ताइवान से विध्वंसक जंग जीतकर भी बर्बाद हो जाएगा चीन? आखिरी चरण में है चीनी नौसेना की तैयारी!
क्या ताइवान से जंग कर चीन जीत हासिल कर पाएगा, या फिर ताइवान पर नियंत्रण की कोशिश में चीन अपनी नौ-सेना की शक्ति को गंवा देगा?
नई दिल्ली, जुलाई 27: भारत, जापान, फिलीपींस और वियतनाम समेत कई पड़ोसी देशों के साथ चीन का विवाद काफी तेजी से आगे बढ़ता जा रहा है, लेकिन चीन से लोकतांत्रिक देश ताइवान को जितना खतरा है, उतना खतरा अभी तक किसी और दूसरे पड़ोसी देश को नहीं है। तरह तरह के बैलिस्टिक मिसाइलों के जरिए ताइवान को धमकाने वाला चीन एक कदम और आगे बढ़ते हुए जमीन और पानी, दोनों जगहों से लड़ाई करने में सक्षम हथियारों को भी विकसित कर ताइवान के लिए विनाशकारी बन गया है। इसके साथ ही ताइवान तक अपनी सेना को जलमार्ग से पहुंचाने और सेना को बैकअप पॉवर देने के लिए भी चीन काफी तेजी से तैयारी कर रहा है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि चीन की नौसेना अपनी शक्ति में इस कदर इजाफा कर रही है कि वो एक ही झटके में ताइवान पर कब्जा कर ले, लेकिन इसमें कई दिक्कतें हैं और सबसे बड़ी समस्या है कि चीन अपने इतने सैनिकों को ताइवान तक पहुंचाएगा कैसे और उनके लिए बैकअप प्लान कैसे तैयार करेगा, क्योंकि ताइवान खुद भी शक्तिशाली है और दूसरा उसे अमेरिका और जापान से मदद भी मिलेगी। ऐसे में चीन अगर जल्दबाजी करता है तो ना सिर्फ वो हार सकता है, बल्कि उसने अपनी नौ-सेना को जितना शक्तिशाली बनाया है, उसे एक झटके में बर्बाद भी कर सकता है। ऐसे में सवाल ये है कि क्या ताइवान पर चीन कब्जा कर पाएगा ?

ताइवान के लिए खतरनाक
हालांकि, अब इस बात की संभावना कम ही है, जब ताइवान के लिए 'D-Day' की स्थिति उत्पन्न हो, जब 6 जून 1994 को चीन ने 7 हजार जहाजों को ताइवान भेज दिया था, जिसमें 1213 लड़ाकू जहाज, 4126 लैंडिंग जहाज, 736 सहायता पहुंचाने वाले जहाज, 864 व्यापारी जहाजों को नॉर्मेंडी में उतार दिया गया था। लेकिन अब स्थिति बदल गई है और अब इतनी बड़ी तादाद में लड़ाकू जहाजों को भेजना काफी खतरनाक साबित हो सकता है। लेकिन, सवाल ये उठता है कि क्या अब चीन ताइवान पर हमला करने के लिए तैयार हो गया है? चीन ताइवान पर आक्रमण करने के लिए तैयार है या नहीं, इस बात पर पिछले एक-दो सालों से काफी तनाव बना हुआ है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि बेशक, ताइवान पर आक्रमण करने और उसे जीतने के लिए पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के लिए जहाजों, उपकरणों और उसके सैनिकों को अब भारी नुकसान होगा।

चीन की नई प्लानिंग क्या है ?
बहरहाल, चीन के अध्यक्ष शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीन की सेना अपनी जल और थल की क्षमता में भारी इजाफा करने के साथ ही शक्ति प्रोजेक्ट में और सुधार कर रहा है। जिसमें पीएलए नेवी ने पहले ही 40 हजार टन के टाइप-075 लैंडिंग हेलीकॉप्टर डॉक जहाजों को अपने बेड़े में शामिल कर लिया है और माना जा रहा है एक और विशालकाय जहाज भी जल्द ही पीएलए के बेड़े में शामिल होने जा रहा है। टाइप 075 एक फ्लैट-टॉप पोत है जो कई हेलीकॉप्टरों को ले जाने में सक्षम है, साथ ही साथ इसमें विमानों के टेक ऑफ करने और लैंड करने करने के लिए भी जगह है, साथ ही ऐसे हथियारों को ऑपरेट करने की भी क्षमता है, जो पानी और जमीन, दोनों जगहों से मार करने में सक्षम है।

क्या ताइवान को हरा पाएगा चीन ?
इन विशालकाय जहाजों और अन्य छोटे चीनी लैंडिंग जहाजों के बावजूद चीन, ताइवान पर सफलतापूर्वक आक्रमण करने के लिए आवश्यक सामग्री और सैनिकों को लाने और ले जाने के लिए अपर्याप्त हैं। दरअसल, द जेम्सटाउन फाउंडेशन के लिए हाल के एक लेख में यूएस नेवल वॉर कॉलेज के चाइना मैरीटाइम स्टडीज इंस्टीट्यूट के ट्रेनर कॉनर कैनेडी ने कहा कि "एक कामयाब क्रॉस-स्ट्रेट लैंडिंग के लिए कई महत्वपूर्ण बातों को ध्यान में रखने की आवश्यकता होती है। और अगर हमला करने वाला देश फॉलो-अप का विकल्प नहीं बनाता है, तो उसे भयानक नुकसान उठाना पड़ सकता है और परिणामस्वरूप उसकी हार भी हो सकती है। अमेरिकी रक्षा विभाग की 2020 की चीन की सैन्य शक्ति की रिपोर्ट में जिक्र किया गया है कि चीन की सेना ऐसे विकल्पों पर ध्यान दे रही है, जिससे जमीन और पानी दोनों जगहों से लड़ा जा सके और पीएलए की ये कोशिश बताता है कि इस समय ताइवान के समुद्र तट पर सीधे हमले की संभावना कम है। हालांकि, चीन अभी भी ताइवान के एक या अधिक छोटे तटीय द्वीपों पर कब्जा करने में सक्षम है।

क्या हमले के लिए तैयार है चीन ?
हालांकि, दूसरा सवाल ये है कि क्या ताइवान पर हमला करने के लिए चीन के पास दूसके विकल्प हैं और क्या समुद्री मार्ग से सैनिकों को लाने-ले जाने के अलावा चीन के पास कोई दूसरे तरीके भी हैं। सेंटर फॉर ए न्यू अमेरिकन सिक्योरिटी के एडजंक्ट सीनियर फेलो थॉमस एच शुगार्ट ने कहा कि "क्या चीन अपने सैनिकों को लाने-ले जाने की क्षमता में जो अंतर है, उसे कम कर सकता है, जबकि कुछ लोग कह सकते हैं कि चीन के पास ऐसे विकल्प मौजूद हैं, जिनसे वो सैनिकों को आराम से ताइवान स्ट्रेट तक पहुंचा सकता है और ये एक ऐसा मुद्दा है, जिसपर हमारे सहयोगी और दोस्त देशों को आराम से नहीं बैठना चाहिए, क्योंकि अगर अंतर है भी तो चीन इस अंतर को कम करने में सक्षम हो सकता है।

व्यापारी जहाजों को उतारने की संभावना
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अपने लड़ाकू जहाजों तक सुविधाएं पहुंचाने के लिए चीन अपने व्यापारिक जहाजों का भी इस्तेमाल कर सकता है और दूसरी बात ये है कि चीन ने अपने व्यापारिक जहाजों का निर्माण भी लड़ाकू जहाजों की तरह ही किया हुआ है। ऐसे में एक्सपर्ट्स का मानना है कि चीन हर वक्त लड़ाई की तैयारी में लगा रहता है और उसने वास्तव में अपने व्यापारिक जहाजों का डिजाउइन भी लड़ाकू जहाजों की तरह ही किया हुआ है, लिहाजा चीन के व्यापारिक जहाज किसी युद्ध की स्थिति में पीएलए की नौ-सेना का मदद करन में सक्षम साबित हो सकती है।

कैसे खतरनाक बन गया है चीन?
थॉमस एच शुगार्ट ने कहा कि "... हमें इस बात पर विचार करना चाहिए कि दुनिया के सबसे बड़े जहाज निर्माता के रूप में चीन की पहचान है और चीन जिन व्यापारिक जहाजों का भी निर्माण करता है, वो दोहरे उद्येश्य वाले होते हैं।'' उन्होंने कहा कि ''चीन की क्षमता को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. क्योंकि चीन काफी तेजी के साथ लड़ाकू जहाजों का निर्माण करने में सक्षम हो सकता है और अगर हम ताइवान को बचाने जाते हैं तो चीन हमें सरप्राइज दे सकता है। यानि, एक तरफ चीन लगातार अपनी समुद्री क्षमता को विकसित कर रहा है तो दूसरी तरह वो विवाद को भी बढ़ाते जा रहा है। चीन की बेजोड़ जहाज निर्माण क्षमताओं को इस नजरिए से देखा जा सकता है कि द्वितीय विश्व युद्ध में, संयुक्त राज्य अमेरिका ने भी अपनी क्षमताओं में काफी तेजी से वृद्धि कर ली थी। और अगर आधुनिक चीन की उससे तुलना करें तो चीन ने अकेले 2019 में 23 मिलियन टन से अधिक शिपिंग का निर्माण किया। इसके अलावा चीन और हांगकांग के मौजूदा व्यापारी बेड़े का कुल योग 300 मिलियन टन से ज्यादा का उत्पादन करते हैं। ऐसे में सवाल ये उठ रहे हैं कि क्या बहुत जल्द चीन ताइवान पर हमला करने वाला है और क्या अमेरिका और सहयोगी देश ताइवान की रक्षा कर पाएंगे?












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