'यूक्रेन में परमाणु बम गिराने का आ गया वक्त', रूस की हार से बौखलाए चेचन्या कमांडर, पुतिन से आह्वान
दो दिन पहले ही यूक्रेन के चार राज्य डोनेट्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और जापोरिजिया का विलय रूस में करने की घोषणा की है और पुतिन ने विलय के आदेश पर दस्तखत कर दिए हैं, जिसके बाद न्यूक्लियर वार का खतरा काफी ज्यादा बढ़ गया है।
मॉस्को, अक्टूबर 02: राष्ट्रपति पुतिन के आदेश के बाद रूस ने यूक्रेन के चार राज्यों को अपने देश में मिला लिया है और अब यूक्रेन युद्ध में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की बात की जाने लगी है। पुतिन पहले ही परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को लेकर हरी झंडी दे चुके हैं, वहीं चेचन गणराज्य के नेता रमजान कादिरोव ने कहा है कि, अब रूस को यूक्रेन में परमाणु बम गिरा देनी चाहिए। रमजान कादिरोव रूसी राष्ट्रपति पुतिन के काफी करीबी माने जाते हैं और वो युद्ध के पहले ही दिन से रूस के साथ खड़े हैं। चेचन्या नेता के इस बयान के बाद पूरी दुनिया में हड़कंप मच गई है और अब आशंका लगाई जा रही है, कि क्या पुतिन अपने दोस्त की बात मानेंगे?

परमाणु बम गिराने की मांग
चेचन गणराज्य के नेता, रमजान कादिरोव ने रणनीतिक यूक्रेनी शहर लाइमैन से रूसी सैनिकों के बाहर निकलने के बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से आह्वान किया है, कि वो यूक्रेन में 'कम इंटेंसिटी' के परमाणु हम गिराएं। अमेरिकी मीडिया सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन में रूसी सेना के पैर लगातार उखड़ रहे हैं, जबकि यूक्रेन को लगातार पश्चिमी देशों से समर्थन मिल रहा है, जिसने पुतिन को हार के कगार पर ला खड़ा किया है और चेचन्या नेता पुतिन को मिल रही हार से बौखलाए हुए हैं। चेचन्या नेता ने कहा कि,'मुझे नहीं पता कि, रक्षा मंत्रालय देश के सुप्रीम कमांडर (पुतिन) को क्या रिपोर्ट करता है, लेकिन मेरा मानना है किस हमें और सख्त कदम उठाने की जरूरत है, जिसके तहत सीमावर्ती क्षेत्रों में मार्शल लॉ घोषित कर देनी चाहिए और कम इंटेंसिटी के परमाणु बम गिराने चाहिए।' चेचन नेता ने अपने टेलीग्राम चैनल पर कहा कि, 'हर फैसला अमेरिका या फिर पश्चिमी देशों को देखकर लेने की जरूरत नहीं है।'

रणनीतिक शहर में मिली बड़ी हार
आपको बता दें कि, पूर्वी यूक्रेन के डोनबास को भले ही रूस ने यूक्रेन से अलग कर दिया हो, लेकिन पुतिन की फौज को लगातार यूक्रेन में हार मिल रही है और रणनीतिक तौर पर बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले लाइमैन शहर से रूसी सैनिकों के भागने के बाद चेचन नेता ने रूसी जनरलों को जमकर फटकार लगाई है और उन्होंने कहा है, कि अब वक्त आ गया है, कि क्रेमलिन कठोर कदम उठाए। इसके साथ ही राष्ट्रपति पुतिन के करीबी और साल 2008 से 2012 के बीच रूस के राष्ट्रपति रहे दिमित्री मेदवेदेव, जो इस वक्त युद्ध को लेकर पुतिन के सबसे बड़े सलाहकार हैं, उन्होंने भी पिछले हफ्ते परमाणु हथियारों पर चर्चा की है और उन्होंने अपने टेलीग्राम चैनल पर लिखा कि, "अगर खतरा हमारी सीमा रेखा से ज्यादा होगी, तो हमें जवाब देना होगा और निश्चित तौर पर हम जो कह रहे हैं, वो कोई बकवास नहीं है।"

परमाणु लड़ाई के करीब दुनिया
रूस ने दो दिन पहले ही यूक्रेन के चार राज्य डोनेट्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और जापोरिजिया का विलय रूस में करने की घोषणा की है और पुतिन ने विलय के आदेश पर दस्तखत कर दिए हैं, जिसके बाद न्यूक्लियर वार का खतरा काफी ज्यादा बढ़ गया है। पुतिन ने दस्तखत करने के साथ ही सख्त तौर पर कहा है, कि इन चारों राज्यों में अब अगर यूक्रेन अपनी सेना भेजता है, तो वो रूस पर हमला माना जाएगा और रूस उस हिसाब से जवाब देगा। वहीं, यूक्रेन ने जनमत संग्रह और राज्यों के विलय की बात को खारिज कर दिया है, ऐसे में चिंता इस बात को लेकर है, कि अगर यूक्रेन अपने खोए हुए इन चारों राज्यों में सैनिकों को भेजता है, तो पुतिन आधिकारिक तौर पर युद्ध का ऐलान कर देंगे और फिर ये युद्ध रूस बनाम नाटो का भी हो सकता है, क्योंकि नाटो देश लगातार यूक्रेन तो हथियारों की सप्लाई कर रहे हैं। पुतिन ने इन चारों राज्यों के विलय की घोषणा करते हुए कहा कि, इन चारो राज्यों में रहने वाले लोग अब हमेशा के लिए रूस के नागरिक हो चुके हैं।

पूरी ताकत से नये क्षेत्र की रक्षा
राष्ट्रपति पुतिन ने इसके साथ ही पश्चिमी देशों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं और इस बात को नकारा है, कि वो सोवियत संघ के फिर से निर्माण की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, पुतिन ने एक बयान में कहा है कि, रूस अपनी पूरी ताकत के साथ अपने नये क्षेत्रों की रक्षा करेगा। जबकि, दूसरी तरफ यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि, उनका देश नाटो में शामिल होने के लिए तत्काल आवेदन कर रहा है। अलजजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जेलेंस्की ने कहा कि, "हम नाटो में त्वरित परिग्रहण के लिए यूक्रेन के आवेदन पर हस्ताक्षर करके अपना निर्णायक कदम उठा रहे हैं।" वहीं, चार यूक्रेनी क्षेत्रों के रूस में विलय की घोषणा करने पर पुतिन की दुनियाभर में आलोचना की जा रही है और पश्चिमी देशों के नेताओं ने इसकी निंदा की है और इस विलय को अवैध करार देते हुए कसम खाई है, कि वो इस अवैध विलय को कभी मान्यता नहीं देंगे। वहीं, अमेरिका ने कहा है, कि जो भी कंपनी इन चारों क्षेत्रों में अपना कारोबार करेगी, उन कंपनियों पर सख्ततम प्रतिबंध लगाए जाएंगे।

पहले भी गुस्सा दिखा चुके हैं चेचन्या नेता
आपको बता दें कि, पिछले महीने भी चेचन्या नेता रमजान कादिरोव ने यूक्रेन में रूस की हार को लेकर अपनी गहरी नाराजगी जता चुके हैं और उन्होंने पिछले महीने अपने एक ऑडियो मैसेज में कहा था कि, "मैं रक्षा मंत्रालय के लोगों की तरह रणनीतिकार नहीं हूं। लेकिन, यह साफ है, कि गलतियां की गईं हैं। मुझे लगता है कि वे कुछ निष्कर्ष निकालेंगे।" हालांकि, उन्होंने एक बार फिर से उम्मीद जताई थी, कि जो क्षेत्र रूस के नियंत्रण से बाहर गई हैं, वो एक बार फिर से रूस के नियंत्रण में वापस आ जाएंगीं। उन्होंने कहा था कि,"हमारे पास हमारे लोग हैं, विशेष रूप से ऐसी स्थितियों के लिए तैयार किए गए लड़ाके हमारे पास हैं और उनसे जुड़ने के लिए 10,000 और लड़ाके तैयार हैं। हम निकट भविष्य में ओडेसा पहुंचेंगे।" चेचन्या नेता ने राष्ट्रपति पुतिन की आलोचना उस वक्त की थी, जब रूस की सेना को खार्किव में भारी नुकसान उठाना पड़ा था। ऐसे में सवाल ये हैं, कि क्या रूसी राष्ट्रपति अपने दोस्त की बात मानकर क्या वाकई यूक्रेन पर परमाणु बम गिराएंगे?












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