G-7 शिखर सम्मेलन से बौखलाया चीन, धमकाते हुए कहा- अब छोटे ग्रुप नहीं करते दुनिया पर राज

लंदन में ग्रुप ऑफ सेवन यानि जी-7 देशों की मीटिंग चल रही है, जिसमें फैसला लिया गया है कि चीन जिस तरह से छोटे देशों को कर्ज के जाल में फंसा रहा है, उसे सख्ती से रोका जाए।

बीजिंग, जून 13: दुनिया के शक्तिशाली देशों ने जैसे ही चीन की आक्रामकता के खिलाफ चीन को रोकने की कोशिश करना शुरू किया है, ठीक वैसे ही बौखलाया हुए चीन ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। जी-7 देशों ने चीन की आक्रामकता और छोटे देशों पर बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए कई प्लान तैयार किया है, जिसके बाद चिढ़े हुए चीन ने कहा है कि 'अब छोटे देशों के समूह दुनिया पर राज नहीं करते हैं'। दरअसल, जी-7 की बैठक में दुनिया के सात बड़े अर्थव्यवस्था वाले देशों ने अब सीधे तौर पर चीन के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है, जिससे बौखलाए हुए चीन ने धमकियां देनी शुरू कर दी है।

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    चीन की जी-7 ग्रुप को धमकी

    चीन की जी-7 ग्रुप को धमकी

    लंदन में ग्रुप ऑफ सेवन यानि जी-7 देशों की मीटिंग चल रही है, जिसमें फैसला लिया गया है कि चीन जिस तरह से छोटे देशों को कर्ज के जाल में फंसा रहा है, उसे सख्ती से रोका जाए। इस शिखर सम्मेलन में चीन की आलोचना भी की गई है। जिसके बाद लंदन स्थित चीनी दूतावास के एक प्रवक्ता ने ट्वीट करते हुए कहा है कि 'वो दिन अब खत्म हो गये हैं जब कुछ छोटे देशों के समूह विश्व के फैसले लिया करते थे'। चीनी दूतावास ने कहा कि 'चीन मानता है कि चाहे वो कोई भी देश है, अमीर हो या फिर गरीब या फिर कमजोर...सभी देश एक समान हैं और वैश्विक मुद्दों पर सभी देशों की राय ली जानी चाहिए'। दरअसल, एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में चीन का फिर से उभरना हाल के समय की सबसे महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक घटनाओं में से एक माना जाता है, सोवियत संघ के 1991 के पतन के साथ-साथ शीत युद्ध समाप्त हो गया। लेकिन, चीन ने उसके बाद छोटे-छोटे देशों को जिस तरह से कर्ज के जाल में फंसाया है, वो दुनिया की स्थिति के लिए काफी खतरनाक बनता जा रहा है।

    जिनपिंग की महत्वाकांझा तोड़ने की तैयारी

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    दरअसल, जी7 की बैठक के दौरान सभी देशों ने माना है कि चीन कर्ज के जाल में छोटे देशों को फंसा रहा है और चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी का यह प्रमुख एजेंडा हो गया है। जी7 ने माना है कि अब अगर चीन और शी जिनपिंग के इरादों को नहीं रोका गया तो चीन पूरी दुनिया में उथल-पुथल मचा सकता है। लिहाजा चीन के तौर-तरीकों पर रोक लगाया जाना बेहद जरूरी है। वहीं, चीन का बौखलाना, उसकी डर को दर्शाता है। दरअसल, चीन ने काफी पैसा अलग अलग देशों को कर्ज के तौर पर दे रखा है और जी7 देशों ने सबसे पहले शी जिनपिंग की महत्वाकांझी परियोजना बीआरआई प्रोजेक्ट को ही धूल चटाने की बनाई है। साथ ही जी7 के साथ भारत, ऑस्ट्रेलिया और साउथ कोरिया जैसे देश भी जुड़े हुए हैं, लिहाजा चीन का टेंशन में आना स्वाभाविक ही है।

    जी-7 से क्यों घबराया चीन ?

    जी-7 से क्यों घबराया चीन ?

    जी7 में संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, फ्रांस और जापान शामिल हैं और जी7 को भारत, ऑस्ट्रेलिया और साउथ कोरिया का समर्थन भी हासिल है। लिहाजा जी-7 शिखर सम्मेलन से विश्व के बड़े और शक्तिशाली लोकतांत्रिक देश पूरी दुनिया को एक सदेश देना चाहते हैं कि उनके पास चीन के खिलाफ विकल्प मौजूद है और दुनिया के किसी भी देश को चीन के झांसे में फसने की जरूरत नहीं है। ग्रुप ऑफ सेवन यानि जी7 की बैठक के दौरान मुख्य तौर पर चीन पर आर्थिक प्रहार करने की रणनीति बनाई गई है। जिसके तहत अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि अमेरिका चाहता है कि 'बिल्ड बैक बेटर वर्ल्ड' प्लान पर तेजी से काम किया जाए, ताकि चीनी प्रोजेक्ट्स की तुलना में समानांतर एक हाई क्वालिटी प्रोजेक्ट खड़ा हो सके। दरअसल, चीन की बेल्ट एंड रोड परियोजना यानि बीआरआई प्रोजेक्ट ने दुनिया के कई देशों में ट्रेनों, सड़कों और बंदरगाहों को बनाया है और उन्हें सुधारने का काम किया है। और अगर 'बिल्ड बैक बेटर वर्ल्ड' जमीन पर उतर आता है तो फिर चीन के लिए ये एक बहुत बड़ा झटका होगा।

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