J-20 फाइटर जेट के बाद हेलीकॉप्टर, LAC के बेहद करीब 10 हेलीपैड्स बना रहा चीन, Indian Army की क्या है तैयारी?
Defence News: सैटेलाइट तस्वीरों का हवाला देते हुए भारतीय मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है, कि चीन ने भारत के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास करीब एक दर्जन हेलीपैड बनाए हैं। चीन ने जो हेलीपैड बनाए हैं, वो करीब 150 मीटर से ज्यादा लंबेहैं और रणनीतिक रूप से प्रमुख भारतीय स्थानों के विपरीत स्थित हैं।
इन हेलीपैड्स से मध्यम-लिफ्ट हेलीकॉप्टरों का ऑपरेशन हो सकता है और इन हैलीपैड्स का निर्माण, सीमा के पास सैन्य तैयारियों को तेज करने की चीन की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। इससे पहले रिपोर्ट आई थी, कि भारतीय सीमा के पास ही चीन ने अपनी पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान जे-20 को भी तैनात किए हैं।

चीन की एडवांस मिलिट्री तैयारी
रिपोर्ट के मुताबिक हेलीपैड के अलावा, चीन ने क्साई चिन क्षेत्र में विस्तारित एयरबेस और भूमिगत बंकरों से भी निर्माण किए हैं। इन सुविधाओं को एक मजबूत सैन्य उपस्थिति बनाए रखने और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तत्काल प्रतिक्रिया क्षमताओं को सुनिश्चित करने के प्रयासों के रूप में देखा जाता है। जून 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद चीन और भारत के बीच बढ़ते तनाव के बीच बुनियादी ढांचे में वृद्धि हुई है।
गलवान घाटी में हुई घटना में 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए और द्विपक्षीय संबंध काफी खराब हो गए। तब से, दोनों देश सीमा पर अपनी सैन्य तैयारियों को बढ़ा रहे हैं। चीन, इन नई सुविधाओं के निर्माण को अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने के लिए एक मजबूत कोशिश के रूप में देखता है।
चीन का हेलीकॉप्टर बेड़ा
चीन के हेलीकॉप्टर बेड़े में तीन मुख्य मॉडल शामिल हैं: Z-8, Mi-17 और हाल ही में पेश किया गया Z-20। Mi-17, एक रूसी-डिजाइन किया गया हेलीकॉप्टर है, जो चीन के सैन्य परिवहन बेड़े की रीढ़ है। Z-8, फ्रांसीसी एयरोस्पेशियल SA 321 सुपर फ्रेलॉन का लाइसेंस प्राप्त वेरिएंट है, जो 1970 के दशक के मध्य से ऑपरेशन में है।
यूएच-60 ब्लैकहॉक डिज़ाइन पर आधारित Z-20 को 2019 में सेवा में शामिल किया गया था और इसमें आधुनिक तकनीक है। चीन ने इस हेलीकॉप्टर का एक सशस्त्र संस्करण भी विकसित किया है। परिवहन हेलीकॉप्टरों के अलावा, चीन ने Z-10 और Z-19 जैसे हमलावर हेलीकॉप्टरों में भी निवेश किया है। इन हेलीकॉप्टरों को सटीक हमलों और पहाड़ी इलाकों में प्रभावी संचालन के लिए डिजाइन किया गया है।
इसके अलावा, रिपोर्ट में आगे बताया गया है, कि चल रहे निर्माण में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थानों पर तीन और हेलीपैड शामिल हैं। अक्ताग के दक्षिण (काराकोरम दर्रे के उत्तर में); किर्मगो ट्रग्गर, गोगरा हॉट स्प्रिंग्स और कोंगका ला के सामने; और गे'गई काउंटी, सिंधु नदी के उद्गम की ओर ये हैलीपेड बनाए जा रहे हैं।

चीन का रणनीतिक मकसद क्या है?
भारतीय सीमा के पास हेलीपैड का निर्माण और हेलीकॉप्टर क्षमताओं में निवेश, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तेजी से सैन्य तैनाती और रसद सहायता बढ़ाने के चीन के रणनीतिक प्रयासों को दर्शाता है। ये घटनाक्रम तनावपूर्ण सीमा गतिरोध और चीन और भारत के बीच बिगड़ते संबंधों के बीच सामने आए हैं।
चीन के बेड़े में हमलावर हेलीकॉप्टरों की कुल संख्या 500 से ज्यादा होने का अनुमान है, जिसमें अन्य सेवाओं के हेलीकॉप्टर भी शामिल हैं। Z-10 चीन की हमलावर हेलीकॉप्टर क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण प्रगति का दर्शाता है।
कुल मिलाकर, ये कार्रवाइयां भारत के साथ LAC पर अपने सैन्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के चीन के इरादे को दर्शाती हैं। इस कदम का मकसद यह सुनिश्चित करना है, कि वे इस संवेदनशील क्षेत्र में उत्पन्न होने वाले किसी भी संभावित संघर्ष या आपात स्थिति का तेजी से जवाब दे सकें।












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