सावधान भारत! चीन ने पाकिस्तान को सौंपी AIP से लैस सीक्रेट पनडुब्बी... क्या है ये टेक्नोलॉजी, कितना खतरा ?
सावधान भारत या अटेंशन इंडिया: चीन ने पाकिस्तान को सौंपी AIP से लैस सीक्रेट पनडुब्बी...
China-Pakistan Aip Technology Submarine: चीन पाकिस्तान को लगातार अत्याधुनिक सैन्य उपकरणों से लैस कर रहा है, जिसमें लेटेस्ट हैंगर क्लास की दूसरी पनडुब्बी सौदा है। यह सब हिंद महासागर क्षेत्र में वर्चस्व हासिल करने और भारत के लिए परेशानी पैदा करने के लिए है।
पाकिस्तान नौसेना ने 14 फरवरी को घोषणा की है, कि दूसरी हैंगर क्लास की पनडुब्बी चीन ने पाकिस्तानी नेवी को सौंपी है और पाकिस्तानी नौसेना के प्रमुख एडमिरल नवीद अशरफ की मौजूदगी में कराची शिपयार्ड एंड इंजीनियरिंग वर्क्स (केएस एंड ईडब्ल्यू) में इस पनडुब्बी को रखा गया है।

चीन ने पाकिस्तान को सौंपी पनडुब्बी
पाकिस्तानी नौसेना की तरफ से जारी एक प्रेस रिलीज में कहा गया है, कि पनडुब्बी को चीन की मदद से विकसित किया जा रहा है, और ये पाकिस्तान की स्वदेशी पनडुब्बी विकास परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर था।
पाकिस्तान और चीन के बीच रक्षा समझौते की शर्तों के तहत, आठ हैंगर क्लास की पनडुब्बियों में से चार का निर्माण वर्तमान में चीन के वुचांग शिपबिल्डिंग इंडस्ट्री में किया जा रहा है, और अन्य चार का निर्माण टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (टीओटी) व्यवस्था के हिस्से के रूप में पाकिस्तान के केएस एंड ईडब्ल्यू सेंटर में किया जा रहा है।
पहली हैंगर सीरिज की पनडुब्बी की आधारशिला 27 दिसंबर 2022 को केएस एंड ईडब्ल्यू शिपयार्ड सुविधा में रखी गई थी। उस समय, पाकिस्तानी नौसेना ने इस घटना को दक्षिण एशियाई देश में बनने वाले किसी भी नौसैनिक जहाज के इतिहास में एक प्रमुख मील का पत्थर बताया था।
AIP टेक्नोलॉजी से लैस है पनडुब्बी
हालांकि, हैंगर-क्लास की पनडुब्बी के बारे में ज्यादातर जानकारियों को गोपनीय रखा गया है, लेकिन इन पनडुब्बियों को लेकर जो जानकारी पता है, उसके मुताबिक ये चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी-नेवी के 039A/041 युआन-श्रेणी की पनडुब्बियों का एक निर्यात संस्करण हैं।
पाकिस्तान, हिंद महासागर में अपनी समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 2015 में चीन से इनमें से आठ पनडुब्बियां खरीदने पर सहमत हुआ था।
जब समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे, तो पाकिस्तानी अधिकारियों ने कहा था, कि आठ जहाजों को 2022 से 2028 के बीच पाकिस्तानी नौसेना को सौंप दिया जाएगा। हालांकि, अब तक, ज्यादातर जहाज अभी भी निर्माणाधीन हैं।
पाकिस्तानी नौसेना के तत्कालीन नौसेनाध्यक्ष एडमिरल एम. अमजद खान नियाज़ी ने पिछले साल जनवरी में एक इंटरव्यू में ग्लोबल टाइम्स को बताया था, कि चीन और पाकिस्तान के बीच हैंगर क्लास की पनडुब्बी परियोजना लगातार आगे बढ़ रही है और इसमें एयर-इंडिपेंडेंट प्रपल्सन (AIP) सिस्टम शामिल होगा और दोनों ही देशों में इसके विभिन्न चरणों को निर्माण किया जा रहा है।
हैंगर क्लास की पनडुब्बियों की प्रपल्सन सिस्टम को पाकिस्तानी अधिकारियों ने अभी तक सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन, कई विश्लेषकों का मानना है, कि हैंगर चीन शिपबिल्डिंग एंड ऑफशोर इंटरनेशनल कंपनी (सीएसओसी) एस26 डिजाइन में उपयोग की जाने वाली स्टर्लिंग AIP प्रणाली पर आधारित है।
AIP टेक्नोलॉजी वो देश इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनके पास फिलहाल परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां नहीं हैं और AIP टेक्नोलॉजी से पनडुब्बियों को बिना शोर किए ज्यादा वक्त तक पानी के अंदर छिपने में मदद मिलती है, क्योंकि डीजल ईंधन से चलने वाली पनडुब्बियां इतना शोर मचाती हैं, कि वो आसानी से सोनार सिस्टम से ट्रैक कर ली जाती हैं।
भारत भी AIP टेक्नोलॉजी से ही लैस पनडुब्बियों के निर्माण के लिए फिलहाल सौदे की तलाश में है, जिसके लिए फ्रांसीसी और जर्मन कंपनियों से बात चल रही है।
पाकिस्तानी पनडुब्बियों में कितनी होगी क्षमता?
यूरेशियन टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में पाकिस्तानी अधिकारियों के हवाले से कहा है, कि "चीन से खरीदी जाने वाली पनडुब्बियां आधुनिक सेंसर और रडार से लैस हैं और इनमें बाकी हथियारों के असलावा
पाकिस्तानी नौसेना हैंगर श्रेणी की पनडुब्बियों की आयुध प्रणालियों या उप प्रणालियों के बारे में कोई जानकारी नहीं देती है। हालाँकि, नाम न छापने की शर्त पर एक पाकिस्तानी सूत्र ने यूरेशियन टाइम्स को बताया कि पनडुब्बी अन्य हथियारों के अलावा पाकिस्तानी बाबर III मिसाइल से लैस होगी।
पिछले कुछ वर्षों में कई रिपोर्टों ने संकेत दिया है, कि हैंगर क्लास की पनडुब्बी ऑपरेशनल जरूरतों के आधार पर कई प्रकार के मिशनों को अंजाम दे सकती है। आधुनिक हथियार और सेंसर पनडुब्बी को बहु-खतरे वाले वातावरण में संचालित करने और दूर से लक्ष्य पर हमला करने में सक्षम बनाएंगे। इसमें अत्याधुनिक स्टील्थ फीचर्स भी शामिल होंगे।

पाकिस्तानी नेवी को शक्तिशाली बनाता चीन
पाकिस्तान में चीनी पनडुब्बियों का निर्माण उनके गहरे सैन्य और रक्षा सहयोग का एक और उदाहरण है। पेंटागन द्वारा प्रकाशित 'चीनी सैन्य शक्ति' - 2022 रिपोर्ट नामक एक रिपोर्ट में कहा गया है, कि चीन पाकिस्तान जैसे अंतरराष्ट्रीय भागीदारों की मदद से 2049 तक अपने "राष्ट्रीय कायाकल्प" उद्देश्य को प्राप्त करना चाहता है। इसके लिए उसने इस्लामाबाद को पूरी ताकत से हथियारों से लैस करने की जिम्मेदारी ली है।
चीन का पाकिस्तान को हथियार देना सिर्फ पनडुब्बियों के निर्माण और आपूर्ति तक ही सीमित नहीं है, बल्कि चीन और पाकिस्तान दोनों हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) में अपनी उपस्थिति का विस्तार करना चाहते हैं, पनडुब्बियों का निर्माण और क्षेत्ररक्षण पाकिस्तानी नौसेना के लिए एक रणनीतिक अनिवार्यता बन गया है।
पाकिस्तान अपने पनडुब्बी बेड़े को महत्वपूर्ण रूप से आधुनिक बना रहा है, ताकि वह भारत से ज्यादा पीछे न रहे। चीन ने पाकिस्तानी नौसेना को चार मल्टी-रोल फ्रिगेट (टाइप 054-ए/पी) से भी लैस किया है, जिसके लिए 2018 में एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए थे। सभी चार जहाजों की डिलीवरी अप्रैल 2023 में पूरी हो चुकी है।
ये फ्रिगेट चीन के अब तक निर्मित और कमीशन किए गए सबसे एडवांस युद्धपोत का निर्यात संस्करण हैं। वे अत्यधिक एडवांस गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट हैं, जिनसे पाकिस्तानी नौसेना की युद्ध शक्ति और इसकी परिचालन तैयारियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
पाकिस्तानी नौसेना के अलावा, पाकिस्तानी वायु सेना (पीएएफ) को भी आधुनिक उपकरण दिए गए हैं। इनमें से सबसे महत्वपूर्ण J-10C लड़ाकू विमान है, जिसे PAF "पूर्व से ड्रैगन" के रूप में संदर्भित करता है। पाकिस्तान को अब तक इनमें से 20 ऐसे विमान मिल चुके हैं। पाकिस्तानी एयरफोर्स उन्हें क्षेत्र में 'सुरक्षा संतुलन' बनाए रखने के लिए आवश्यक उपकरण के रूप में देखता है और उन्हें भारतीय राफेल के प्रतिद्वंद्वी के रूप में पेश करता है।












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