चीन ने बनाया जासूसों का ग्लोबल नेटवर्क, विरोधियों को इन शातिर तरीकों से लगाता है ठिकाने

वाशिंगटन, 19 जुलाईः चीन दुनिया भर में अपने विरोधियों को दबाने के लिए एक बड़े जासूसी नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहा है। कई रिपोर्टों से पता चलता है कि बीजिंग ने जासूसों का एक वैश्विक नेटवर्क बनाया है जो दुनिया भर में चीन विरोधियों को चुप कराने का काम करता है।

फ्रीडम हाउस ने पेश की रिपोर्ट

फ्रीडम हाउस ने पेश की रिपोर्ट

अमेरिका स्थित गैर-लाभकारी संगठन फ्रीडम हाउस ने अपनी हालिया रिपोर्ट में 2014 और 2021 के बीच "अंतरराष्ट्रीय दमन" की 735 घटनाओं का दस्तावेज प्रस्तुत कर इस दावे को पुष्ट करने की कोशिश की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक चीन हमले, ऑनलाइन धमकी, हिरासत जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर दुनिया भर में चीन विरोधी बागियों को चुप करा रहा है।

कई तरीकों से लोगों को बनाती है निशाना

कई तरीकों से लोगों को बनाती है निशाना

वाशिंगटन डीसी स्थित संगठन फ्रीडम हाउस की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा कई समूहों को लक्ष्य बनाकर चीन की विदेशी आबादी पर दबाव बनाने और उन्हें नियंत्रित करने का प्रयास किया जाता है। इसमें कई जातीय और धार्मिक अल्पसंख्यक, राजनीतिक असंतुष्ट, मानवाधिकार कार्यकर्ता व पत्रकार शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन के अल्पसंख्यक मुस्लिम उइगरों, तिब्बतियों और राजनीतिक असंतुष्टों का उत्पीड़न आम तौर पर राज्य सुरक्षा मंत्रालय द्वारा रोका जाता है। लेकिन लोक सुरक्षा मंत्रालय द्वारा अक्सर चीन के भीतर परिवार के सदस्यों को धमकी देकर दबाव बनाया जाता है।

चीन की गिरफ्त में विदेशी सरकार

चीन की गिरफ्त में विदेशी सरकार

विदेशों में रह रहे चीनी अल्पसंख्यकों के साथ वहां से निर्वासित लोग भी महसूस करते हैं कि चिनफिंग सरकार की उन पर कड़ी नजर है। चीनी सरकार दूसरे देशों में भी उनके अधिकारों का हनन करने से पीछे नहीं हट रही है। फ्रीडम हाउस की रिपोर्ट के अनुसार चीन की यह कम्यूनिस्ट सरकार बेहद ताकतवर है और इसलिए वह विदेशों में भी ऐसा कर पा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन इतना ताकतवर है कि वह कई विदेशी सरकार को भी अपने चंगुल में जकड़े हुए है।

विदेश में चीनी लोगों को बनाती है निशाना

विदेश में चीनी लोगों को बनाती है निशाना

रिपोर्ट के मुताबिक चीन की जिनपिंग सरकार विदेशों में रह रहे तीन तरह के चीनियों को निशाना बनाती है। पहले में ऐसे लोगों को टारगेट पर लिया जाता है जो धार्मिक अल्पसंख्यक को निशाना बनाया जाता है। इसके बाद मानवाधिकार कार्यकर्ता का नंबर आता है और फिर सबसे आखिर में पत्रकारिता से जुड़े लोगों को टारगेट पर लिया जाता है। इसके बाद इन सभी लोगों को अपनी गिरफ्त में लिया जाता है।

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