मुस्लिम परिवार की हत्या के बाद हेट स्पीच पर सख्त हुआ कनाडा

ओटावा, 24 जून। कनाडा की लिबरल सरकार ने आपराधिक और मानवाधिकार से जुड़े कानूनों में बदलाव का प्रस्ताव पेश किया है. यह प्रस्ताव तब आया है जब एक मुस्लिम परिवार को ट्रक से कुचल दिए जाने की घटना के जख्म अब भी ताजा हैं.

Provided by Deutsche Welle

इसी महीने हुई एक घटना में एक 20 वर्षीय युवक ने अपने ट्रक से एक मुस्लिम परिवार को कुचल दिया था. 6 जून को हुई इस घटना को सरकार ने नफरत के कारण किया गया अपराधा बताया था. आरोपी युवक पर हत्या और आतंकवाद की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है.

न्याय मंत्री डेविड लामेटी ने एक बयान में कहा, "आज हम जो कदम उठा रहे हैं, वे कमजोरों की मदद करेंगे, पीड़ितों को सशक्त करेंगे और इंटरनेट पर नफरत फैलाने वालों को सजा दिलाएंगे."

कौन होगा प्रभावित?

जिन बदलावों का प्रस्ताव किया गया है, उनके तहत अपनी निजी वेबसाइटों, सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म या ब्लॉग पर नफरत भरी टिप्पणियां करने वालों के खिलाफ शिकायत करना आसान होगा. ऐसी वेबसाइट चलाने वालों के खिलाफ भी मुकदमा किया जा सकेगा. किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाकर इंटरनेट पर नफरत भरी टिप्पणी करने का दोषी पाए जाने पर 20 हजार कनाडाई डॉलर यानी लगभग 12 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है.

इस कानून में फिलहाल सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म चलाने वाली कंपनियों को पक्षकार नहीं बनाया गया है. यानी उन पर मुकदमा नहीं किया जा सकेगा. लेकिन सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया चलाने वाली कंपनियों को जिम्मेदार बनाने के बारे में जल्द ही जनता से सुझाव मांगे जाएंगे. इनके तहत 'नफरत भरी टिप्पणियों जैसी खतरनाक सामग्री, आतंकवाद से जुड़ी सामग्री और हिंसा भड़काने वाली सामग्री' को लेकर कंपनियों को जिम्मेदार बनाने पर सुझाव मांगे जाएंगे.

वैसे, इस प्रस्ताव के निकट भविष्य में पास होने की संभावनाएं कम ही हैं क्योंकि बुधवार को कनाडा की संसद के मौजूदा सत्र का आखरी दिन था. और प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो आने वाले महीनों में चुनाव कराने का ऐलान कर सकते हैं.

घृणा रोकने की कोशिशें

हेट स्पीच को फैलाने में सोशल मीडिया और इंटरनेट की भी बड़ी भूमिका है. कई देशों की सरकारें दुनिया की बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों पर हेट स्पीच को रोकने के लिए कानूनी बंदिशें भी लगाने के प्रयास कर रही हैं.

पिछले साल जर्मनी की एक अदालत ने कहा था कि देश के हेट स्पीच कानून में महिलाओं को बदनाम करने की कोशिशें भी शामिल हैं. मामला एक ऐसे पुरुष का था जो अपनी वेबसाइट पर महिलाओं को "दोयम दर्जे" वाली और "कमतर" बताया करता था.

अपील कोर्ट के जज ने अपने आदेश में कहा कि विश्व-युद्ध खत्म होने के बाद जर्मनी में घृणा भाषण या भड़काने वाले भाषण के खिलाफ बने कानूनों के अंतर्गत महिलाओं कों भी सुरक्षा मिलती है, जिन्हें महिला होने के कारण अपमान का सामना करना पड़े. जज ने कानून की व्याख्या करते हुए कहा कि इसका सबसे बड़ा मकसद मानव गरिमा की रक्षा करना है.

संयुक्त राष्ट्र ने 2019 में जातीय संहार रोकथाम विभाग के नेतृत्व में हेट स्पीच के खिलाफ वैश्विक अभियान चलाया था. यूएन चाहता है कि घृणा भरे माहौल को काबू में करने के लिए सभी देश साथ आएं. संस्था के महासचिव अंटोनियो गुटेरेश ने तब कहा था कि इंसान के एक जगह से दूसरी जगह जाने पर होने वाली बहस, रिफ्यूजी और माइग्रेशन से जुड़ते हुए आतंकवाद तक पहुंच गई. उन्होंने कहा, "समाज में मौजूद कई खामियों के लिए इसे ही जिम्मेदार ठहराया जा रहा है."

वीके/एए (रॉयटर्स, डीपीए, एएफपी)

Source: DW

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