तवांग की घटना से तिलमिलाए चीन की करतूत, तिब्बती महिलाओं को बंदी बनाने की रिपोर्ट
तवांग बौद्धों का बहुत बड़ा तीर्थ स्थल है। चीन की सेना ने पहले वहां गलत नजर डालने की कोशिश की और अब पता चला है कि उसने अपनी नीतियों पर अमल करने के लिए युवा तिब्बती महिलाओं पर भी कहर ढाना शुरू कर दिया है।

चीन की सेना ने अरुणाचल प्रदेश में जो हरकत की है, वह भी बौद्धों से उसकी पुरानी अदावत का नतीजा है और अब एक खबर तिब्बत के लोगों को लेकर आ रही है, जिसमें वहां की सरकार ने युवा तिब्बती महिलाओं को निशाना बनाना शुरू किया है। इन युवा तिब्बती छात्राओं का कसूर सिर्फ यह है कि वह शी जिनपिंग सरकार की कठोर नीतियों के खिलाफ आवाज उठाना चाहती हैं। क्योंकि, चीन सरकार की नीतियों की वजह से जिस महामारी को लेकर पूरी दुनिया में तबाही मचने की आशंका जताई जाती रही है, उसी बीमारी के नाम पर वह अपने और तिब्बती नागरिकों पर कहर ढाने में लगी हुई है।

चीन ने तिब्बती महिलाओं को बनाया बंदी-रिपोर्ट
अरुणाचल प्रदेश के बौद्ध तीर्थ स्थल तवांग में भारतीय सेना के हाथों बुरी तरह से पिटने को लेकर चीन की दुनिया भर में किरकिरी हो रही है। लेकिन, बौद्धों को शोसित-प्रताड़ित करने से वह फिर भी बाज नहीं आ रहा है। एएनआई ने फयूल के हवाले से एक रिपोर्ट दी है, जिसके मुताबिक चाइनीज पुलिस ने चार तिब्बती युवतियों को एंटी-लॉकडाउन प्रोटेस्ट में शामिल होने की वजह से बंदी बना लिया है। जिन महिलाओं को हिरासत में लिया गया है वो स्टूडेंट हैं और चेंग्दू शहर के जिन्नियू जिले के एक होटल में काम करती हैं। तिब्बत पोस्ट के हवाले से फयूल ने लिखा है,'चाइनीज पुलिस ने चार तिब्बती महिलाओं- जमकार, डेचेन, काल्सांग डोलमा और देल्हा को 5 दिसंबर को गिरफ्तार किया है। इन महिलाओं पर सिचुआन की राजधानी चेंग्दू में जीरो कोविड पॉलिसी के खिलाफ हो रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने का आरोप है।'

जिनपिंग सरकार के खिलाफ आवाज उठाने की सजा
रिपोर्ट के मुताबिक जमकार तिब्बत डार्त्सेडो के सर्लॉन्ग गांव की रहने वाली है, जबकि बाकी तीनों डार्त्सेडो काउंटी की हैं। सभी महिलाएं उसी इलाके में हाई स्कूल में बढ़ती हैं और चेंग्दू शहर में काम करती हैं। लेकिन, कोविड लॉकडाउन की वजह से की गई सख्ती की वजह से होटलों को बंद कर दिया गया है। इन महिलाओं को चीन सरकार की कारगुजारियों का विरोध करने की वजह से सोमवार को गिरफ्तार कर लिया गया। चीन प्रशासन ने विश्वविद्यालयों में और शहरों में सरकार के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की है और उन्हें बंदी बनाया है।

'शी जिनपिंग, सत्ता छोड़ो!'
वहीं, जानकारी के मुताबिक तिब्बत की राजधानी ल्हासा में भी एक तिब्बती युवती त्सेवांग ल्हामो को गिरफ्तार कर लिया गया। वह चीन की नाजिंग कम्युनिकेशन यूनिवर्सिटी में पढ़ती है। चीन प्रशासन को युवा तिब्बती छात्राओं का प्रदर्शन इसलिए नागवार गुजर रहा है, क्योंकि वह 'शी जिनपिंग, सत्ता छोड़ो!' और 'कम्युनिस्ट पार्टी सत्ता छोड़ो!' कर रही थीं। ऐसी नारेबाजी चीन के शंघाई, झेंगझोऊ और तिब्बत के कई इलाकों में भी हो रही है। अक्टूबर में तो ल्हासा में बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ था, उसका वीडियो भी ऑनलाइन हो गया था।

लाचार होकर लोगों ने शुरू किया है प्रदर्शन
गौरतलब है कि चीन कोरोना की शुरुआत से ही सख्त कोविड नीति का पालन कर रहा है। इसके तहत लॉकडाउन लगाए जा रहे हैं, मास टेस्टिंग की जाती है और लोगों की आवाजाही को बिल्कुल ही रोक दिया जाता है। जिनपिंग सरकार की इस सख्ती की वजह से कई चीनी नागरिकों की जान पर भी बन आई है। जब पानी नाक से ऊपर बहना शुरू हुआ तो लोग सरकार विरोधी प्रदर्शन करते हुए सड़कों पर निकलने लगे हैं।

जिनपिंग की सख्त नीति के चलते खुदकुशी की भी रिपोर्ट
एक स्थानीय ने मैन्डरिन में कहा, ' (हम)लंबे वक्त से बंद हैं। बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो सिर्फ काम करने और पैसे कमाने आए हैं। अगर उन्हें ये सब चीन के मुख्य इलाके में ही यह सब मिल जाता तो वे यहां पर नहीं आए होते।' रिपोर्ट के मुताबिक हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला स्थित रिसर्च ग्रुप तिब्बतियन सेंटर फॉर ह्यूमैन राइट्स एंड डमोक्रेसी ने सितंबर में कहा था कि जीरो कोविड पॉलिसी के तहत तीनी सरकार द्वारा किए गए 'सख्त उपायों' के चलते पांच लोगों ने खुदकुशी की थी। रिपोर्ट के मुताबिक चीन की इस नीति के चक्कर में 23 से 25 सितंबर के बीच इन पांच तिब्बतियों ने आत्महत्या कर ली। (तस्वीरें- सांकेतिक)












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