चीन ने अमेरिका को दी धमकी, कहा- ताइवान से संबंध तोड़ो वर्ना, अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहो
चीन ने ताइवान और अमेरिका के बीच एक नए व्यापार पहल का कड़ा विरोध किया है।
बीजिंग, 02 जूनः ताइवान मुद्दे पर चीन और अमेरिका में एक बार फिर से ठन गयी है। चीन ने ताइवान और अमेरिका के बीच एक नए व्यापार पहल का कड़ा विरोध किया है। चीन ने कहा कि इससे अलगाववादियों में गलत संदेश जाएगा। इसके साथ ही चीनी वाणिज्य और विदेश मंत्रालय ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि यदि यह समझौता होता है उसके परिणाम भी भुगतने होंगे।

IPEF से बाहर है ताइवान
अमेरिका और ताइवान ने 1 जून को 21 वीं सदी के व्यापार पर अमेरिका-ताइवान पहल की घोषणा की है। हालांकि बाइडेन प्रशासन ने ताइपे को इंडो-पैसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क यानी कि IPEF से बाहर रखा है। भारत भी IPEF का हिस्सा है। इसे बीजिंग के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए डिजाइन किया गया है।

अमेरिका पर भड़के गाओ फेंग
चीनी वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता गाओ फेंग ने कहा है कि अमेरिका को ताइवान के अलगाववादियों को गलत संदेश भेजने से बचने के लिए ताइवान के साथ व्यापार और आर्थिक संबंधों को समझदारी से संभालना चाहिए। चीन हमेशा किसी देश और ताइवान क्षेत्र के बीच किसी भी प्रकार के व्यापारिक पहल का विरोध करता है।

एक साथ काम करने का दिया संदेश
इससे पहले एक बयान में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने कहा था कि दोनों पक्ष एक साथ तेज गति से काम करेंगे। दोनों देश उच्च-मानक प्रतिबद्धताओं और आर्थिक रूप से सार्थक परिणामों के साथ समझौतों तक पहुंचने के लिए वार्ता के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप विकसित करेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार इस समझौते से अमेरिका और ताइवान के बीच आर्थिक सहयोग के लिए और अधिक जगह खुलेगी।

बाइडन ने कहा ताइवान के साथ हैं
गौरतलब है कि साल 1949 में एक गृहयुद्ध के बाद ताइवान और चीन अलग-अलग हो गए थे। इस युद्ध में सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की जीत हुई थी। चीन का कहना है कि ताइवान को विदेशी संबंध स्थापित करने का कोई अधिकार नहीं है। इससे पहले जब बाइडन से पूछा गया था कि यदि ताइवान पर हमला होता है तो क्या अमेरिकी उसका साथ देगा, तो इसके जवाब में बाइडन ने हाँ कहा था। बाइडेन ने कहा था कि ताइवान को बलपूर्वक चीन में शामिल नहीं किया जा सकता।

ताइवान खुद को मानता है आजाद
अमेरिका के राष्ट्रपति के इस बयान पर चीन ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा था कि चीन अपने देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय एकता के मामले में कोई समझौता नहीं करेंगा। बतादें कि ताइवान दक्षिण पूर्वी चीन के तट से लगभग 100 मील दूर एक द्वीप है। चीन, ताइवान को अपना हिस्सा मानता है। लेकिन ताइवान खुद को एक आजाद देश मानता है। ताइवान का अपना संविधान है और वहां लोगों द्वारा चुनी हुई सरकार का शासन है।












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