Chicken parenting: चीन में माता-पिता बच्चों को क्यों दे रहे हैं मुर्गे के खून का इंजेक्शन ? जानिए
बीजिंग, 14 सितंबर: चीन के माता-पिता अपने बच्चों को 'सुपर किड' बनाने और जीवन के हर क्षेत्र में सफलता दिलाने के लिए 'चिकन पेरेंटिंग' की धारणा बढ़ाने में लगे हुए हैं। वहां बच्चों को जबरन चिकन का खून चढ़ाया जा रहा है। पेरेंट्स को उम्मीद है कि ऐसा करने से उनके बच्चे जिंदगी में कभी नाकाम नहीं होंगे और जिस फिल्ड में भी घुसेंगे उसमें बाजी उनके हाथ ही रहेगी। लेकिन, ऐसी सोच के बुरे परिणाम भी दिखने लगे हैं और चीन में बच्चों में डिप्रेशन की संख्या का दर दुनिया में सबसे ज्यादा हो चुका है। यही नहीं वहां ज्यादातर स्कूली बच्चों की आंखें खराब हो चुकी हैं, यह जानकारी खुद शी जिनपिंग की सरकार की एजेंसियों के हवाले से दुनिया के सामने आई है।

चीन में बच्चों को दिया जा रहा है मुर्गे के खून का इंजेक्शन
'चिकन पेरेंटिंग' का सीधा संबंध बच्चों के लालन-पालन के लिए 'सनकी स्टाइल' अपनाए जाने से है। इसमें माता-पिता अपने बच्चों को चिकन के खून का इंजेक्शन लगवाते हैं। द सिंगापुर पोस्ट की इस खबर ने चीन के लोगों की खाने-पीने की अजीब आदतों की चर्चा के बीच एक नई सनसनी मचा दी है। ऐसे माता-पिता मानते हैं कि मुर्गे का खून उनकी संतान के लिए सभी तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज है। इनमें बांझपन, कैंसर और गंजापन जैसी समस्याएं भी शामिल हैं।

बीजिंग-शंघाई में काफी लोकप्रिय है 'चिकन पेरेंटिंग'
चीन के लोगों का मानना है कि मुर्गे का खून बच्चों की सक्रियता को बढ़ा देता है, जिससे वे पढ़ाई-लिखाई के साथ-साथ खेल में भी काफी बेहतर करने लगते हैं। सुपचाइना डॉट कॉम की रिपोर्ट में भी कहा गया है कि 'चिकन बेबी' की धारणा वहां बहुत ही ज्यादा लोकप्रिय हो चुकी है। खासकर बीजिंग, शंघाई और गौंगझोऊ जैसे महानगरों में, जहां ऐसे अनेकों 'जुनूनी मध्यमवर्गीय चीनी माता-पिता' रहते हैं जो इस तरह की हरकतों में लिप्त हो चुके हैं।

चीन में 25 फीसदी किशोर डिप्रेशन के शिकार-रिपोर्ट
सुपचाइना मीडिया रिपोर्ट से यह भी खुलासा होता नजर आ रहा है कि चीन में ऐसी मानसिकता के बुरे परिणाम भी दिखने शुरू हो गए हैं। क्योंकि, चीन में किशोरों में ड्रिप्रेशन की शिकायत बहुत ही ज्यादा बढ़ गई है। द सिंगापुर पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक 2019-20 की नेशनल मेंटल हेल्थ डेवलपमेंट रिपोर्ट कहता है कि चीन में 25 फीसदी किशोर डिप्रेशन से पीड़ित हैं और 7.4 फीसदी को बहुत ज्यादा डिप्रेशन की शिकायत है।

चीन में ज्यादातर स्कूली बच्चों की आंखों में शिकायत
उधर रिपोर्ट से यह भी जानकारी मिली है कि चीन में बच्चों की निकट दृष्टि दोष (मायोपिया) की शिकायत दुनिया में सबसे ज्यादा है। यहां के नेशनल हेल्थ कमीशन ने पाया है कि मिडिल स्कूल के 71 फीसदी और हाई स्कूल 81 फीसदी बच्चे इस समस्या के शिकार हो चुके हैं। द सिंगापुर पोस्ट के मुताबिक कुछ ऑब्जर्वरों ने चीन की 'चिकन पेरेंटिंग' स्टाइल को वहां बढ़ रहे गला-काट प्रतियोगिता की जटिलता का उदाहरण माना है। उनका तर्क है कि माता-पिता को इस तरह की अंध-प्रतियोगिता में पड़ने से सावधान रहना चाहिए, जिनके जरिए वो अपने अपने अधूरे सपनों को पूरा करना चाहते हैं।

अमेरिका के 'हेलीकॉप्टर पेरेंटिंग' की तरह है मामला
'चिकन पेरेंटिंग' स्टाइल लगभग 'हेलीकॉप्टर पेरेंटिंग' से मिलती है, जो कि अमेरिका में देखने को मिलता है। इस धारणा से बच्चों को पालने-पोसने वाले अमेरिकी माता-पिता मानते हैं कि सिर्फ एक स्कूल काफी नहीं होता, अच्छे ग्रेड भी काफी नहीं होते, क्योंकि बाकी लोग भी उसी तरह से अच्छा ही परफॉर्म कर रहे होते हैं। यानी बच्चों से जरूरत से ज्यादा उम्मीदें पाल ली जाती हैं, आखिरकार नुकसान बच्चों को ही भुगतना पड़ता है। (तस्वीरें- प्रतीकात्मक)












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