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Balochistan Attacks on Chinese: बलूचिस्तान में खूनी खेल से डरा ड्रैगन, पाकिस्तान छोड़ कर भाग रहे चीनी नागरिक

Balochistan Attacks on Chinese: बलूचिस्तान में बिगड़ते सुरक्षा हालातों और चीनी नागरिकों को निशाना बनाए जाने के बाद बीजिंग ने ग्वादर में अपने प्रोजेक्ट्स पर 'ब्रेक' लगा दिया है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) के केंद्र बिंदु ग्वादर से चीनी इंजीनियरों और तकनीकी स्टाफ की अस्थायी वापसी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल पैदा कर दी है।

हालांकि चीन इसे केवल एक सुरक्षात्मक कदम बता रहा है, लेकिन लगातार होते आत्मघाती हमलों ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था और CPEC के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Balochistan Attacks on Chinese
(AI Image)

China-Pakistan Economic Corridor: परियोजनाओं पर अस्थायी विराम

सुरक्षा कारणों से चीन ने ग्वादर में अपने सभी जमीनी प्रोजेक्ट्स को फिलहाल रोक दिया है। चीनी कर्मियों को विशेष उड़ानों के जरिए वापस बुलाया जा रहा है, जिससे करोड़ों डॉलर की विकास योजनाएं अधर में लटक गई हैं। बीजिंग का यह कड़ा फैसला स्पष्ट करता है कि उसके लिए अपने नागरिकों की जान प्रोजेक्ट की रफ्तार से अधिक कीमती है। फिलहाल, ग्वादर में कोई भी चीनी नागरिक मौजूद नहीं रहेगा और ऑन-ग्राउंड कार्यों की जिम्मेदारी स्थानीय पाकिस्तानी स्टाफ के कंधों पर छोड़ दी गई है।

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Chinese engineers security Pakistan: CPEC की सुरक्षा का संकट

CPEC चीन की 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है, लेकिन बलूचिस्तान में बढ़ती हिंसा इसके लिए सबसे बड़ा रोड़ा बन गई है। 2021 से अब तक 20 चीनी नागरिक अपनी जान गंवा चुके हैं। बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) द्वारा चीनी कैंपों और काफिलों पर किए जा रहे हमलों ने पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों की विफलता को उजागर किया है। चीन अब केवल वादों पर नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर अभेद्य सुरक्षा गारंटी चाहता है, जिसके बिना काम शुरू करना मुश्किल है।

Pakistan News Hindi: क्या चीन पीछे हट रहा है?

अटकलों के विपरीत, चीन ने स्पष्ट किया है कि यह वापसी स्थायी नहीं है। ग्वादर चीन की रणनीतिक और व्यापारिक योजनाओं के लिए अनिवार्य है, क्योंकि यह उसे हिंद महासागर तक सीधी पहुंच प्रदान करता है। चीन CPEC से पीछे हटने के बजाय "वेट एंड वॉच" की नीति अपना रहा है। चीनी टीमें अब दूर से (remotely) प्रोजेक्ट्स की निगरानी करेंगी और सुरक्षा हालातों की गहन समीक्षा के बाद ही उनकी वापसी संभव होगी। यह एक रणनीतिक ठहराव है, पूर्ण निकास नहीं।

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पाकिस्तान के लिए कूटनीतिक चुनौती

यह स्थिति इस्लामाबाद के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। पाकिस्तान की सरकार ने चीनी नागरिकों के लिए विशेष सुरक्षा बल बनाने की घोषणा तो की थी, लेकिन वह हमलों को रोकने में नाकाम रही। चीन का यह कदम पाकिस्तान पर दबाव बनाने का एक तरीका भी है ताकि वह आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे। यदि सुरक्षा बहाल नहीं हुई, तो विदेशी निवेश और CPEC का सपना दोनों ही खतरे में पड़ सकते हैं, जिससे पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति और बिगड़ सकती है।

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