NSA अजित डोभाल का चक्रव्यूह और संघर्ष विराम पर राजी पाकिस्तान, इमरान के सहयोगी ने कहा- बहुत दबाव था
NSA अजित डोभाल ने भारत-पाकिस्तान LOC संघर्ष विराम समझौता करवाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के सहयोगी ने एक ऑडियो क्लिप में कहा है कि दबाव का जिक्र किया है।
नई दिल्ली/इस्लामाबाद: भारत और पाकिस्तान के बीच LOC पर सख्त सीजफायर के लिए समझौता हो चुका है लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजित डोभाल ने कैसे पाकिस्तान को LOC पर सीजफायर समझौते के लिए बाध्य कर दिया?

अजित डोवाल का चक्रव्यूह
25 फरवरी को भारत और पाकिस्तान ने ज्वाइंट स्टेटमेंट में कहा कि दोनों देश 2003 में सख्त सीजफायर समझौते पर फिर से तैयार हो गये हैं और दोनों देश विवाद के 'मुख्य विषयों' पर बात करेंगे और दोनों देश LOC पर सीजफायर का उल्लंघन नहीं करेंगे। भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के लिए इस समझौते पर फिर अमल के लिए साथ आना किसी बड़ी जीत से कम नहीं है। लेकिन, इसके पीछे भारत के एनएसए अजित डोभाल पिछले तीन महीने से काम कर रहे थे। भारत और पाकिस्तान के उच्चाधिकारियों के बीच पिछले तीन महीने से 'बैक चैनल' के जरिए लगातार बात चल रही थी और फिर विश्व को सरप्राइज देते हुए दोनों देश ने संयुक्त बयान जारी कर सरहद पर संघर्ष विराम की एक साथ घोषणा कर दी।
'इंडियन एक्सप्रेस' के मुताबिक भारतीय एनएसए अजित डोभाल ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के सिक्योरिटी अफेयर्स के स्पेशल असिस्टेंट मोईद युसूफ के साथ किसी 'तीसरे' देश में गुप्त बातचीत की थी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के सहयोही मोईद युसूफ के साथ अजित डोवाल की पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल कमर बाजवा से भी लगातार बातचीत चल रही थी। पाकिस्तान सरकार के फैसलों को पाकिस्तान सेना ही प्रभावित करती है लिहाजा अजित डोभाल लगातार पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल कमर बाजवा से बात कर रहे थे जिन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को भारत के साथ सरहद पर शांति के लिए समझौता करने को कहा। सरहद पर संघर्ष विराम के लिए पाकिस्तान की सेना और इमरान खान दोनों एक साथ तैयार हो गये और फिर संघर्ष विराम का फैसला लिया गया। हालांकि, पाकिस्तान के NSA मोईद युसूफ ने अजित डोभाल से किसी भी मुलाकात की बात से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने एक ट्वीट कर मुलाकात की खबरों का खंडन करते हुए इसे बेसलेस करार दिया है।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक दोनों देशों के बीच सरहद पर संघर्ष विराम के लिए समझौता तो हो चुका है मगर समझौते का आधार क्या है, इसे सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। दरअसल, दोनों देशों की सरकार नहीं चाहती है कि समझौते के आधार पर देनों देशों की जनता अपना नजरिया बनाए या फिर किसी तरह का कोई विवाद हो।
सीजफायर के बाद LOC की स्थिति
पाकिस्तान के साथ सरहद पर संघर्ष विराम का ज्वाइंट स्टेटमेंज जारी होते ही LOC पर असाधारण तरीके से तनाव के माहौल में कमी आ गई है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा है कि 'भारत पाकिस्तान के साथ सामान्य और दोस्ताना रिश्ता बनाना चाहता है। भारत ने पाकिस्तान के साथ हमेशा अच्छे रिश्ता बनाने की वकालत की है और उसके लिए तमाम बिंदुओं पर शांतिपूर्वक समझौते भी किए हैं'। अपने बयान में भारतीय विदेश मंत्रालय ने सबसे महत्वपूर्ण बात पर जोर देते हुए कहा कि 'भारत ने कोर इश्यू पर अब भी अपना नजरिया नहीं बदला है और भारत कोर इश्यू पर अपने पुराने रूख पर कायम है और इसे बार बार दुहराने की जरूरत नहीं है'। भारतीय विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के सामने स्पष्ट तौर पर साफ कर दिया है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं हो सकती है। वहीं FATF में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में बरकरार रखने के सवाल पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि 'FATF अपने हिसाब से काम करता है और अपने हिसाब से फैसले करता है'। वहीं, सीजफायर समझौते की घोषणा होती ही LOC पर दोनों देशों की सेना ने भी शांति की घोषणा कर दी है।
कैसे हुआ संघर्ष विराम समझौता?
LOC पर संघर्ष विराम समझौते तो हो गया है मगर पर्दे के पीछे क्या क्या हुआ इसे जानने के लिए दोनों देश के लोग उत्सुक हैं। पाकिस्तानी अखबार द डॉन के मुताबिक 'पाकिस्तान में भी भारत के साथ संघर्ष विराम कैसे हुआ इसे जानने की उत्सुकता है'। पाकिस्तान अखबार ने लिखा है कि 'ना ही इस्लामाबाद और ना ही नई दिल्ली से इस 'शांति समझौते' के बारे में डिटेल्ड रिपोर्ट दी गई है मगर माना जा रहा है कि दोनों देशों की खुफिया एजेंसियां लगातार बैक चैनल और हॉट लाइन के जरिए बातचीत कर रही थी। भारत की तरफ से अजित डोभाल बात कर रहे थे और पाकिस्तान की तरफ से NSA मोईद युसूफ बात कर रहे थे। हालांकि, मोईद युसूफ ने अजित डोभाल से मुलाकात और बातचीत की किसी भी बात से इनकार कर दिया है'। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के स्पेशल असिस्टेंट मोइद युसूफ ने एक ट्वीट में कहा है कि दोनों देशों के DGMO स्तर की बैठक में प्राइवेट मीटिंग में संघर्ष विराम को लेकर बातचीत की गई।
वहीं, पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर मोईद युसूफ का एक ऑडियो क्लिप भी वायरल हो रहा है जिसमें वो कहते सुने जा रहे हैं कि 'ऐसे समझौते पर्दे के पीछे किए जाते हैं। इन समझौते के पीछे काफी मेहनत की जाती है और क्या आपको लगता है बिना मेहनत और बिना किसी दबाव के ऐसे समझौते होते हैं'। ऐसे में अब पाकिस्तान में सवाल पूछे जा रहे हैं कि पाकिस्तान के ऊपर किसका दबाव था?
सीजफायर पर पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
भारत के साथ संघर्ष विराम का पाकिस्तान में स्वागत किया गया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने अपने बयान में संघर्ष विराम का स्वागत करते हुए कहा है कि दोनों देशों के बीच हुए इस समझौते के पॉजिटिव डेवलपमेंट के तौर पर देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि 'भविष्य के लिए ये पॉजिटिव समझौता है। भारत को इस समझौते पर अमल करना चाहिए और दोनों देशों के बीच कश्मीर मसले पर बातचीत कैसे हो इसके लिए हमें जमीन तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए'। पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने कहा कि 'संघर्ष विराम के बाद LOC पर तनाव खत्म हो सकता है' उन्होंने ये भी कहा कि पाकिस्तान भारत के साथ अच्छे संबंध बनाना चाहता है।












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