ऑस्ट्रेलियाई नेवी की जासूसी कर रहा है चीन, कई मिलिट्री सीक्रेट्स चुराने की साजिश
सिडनी। अमेरिका के बाद अब ऑस्ट्रेलिया में भी चीन के वाणिज्यिक दूतावास को बंद करने की स्थितियां पैदा हो गई हैं। ऑस्ट्रेलिया के एडीलेड स्थित चीनी दूतावास के अधिकारियों पर ऑस्ट्रेलियाई नेवी की जासूसी का आरोप लगा है। इन आरोपों के बाद प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन पर दबाव बढ़ गया है कि वह एडीलेड स्थित चीनी मिशन पर कोई कार्रवाई करें। आपको बता दें कि ऑस्ट्रेलिया और चीन के रिश्ते पिछले तीन माह से तनाव के नए स्तर पर पहुंच गए हैं।

नेवी की युद्धक क्षमताओं पर खतरा
सुरक्षा अधिकारियों की तरफ से नेवी की उन क्षमताओं पर खतरे का अंदेशा जताया गया है जिन्हें 65 बिलियन डॉलर की लागत से अपग्रेड किया गया है। इन क्षमताओं के बाद नेवी की युद्धक क्षमताओं में इजाफा हुआ है। ऑस्ट्रेलिया के रक्षा विभाग की तरफ से कहा गया है कि कुछ अज्ञात संगठन मिलिट्री के सीक्रेट्स चोरी करने की साजिशों में लगे हुए हैं। रक्षा विभाग ने इसी आशंका के चलते नेवी की परियोजनाओं के बारे में मंत्रियों के लिए जो जानकारी नोट्स के रूप में तैयार की थी, उसे देने से मना कर दिया गया है। ऑस्ट्रेलिया की योजना अगले 20 सालों में 54 वॉरशिप्स तैयार करने की है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ये यह ऑस्ट्रेलिया की तरफ से सबसे बड़ा रक्षा प्रोजेक्ट है। इन वॉरशिप्स को एडीलेड के बाहरी इलाके में स्थित शिपयार्ड में तैयार किया जाएगा।
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कई प्रोजेक्ट्स में अमेरिका की मदद
फरवरी में शिपयार्ड की तरफ से तीन नए एयर वॉरफेयर डेस्ट्रॉयर्स सौंपे गए हैं और नौ फ्रिगेट्स के निर्माण पर काम जारी है। बताया जा रहा है कि शिपयार्ड की तरफ से साल 2029 में आखिरी वॉरशिप सौंपी जाएगी। 12 पनडुब्बियों का निर्माण भी यहीं होना है और साल 2022 से 2023 तक इन्हें तैयार किया जाएगा। इसके अलावा सर्विलांस के लिए पैट्रोल बोट्स को भी तैयार किया जाएगा। सबसे अहम बात है कि अमेरिका की तरफ से फ्रिगेट्य के लिए वेपन सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक्स को सप्लाई किया जाएगा। करीब 1.5 बिलियन डॉलर के साथ अमेरिकी प्रशासन की तरफ से जनवरी माह में इसे मंजूरी दी गई थी।












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