीन अकसर वॉशिंगटन पर शत्रुतापूर्ण व्यवहार करने का आरोप लगाता रहा है और अब चीन ने अमेरिका को उसी की भाषा में जवाब देना शुरू कर दिया है। हाल के महीनों में अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने चीन की बढ़ती परमाणु क्षमताओं के बारे में चेतावनी दी है, विशेष रूप से उपग्रह इमेजरी के जारी होने के बाद, जिसमें दिखाया गया है कि यह 200 से अधिक इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल साइलो का निर्माण कर रहा है। चीन किसी भी आर्म कंट्रोल डील्स का हिस्सा नहीं है और ना ही उसपर किसी भी तरह का अंकुश है और चीन किसी भी हालत में अपने परमाणु हथियारों पर होने वाली बातचीत में अमेरिका को शामिल करने के लिए तैयार नहीं है।

धरती के विनाश का खतरा

धरती के विनाश का खतरा

चीन के इस परीक्षण से परिचित लोगों में से दो विशेषत्रों ने कहा कि, चीन के ये विध्वंसक हथियार, सैद्धांतिक रूप से दक्षिणी ध्रुव के ऊपर से उड़ सकता है। यह अमेरिकी सेना के लिए एक बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि इसकी मिसाइल रक्षा प्रणाली उत्तरी ध्रुवीय मार्ग पर केंद्रित है। चीन के इस परीक्षण का खुलासा तब हुआ है, जब बाइडेन प्रशासन न्यूक्लियर पोस्चर रिव्यू, कांग्रेस द्वारा अनिवार्य नीति और क्षमताओं का विश्लेषण किया है। जिसने उन लोगों के खिलाफ हथियार-नियंत्रण अधिवक्ताओं को खड़ा किया है, जो मानते हैं कि चीन के कारण अमेरिका को अपने परमाणु शस्त्रागार के आधुनिकीकरण की तरफ आगे बढ़ना चाहिए। वहीं, कई विशेषज्ञों का मानना है कि, चीन के इस कदम के बाद दुनिया में एक अलग तरह की न्यूक्लियर रेस शुरू हो सकती है, जिससे दुनिया पर परमाणु युद्ध का खतरा मंडरा सकता है।

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English summary
China has tested a hypersonic missile in space, which has stunned America, while there has been a furore all over the world.
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