चीन का मिशन अफ्रीका! बीजिंग में लगा अफ्रीकी देशों के राष्ट्रपतियों का मजमा, जानिए कैसे चारा डाल रहे शी जिनपिंग
China-African summit: दुनिया में चीन का वर्चस्व और अधिपत्य स्थापित करने के मकसद से आगे बढ़ रहे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, जो पहले ही अफ्रीका में चीन को काफी आगे कर चुके हैं, वो एक बार फिर से अफ्रीकी देशों को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि चीनी अभियान जारी रहे।
चीनी नेता शी जिनपिंग कई अफ्रीकी देशों के प्रतिनिधिमंडलों के साथ बीजिंग में तीन दिवसीय शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहे हैं। इस कार्यक्रम का मकसद चीन को महाद्वीप के लिए एक प्रमुख भागीदार के रूप में स्थापित करना है। यह शिखर सम्मेलन चीन-अफ्रीका संबंधों में एक महत्वपूर्ण मौके के दौरान हो रहा है, जो अस्थिर ऋण और चीन की आर्थिक मंदी को लेकर चिंताओं में रहता है।

चीन में अफ्रीका शिखर सम्मेलन
पिछले एक दशक से अधिक समय से, चीन ने अपने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के माध्यम से अफ्रीकी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में 120 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है, और पूरे महाद्वीप में जलविद्युत संयंत्रों, रेलवे और सड़कों के लिए धन मुहैया कराया है।
अफ्रीकन शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले अफ्रीकी नेता चीन के कर्ज सहित महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय ऋण से निपट रहे हैं। हालांकि चीन अफ्रीका के ऋण मुद्दों का प्राथमिक कारण नहीं है, लेकिन चीन की ऋण नीति ने अफ्रीकी देशों पर भारी भरकम कर्ज का बोझ डाल दिया है। कई ऑब्जर्वर्स का मानना है, कि चीन ऋण राहत प्रदान करने की जगह अफ्रीकी देशों के खिलाफ अपने कर्ज को एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है।
इस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए नाइजीरियाई राष्ट्रपति बोला अहमद टीनुबू, रवांडा के राष्ट्रपति पॉल कागमे और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा सहित अफ्रीका भर के नेता पहुंचे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस शिखर सम्मेलन के दौरान चीनी अधिकारी टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल निवेश को बढ़ावा देने की योजना बना रहे हैं, जिससे हरित प्रौद्योगिकियों में चीन के नेतृत्व में अफ्रीका आगे बढ़ेगा। एक्सपर्ट्स का कहना है, इस प्रोजेक्ट के जरिए चीन की कोशिश अफ्रीकी देशों में ग्रीन प्रोजेक्ट्स लॉंच करना है, जिससे ना सिर्फ अफ्रीकी देश उससे और कर्ज लेने पर मजबूर होंगे, बल्कि उस कर्ज को चुकाना भी उनके लिए काफी मुश्किल होगा।
हालांकि, अफ्रीकी नेताओं से उम्मीद की जाती है, कि वे अपनी अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा देने के लिए ज्यादा निवेश और व्यापार के अवसरों की तलाश करेंगे। और उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होना चाहिए, कि व्यापार का मतलब सिर्फ चीनी वस्तुओं के लिए कच्चे माल का आदान-प्रदान न हो।
हाल के वर्षों में अफ्रीकी सरकारों को चीन द्वारा दिए जाने वाले ऋण में उतार-चढ़ाव देखा गया है। 2022 में यह 1 बिलियन डॉलर के निचले स्तर पर पहुंच गया, लेकिन 2023 में ये बढ़कर 4.6 बिलियन डॉलर हो गया। यह प्रवृत्ति चीन और अफ्रीका के बीच वित्तीय सहायता की बदलती गतिशीलता को उजागर करती है।

अफ्रीकी नेताओं को ललचाने की कोशिश में चीन
शिखर सम्मेलन में व्यापार उपायों और छोटे, पर्यावरण के अनुकूल निवेश को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, क्योंकि चीन की बेल्ट एंड रोड पहल एक नए चरण में प्रवेश कर रही है। बीजिंग द्वारा अफ्रीका को अपने ग्रीन टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स, जैसे कि सौर पैनल और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए एक बाजार के रूप में बनाने की संभावना है।
यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में की गई है, जब चीनी वस्तुओं को अनुचित सब्सिडी के बारे में चिंताओं के कारण अमेरिका, यूरोप और कनाडा में टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है। यह शिखर सम्मेलन, अमेरिका और यूरोपीय भागीदारों द्वारा अफ्रीका में बुनियादी ढांचे को वित्तपोषित करने के प्रयासों के साथ भी मेल खाता है, जिसे चीन के बढ़ते प्रभाव की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जाता है।
अफ्रीकी नेताओं को लुभाने के लिए चीन की रणनीति क्या है?
बोस्टन यूनिवर्सिटी के ग्लोबल डेवलपमेंट पॉलिसी सेंटर के मुताबिक, अफ्रीका को चीन का ऋण 2000 में 98.7 मिलियन डॉलर से बढ़कर 2016 में 28.8 बिलियन डॉलर के शिखर पर पहुंच गया है, जिससे चीन अफ्रीका का सबसे बड़ा द्विपक्षीय ऋणदाता बन गया।
हालांकि, हाल के वर्षों में ऋण देने का पैमाना काफी कम हो गया है, जो पिछले साल घटकर 4.6 बिलियन डॉलर रह गया। लेकिन आर्थिक मंदी के जवाब में, चीन अपनी रणनीति को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) की ओर ट्रांसफर कर रहा है, जिसका उद्देश्य बेहतर रिटर्न उत्पन्न करना और राज्य समर्थित ऋणों से जुड़े जोखिमों को कम करना है।
अफ्रीकी देशों में चीन की कुछ हालिया परियोजनाओं में गिनी में 20 बिलियन डॉलर की लौह अयस्क खदान और रेलवे, युगांडा और तंजानिया में 5 बिलियन डॉलर की तेल पाइपलाइन, और नाइजर में 400 मिलियन डॉलर का तेल के बदले नकद ऋण शामिल हैं।
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