ऑस्‍ट्रेलिया में हो रही है एक ऐसी मिलिट्री ड्रिल जिसमें हिस्‍सा ले रहे हैं भारत, पाकिस्‍तान और चीन

ऑस्‍ट्रेलिया। ऑस्‍ट्रेलिया के डार्विन में इन दिनों सबसे बड़ी मैरिटाइम एक्‍सरसाइज यानी नौसेना युद्धाभ्‍यास चल रहा है। इस युद्धाभ्‍यास में 27 देशों के 3,000 नौसैनिक हिस्‍सा ले रहे हैं। डार्विन में होने वाली इस एक्‍सरसाइज की खासियत यह है कि इसमें चीन और भारत दोनों ही शामिल हैं। चीन पहली बार इस एक्‍सरसाइज का हिस्‍सा है। इंडियन नेवी ने अपनी मल्‍टी रोल फ्रिगेट आईएनएस सहयाद्री को इस एक्‍सरसाइज के लिए भेजा है। यह पहला मौका है जब रणनीतिक तौर पर अहमियत रखने वाले एक युद्धाभ्‍यास में चीन और भारत दोनों ही हिस्‍सा ले रहे हैं।

इंडियन नेवी भी इस एक्‍सरसाइज में शामिल

इंडियन नेवी भी इस एक्‍सरसाइज में शामिल

एक्‍सरसाइज काकाडू का आयोजन इस समय डार्विन के उत्‍तरी हिस्‍से में हो रहा है। इस एक्‍सरसाइज में इंडो-पैसेफिक क्षेत्र से 23 जहाज और पनडुब्बियां हिस्‍सा ले रही हैं। एक्‍सरसाइज काकाडू में चीन, जापान, साउथ कोरिया, थाइलैंड, इंडोनेशिया, बांग्‍लादेश, ब्रुनेई, कंबोडिया, कनाडा, चिली, कुक आइलैंड, फिजी, फ्रांस, भारत, मलेशिया, न्‍यूजीलैंड, पाकिस्‍तान, पापुआ न्‍यूगिनी, फिलीपींस, सिंगापुर, श्रीलंका, ईस्‍ट तिमोर, टोंगा, यूएई, अमेरिका, ऑस्‍ट्रेलिया और विएतनाम जैसे देश हिस्‍सा ले रहे हैं। इंडियन नेवी की फ्रिगेट आईएनएस सहयाद्री को डार्विन के लिए रवाना किया गया है। आईएनएस सहयाद्री चार माह से ज्‍यादा समय तक साउथ चाइना सी और प्रशांत महासागर में तैनात थी। आईएनएस सहयाद्री 29 अगस्‍त को डार्विन पहुंची है।

क्‍या है इसका मकसद

क्‍या है इसका मकसद

इस एक्‍सरसाइज के जरिए ये शिप्‍स और सबमरींस इस हिस्‍से से परिचित हो सकेंगी और इससे किसी भी आपदा के समय आपसी टकराव की संभावना खत्‍म हो सकेगी। इससे राहत कार्यों में आपसी सहयोग बढ़ेगा। ऑस्‍ट्रेलियाई फ्रिगेट एचएमएएस न्‍यूकैसेल की कमांडर अनिता सेलिक ने बताया है कि रॉयल ऑस्‍ट्रेलियन नेवी के दो नाविकों को चीन की फ्रिगेट हुआंगशान पर ड्र्रिल के दौरान आने की मंजूरी मिली है। यह एक्‍सरसाइज 15 सितंबर को खत्‍म होगी। एक्‍सरसाइज में रायॅल ऑस्‍ट्रेलियन एयरफोर्स के 21 एयरक्राफ्ट भी शामिल हैं।

क्‍या है डार्विन की अहमियत और चीन को क्‍या होगा फायदा

क्‍या है डार्विन की अहमियत और चीन को क्‍या होगा फायदा

डार्विन, ऑस्‍ट्रेलिया का वह शहर है जो रणनीतिक तौर पर काफी अहमियत रखता है। यह शहर एशिया का द्वार है और साथ ही साल 2011 से अमेरिकी नेवी का बेस है। चीन की पीपुल्‍स लिब्रेशन आर्मी नेवी को यहां पर अमेरिका, ऑस्‍ट्रेलिया, न्‍यूजीलैंड और कनाडा की सेनाओं के साथ शामिल किया गया है। चीन के लिए यह एक मौका हो सकता है कि वह‍ इन देशों के साथ अपने संबंधों को सुधार सकता है क्‍योंकि पिछले कुछ दिनों से इन देशों के संबंध काफी तनावपूर्ण हो गए हैं। ऑस्‍ट्रेलिया के साथ अप्रैल में चीन का तनाव उस समय काफी बढ़ गया था जब ऑस्‍ट्रेलिया की तीन वॉरशिप्‍स ने साउथ चाइना से गुजर कर चीन को चुनौती दे डाली थी। मई में अमेरिका ने चीन को हवाई में होने वाली एक ज्‍वॉइन्‍ट नेवी एक्‍सरसाइज के लिए इनवाइट करने से मना कर दिया था।

साल 1993 में हुई शुरुआत

साल 1993 में हुई शुरुआत

इस एक्‍सरसाइज की शुरुआत साल 1993 में हुई थी। यह एक्‍सरसाइज बहुपक्षीय क्षेत्रीय मैरिटाइम समझौता युद्धाभ्‍यास है। इसे रॉयल ऑस्‍ट्रेलियन नेवी (रैन) की तरफ से आयोजित किया जाता है और रॉयल ऑस्‍ट्रेलियन एयरफोर्स की तरफ से इसे मदद मिलती है। ऑस्‍ट्रेलिया के उत्‍तरी हिस्‍से में काकाडू नेशनल पार्क और इस एक्‍सरसाइज का नाम इसके आधार पर ही रखा गया है। काकाडू एक्‍सरसाइज का यह 14वां संस्‍करण है। इंडियन नेवी का इस एक्‍सरसाइज में हिस्‍सा लेना बताता है कि वह क्षेत्रीय सेनाओं के साथ आपसी भरोसे को आगे बढ़ा रही है। आगे भी इंडो-पैसेफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम रखने में उसका योगदान जारी रहेगा।

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