अमेरिकी संचार और समाचार व्यवस्था में चीन की घुसपैठ, ड्रैगन ने उसके मीडिया इकोसिस्टम पर कब्जा किया
बीजिंग, 18 फरवरी: चीन अमेरिकी मीडिया को पैसे देकर उनका इस्तेमाल दुनियाभर में अपना प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए कर रहा है, यह रिपोर्ट पहले भी आ चुकी है। लेकिन, अब बात उससे आगे निकल चुकी है। पॉलिसी रिसर्च ग्रुप के अध्ययन से पता चला है कि चीन ने एक प्रभावी अमेरिकी मीडिया कंपनी के ज्यादातर शेयर अपने कब्जे में कर लिए हैं, जिसका प्रभाव अमेरिकी में संचार के सभी साधनों पर है; और अमेरिकी राजधानी वॉशिंगटन की सत्ता के अहम ठिकानों तक संचार माध्यम के जरिए पहुंचने वाले समाचारों को भी चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना प्रभावित कर रही है।

वॉशिंगटन सुन रहा है, चीनी प्रोपेगेंडा वाली खबर
चीन की कंपनियों ने अमिरेकी मीडिया इकोसिस्टम में कंट्रोल राइट्स हासिल कर लिया है। न्यूज एजेंसी एएनआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक अमेरिकी कंपनी जो लगभग सभी स्टेशन कार्यक्रम को पट्टे पर देती है, उसमें चीन का 60 फीसदी शेयर है। पॉलिसी रिसर्च ग्रुप के अनुसार कंपनी के रिकॉर्ड की छानबीन से पता चला है कि चीन की सरकारी के स्वामित्व वाले रेडियो स्टेशन की एक सहायक कंपनी के पास इस अमेरिकी कंपनी में 60 फीसदी हिस्सेदारी है। डब्ल्यूसीआरडब्ल्यू एक एम रेडियो स्टेशन है, जो अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण शहर, उसकी राजधानी वॉशिंगटन को सेवाएं दे रहा है।

कैपिटल हिल और व्हाइट हाउस तक चीन की पहुंच
बड़ी बात ये है कि चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीसीपी) यह तय करती है कि उस रेडियो स्टेशन से क्या कुछ चलाया जा रहा है। पॉलिसी रिसर्च ग्रुप का कहना है कि यह रेडियो स्टेशन अमेरिकी सत्ता के दोनों महत्वपूर्ण और प्रभावशाली ठिकानों कैपिटल हिल और व्हाइट हाउस में सुना जा सकता है। डब्ल्यूसीआरडब्ल्यू तो मीडिया चैनलों के जखीरों में सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा है, जिसका ड्रैगन चीन का हित साधने और उसका प्रोपेगेंडा फैलाने वाले प्रसारण के लिए इस्तेमाल करता है।

अमेरिकी संचार व्यवस्था में चीन की घुसपैठ
फेडरल कम्युनिकेशन कमीशन (एफसीसी) अमेरिका की एक स्वतंत्र एजेंसी है, जो रेडियो, वायर, सैटेलाइट, केबल और टेलीविजन से संचार को नियंत्रित करता है और विदेशी सरकारों और उनके प्रतिनिधियों को अमेरिकी रेडियो स्टेशनों में रेडियो लाइसेंस लेने से प्रतिबंधित करता है। चाइना रेडियो इंटरनेशनल (सीआरआई) का इसमें कोई प्रत्यक्ष स्वामित्व नहीं है, लेकिन डब्ल्यूसीआरडब्ल्यू के पट्टे पर काम कर रही एक सहायक कंपनी में उसकी अधिकतम हिस्सेदारी है।

पूरी दुनिया की मीडिया को प्रभावित करने की चाल
शिन्हुआ समेत चीन की अनेकों सरकारी स्वामित्व वाली न्यूज एजेंसिया हैं, जो पूरी दुनिया में कुख्यात हैं और लगभग सभी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीसीपी) की मुखपत्र की तरह काम करती हैं। चीन की रणनीति विदेशी मीडिया इकोसिस्टम का फायदा उठाकर अपने हित वाली खबरों का प्रसारण करवाना है। पॉलिसी रिसर्च ग्रुप की रिपोर्ट कहती है कि ऐसा नहीं है कि दूसरे देश अपनी राय और नीतियों को जाहिर करने के लिए मीडिया का इस्तेमाल नहीं करते हैं, लेकिन अंतर ये है कि ये देश मीडिया में सरकार की भागीदारी को खुलकर बढ़ावा देते हैं, लेकिन, चाइना रेडियो इंटरनेशनल अपनी उपस्थिति को छुपाता है।

अमेरिकी मीडिया को करोड़ों डॉलर देने की आ चुकी है रिपोर्ट
पिछले साल जुलाई में एक खबर भी आई थी कि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीसीपी) के विज्ञापन विभाग के एक अखबार अमेरिका के कुछ प्रभावी पब्लिकेशनों और अखबारों को करोड़ों डॉलर का भुगतान करते हैं, ताकि चीन के प्रोपेगेंडा वाली खबरों को फैलाकर उसका हित पूरा किया जाए। चीन अपना नरेटिव सेट करने के लिए मुख्यधारा की मीडिया पर आक्रामक रूप से पैसे खर्च करता है और उसके कंटेंट को प्रभावित करता है।

तत्काल पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर
चीन की सरकारी स्वामित्व वाली मीडिया का विदेशों में प्रभुत्व का विस्तार करने के लिए कम्युनिस्ट पार्टी की कोशिशें बहुत ही व्यवस्थित हैं। यह दिखाता है कि सीसीपी की घरेलू नीति के मुद्दे अक्सर विदेश नीति की प्राथमिकताओं को कैसे नियंत्रित करते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि मीडिया में विदेशी सरकारों के स्वामित्व और विदेशी सरकारों के पैसे देकर प्रायोजित कंटेंट को लेकर तत्काल पारदर्शिता बढ़ाने की आवश्यकता है। (सभी तस्वीरें- सांकेतिक)
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