फिर से धोखा देने की फिराक में ड्रैगन, भारतीय सीमा पर भारी संख्या में कैंपों का निर्माण कर रहा चीन
एक भारतीय अधिकारी ने कहा है कि भारत को सब पता है कि चीन क्या कर रहा है और चीन की बेचैनी भारत की वजह से ही है। भारतीय सैनिक पूरी तरह से एलएसी पर तैयार हैं।
बीजिंग, सितंबर 27: लद्दाख में भारत और चीन की सेना के बीच हिंसक झड़प हुए करीब 17 महीने बीत चुके हैं, लेकिन ड्रैगन की धोखेबाजी की फितरत नहीं बदली है। भारतीय सेना से मुंह की खाने के बाद ड्रैगन और तेजी से भारत को घेरने की कोशिश कर रहा है। ताजा रिपोर्ट में पता चला है कि चीन भारतीय सेना के पास भारी संख्या में कैंपों का निर्माण कर रहा है, ताकि चीनी सेना अपना ऑपरेशन चला सके।

कैंपों का निर्माण
रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय सीमा के पास चीन की सेना पीएलए भारी संख्या में कैंपों का निर्माण कर रहा है, जहां ना सिर्फ पीएलए के सैनिक रह सकेंगे, बल्कि वहां पर घातक हथियारों की भी तैनाती करने में ड्रैगन जुटा हुआ है। एक तरफ चीन लगातार भारत से बात कर रहा है और दूसरी तरफ चीन की सेना कैंप बनाने में व्यस्त है, ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या चीन एक बार फिर से भारत को धोखा देने की फिराक में है। सूत्रों का कहना है कि लेटेस्ट सर्विलांस और खुफिया रिपोर्ट से पता चलता है कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने पूर्वी लद्दाख के सामने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास कम से कम आठ और आस-पास के क्षेत्र में अपने सैनिकों के लिए नए मॉड्यूलर कंटेनर-आधारित आवास का निर्माण किया है।
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कहा कैंपों का निर्माण कर रहा है चीन?
सूत्रों ने टाइम्स ऑफ इंडिया बताया है कि, चीन की सेना काराकोरम दर्रे के पास वहाब जिल्गा से लेकर पियू, हॉट स्प्रिंग्स, चांग ला, ताशीगोंग, मांज़ा और चुरुप तक लगातार कैंपों का निर्माण कर रहा है। क्योंकि ये पूरा इलाका एलएसी के साथ दक्षिण की तरफ जाता है। एक सूत्र ने कहा, "हर एक स्थान पर सात समूहों में व्यवस्थित 80 से 84 कंटेनर मौजूद हैं।" पिछले साल अप्रैल-मई में भारतीय सैनिकों के साथ हिंसक झड़प के बाद पीएलए ने काफी ज्यादा संख्या में कैंप्स बनाए हैं और अभी फिर से नये कैंपों का निर्माण किया जा रहा है। ये कैंप जिस तरीके से बनाए जा रहे हैं और जितनी मजबूती के साथ कैंपों का निर्माण हो रहा है, उससे साफ पता चलता है कि, चीन का निकट भविष्य के लिए अग्रिम पंक्ति से सैनिकों को हटाने का कोई इरादा नहीं है।

भारत की भी मजबूत तैयारी
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि, ''भारत को पता है कि चीन लद्दाख में भारतीय सीमा के पास लड़ाई से संबंधित हथियारों और सैनिकों की तैनाती कर रहा है और कैंपों का निर्माण कर रहा है, लेकिन हमने चीन की सेना को परेशान होने के लिए मजबूर कर दिया है। भारत ने सीमा पर जबरदस्त तैयारी कर रखी है''। उन्होंने कहा कि, '' चीन ना सिर्फ सीमा पर पानी की तरह पैसा बहा रहा है, बल्कि हमारी तैयारी ने पीएलए सैनिकों के मनोबल को प्रभावित किया है। जहां हमारे सैनिक कठोर पहाड़ी इलाकों में काम करने के आदी हैं, वहीं चीनी सैनिकों का इसका अभ्यास नहीं है।" आपको बता दें कि, भारतीय सीमा के पास चीन ने पिछले डेढ़ साल में चार कमांडर बदल दिए हैं।

सीमा पर 'गर्मी का मौसम'
एलएसी से आ रही रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और चीन दोनों ने पूर्वी लद्दाख में एलएसी के साथ "तत्काल गहराई वाले क्षेत्रों" में हॉवित्जर, टैंक और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियों द्वारा समर्थित लगभग 50,000 सैनिकों की तैनाती कर रखी है। दोनों देशों ने सीमा पर घातक और विध्वंसक हथियारों की तैनाती कर रखी है और सीमा पर तनाव का वातावर है। हालांकि, सीमा पर शांति बनी हुई है, लेकिन ये शांति असहज करने वाली है। दोनों देशों की सेनाएं कठोर इलाके और उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्र में ऑक्सीजन की कमी के कारण अपने सैनिकों को नियमित रूप से बदल रही हैं, जबकि एक-दूसरे पर नजर रखने के लिए विमान और ड्रोन तैनात किए जा रहे हैं।

भारतीय सीमा पर चीन की तैयारी
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक फैले 3 हजार 488 किलोमीटर के एलएसी के साथ कई नई हवाई पट्टियां और हेलीपैड भी विकसित किए हैं, इसके अलावा अपने प्रमुख हवाई अड्डों जैसे होतान, काशगर, गर्गुनसा (नगारी गुनसा), ल्हासा-गोंगगर और शिगात्से को अतिरिक्त सैन्य बेस के लिए अपग्रेड किया है। पीएलए ने भारत द्वारा किसी भी हवाई हमले से निपटने के लिए कई अन्य एंटी एयरक्राफ्ट प्रणालियों के अलावा, दो रूसी-मूल के एस-400 मिसाइल सिस्टम की तैनाती की है। एक अन्य सूत्र ने कहा, "चीन वर्तमान में गर्गुनसा में एस -400 सिस्टम से जुड़े 'बिग बर्ड' का अलग अलग फेज में एस-400 मिसाइल सिस्टम और रडार का भी परीक्षण कर रहा है।"

भारत भी तैनात करेगा एस-400
वहीं, भारत को भी कुछ ही महीने में रूस से एस-400 मिसाइल सिस्टम मिलने वाले हैं, जिनकी तैनाती भारत एलएससी पर करेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल अंत तक भारत को रूस से पांच एस-400 मिसाइल सिस्टम मिल जाएंगे, जिनकी तैनाती भारत चीन की सीमा के पास करेगा। आपको बता दें कि भारत ने 2018 में रूस के साथ एस-400 मिसाइल सिस्टम के लिए करार किया था। रूस के साथ ये करार 40 हजार करोड़ रुपये में किया गया है।












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