यूक्रेन युद्ध में चीन ने पेश किया शांति प्रस्ताव, शी जिनपिंग ने जंग रोकने के 12 सूत्र सुझाए, मानेंगे पुतिन?

रूस ने पिछले साल 24 फरवरी को यूक्रेन पर आक्रमण किया था और उसके बाद से ही चीन लगातार अमेरिकी और पश्चिमी देशों पर युद्ध को भड़काने का आरोप लगाया है।

Russia-Ukraine War

Russia-Ukraine War: यूक्रेन युद्ध के एक साल होने के बाद पहली बार चीन ने अपनी चाल में बदलाव लाने का संकेत दिया है, जो यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोदिमीर जेलेंस्की और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को खुश करने वाला है। चीन, जो रूस का एक पक्का दोस्त है, उसने अपने 12 सूत्री प्रस्ताव के हिस्से के रूप में रूस-यूक्रेन युद्ध में संघर्षविराम करने और शांति वार्ता शुरू करने का आह्वान किया है। पिछले एक साल में ये पहला मौका है, जब चीन ने शांति वार्ता का आह्वान किया है और चीन के इस आह्वान का यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोदिमीर जेलेंस्की ने स्वागत किया है।

चीन ने बदली अपनी चाल!

चीन ने बदली अपनी चाल!

चीन के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार सुबह यूक्रेन युद्ध को लेकर नया बयान जारी किया है। चीन ने ये बयान उस वक्त जारी किया है, जब यूक्रेन युद्ध के एक साल पूरे हो रहे हैं। चीनी विदेशी मंत्रालय ने जो बयान जारी किए हैं, वो एक 12 सूत्री प्रस्ताव है, जिसमें चीन ने युद्ध को रोकने की दिशा में एक योजना पेश किया है, जिसमें रूस पर लगाए गए पश्चिमी प्रतिबंधों को खत्म करने, परमाणु सुविधाओं की सुरक्षा की सुनिश्चित करने के उपाय, नागरिकों की निकासी के लिए मानवीय गलियारों की स्थापना और अनाज के निर्यात में आने वाले संकटों को हटाने और अनाज की सप्लाई को सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने का भी आग्रह किया गया है, जिसकी वजह से वैश्विक खाद्य कीमतों में उछाल आया है। हालांकि, चीन ने संघर्ष में तटस्थ होने का भी दावा किया है, लेकिन उसने इस बात का भी जिक्र किया है, कि रूस के साथ उसकी दोस्ती की "कोई सीमा नहीं" है। इसके साथ ही चीन ने यूक्रेन पर रूसी आक्रमण की आलोचना करने से भी इनकार कर दिया है।

पश्चिम पर अभी भी कठोर चीन

पश्चिम पर अभी भी कठोर चीन

रूस की आलोचना करने से इनकार करने के साथ साथ चीन ने पश्चिमी देशों पर संघर्ष को भड़काने और युद्ध को "फैलाने" का आरोप लगाया है। चीन ने खास तौर पश्चिनी देशों पर"यूक्रेन को रक्षात्मक हथियार प्रदान करके" युद्ध को फैलाने का आरोप लगाया है। आपको बता दें, कि अमेरिका के नेतृत्व वाली उदार अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का विरोध करने के लिए चीन और रूस ने अपनी विदेश नीतियों को काफी तेजी से एक दिशा में लाया है और चीनी विदेश मंत्रालय के बड़े अधिकारी वांग यी ने इस सप्ताह मास्को की यात्रा के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के दौरान उन संबंधों की ताकत की पुष्टि भी की है। वहीं, अमेरिका ने चीन पर रूस की सैन्य मदद करने के भी आरोप लगाए हैं, जिसको लेकर चीन ने कहा है, कि इन आरोपों में सबूत की कमी है। लेकिन, मौजूदा वक्त में चीन की स्थिति को देखते हुए शंका उत्पन्न हो रहा है, कि क्या रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, शी जिनपिंग के 12-सूत्रीय प्रस्ताव पर आगे बढ़ेंगे, क्योंकि चीन के इन सूत्रों को एक बड़े चाल के दौर पर देखा जा रहा है।

जेलेंस्की ने की चीन के कदम की तारीफ

जेलेंस्की ने की चीन के कदम की तारीफ

प्रस्ताव जारी होने से पहले, यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने इसे एक महत्वपूर्ण पहला कदम बताया है। यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा, कि "मुझे लगता है कि, तथ्य यह है कि चीन ने यूक्रेन में शांति के बारे में बात करना शुरू कर दिया है और मुझे लगता है, कि यह बुरा नहीं है। हमारे लिए यह महत्वपूर्ण है, कि सभी राज्य हमारे पक्ष में हैं, न्याय के पक्ष में हैं।" जेलेंस्की ने ये बातें शुक्रवार को स्पेन के प्रधान मंत्री के साथ एक संवाददाता सम्मेलन में कहा है। वहीं, अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने गुरुवार को कहा था, कि अमेरिका फिलहाल इसपर अपना मत सुरक्षित रखेगा, लेकिन रूस के साथ चीन की निष्ठा का मतलब है, कि वह तटस्थ मध्यस्थ नहीं है। उन्होंने कहा, कि "हम एक न्यायोचित और स्थायी शांति के अलावा और कुछ नहीं देखना चाहेंगे... लेकिन हमें संदेह है कि इस तरह के प्रस्ताव की रिपोर्ट, आगे बढ़कर एक रचनात्मक रास्ते पर आगे बढ़ेगा।"

चीन के शांति प्रस्ताव में कितना दम?

चीन के शांति प्रस्ताव में कितना दम?

अपने शांति प्रस्ताव में चीन ने पहली बार यूक्रेन युद्ध में अपनी स्थिति पर विस्तार से बताने की कोशिश की है, जिसमें उसने इस आवश्यकता भी शामिल किया है, कि सभी देशों की "संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता की प्रभावी रूप से गारंटी दी जाए।" इसके साथ ही चीन ने यूक्रेन युद्ध को "शीत युद्ध मानसिकता" का अंत भी कहा है और इस युद्ध को अमेरिकी आधिपत्य और अन्य देशों में हस्तक्षेप के रूप में एक उदाहरण बताया है। चीन के प्रस्ताव में कहा गया है, कि "एक देश की सुरक्षा, अन्य देशों की सुरक्षा की कीमत पर नहीं हो सकती है, और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने या यहां तक कि सैन्य ब्लॉकों का विस्तार करने की गारंटी नहीं दी जा सकती है।" चीन के प्रस्ताव में आगे कहा गया है, कि "सभी देशों के वैध सुरक्षा हितों और चिंताओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और ठीक से संबोधित किया जाना चाहिए।"

Recommended Video

    Ukraine-Russia War: UN में जंग के खिलाफ प्रस्ताव पास, वोटिंग से दूर रहा India | वनइंडिया हिंदी
    यूएन में वोटिंग से दूर रहा चीन?

    यूएन में वोटिंग से दूर रहा चीन?

    इसके साथ ही, गुरुवार को जब संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक गैर-बाध्यकारी प्रस्ताव को मंजूरी दी, जिसमें रूस से यूक्रेन में शत्रुता समाप्त करने और अपनी सेना वापस लेने का आह्वान किया गया था, तो उस प्रस्ताव पर वोटिंग के दौरान चीन अनुपस्थित रहा। चीन, उन 16 देशों में से एक है, जिन्होंने यूक्रेन पर पिछले पांच प्रस्तावों में से लगभग सभी के खिलाफ मतदान किया या मतदान नहीं किया। वहीं, यूएन में वोटिंग के दौरान सात देशों ने रूस के पक्ष में मतदान किया है,जिसको लेकर एक्सपर्ट्स का कहना है, कि असल में चीन का रूख यूक्रेन को लेकर बदला नहीं है, लेकिन चीन अपने इस प्रस्ताव के साथ खुद को न्यूट्रल दिखाने की कोशिश करता है, क्योंकि वो रूस के लिए पश्चिमी देशों से भी ज्यादा पंगा नहीं लेना चाहता है।

    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+