कनाडा में प्रदर्शनकारियों पर सरकार का कहर, लोकतंत्र की मर्यादा भूले प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो?

कनाडा की राजधानी ओटावा में पिछले तीन हफ्तों से ट्रक ड्राइवर्स का प्रदर्शन चल रहा है और अब आंदोलन को बेरहमी से कुचलने की कोशिशें तेज हो गई हैं।

ओटावा, फरवरी 19: उत्तरी भारत में एक बहुत प्रचलित कहावत है, 'जब खुद पर पड़े? खुदा ना ऐसा करे!' कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के साथ कुछ ऐसा ही हो गया है। किसान आंदोलन के वक्त भारत को लोकतंत्र की रक्षा का ज्ञान देने वाले कनाडा के प्रधानमंत्री अब खुद लोकतंत्र को अपने पैरों तले रौंद रहे हैं और प्रदर्शनकारियों पर कहर बनकर टूट रहे हैं। जो देश भारत को लोकतंत्र में प्रदर्शन का महत्व समझा रहा था, वो देश एक महीना भी आंदोलन को नहीं झेल पा रहा है।

प्रदर्शनकारियों को कुचल रही सरकार

प्रदर्शनकारियों को कुचल रही सरकार

प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने पहले ही साफ कर दिया था, कि प्रदर्शन को कुचल दिया जाएगा और अब कनाडा की पुलिस ने थर्ड डिर्गी का इस्तेमाल करते हुए ट्रक प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार करना शुरू कर दिया है। कोविड 19 वैक्सीन मैंडेट के खिलाफ पिछले तीन हफ्तों से राजधानी ओटावा की सड़कों पर शांतिपूर्वक आंदोलन कर रहे ट्रक ड्राइवर्स को सड़क से हटाने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया है और डंडों के सहारे उन्हें खदेड़ा जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को भारी संख्या में प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है।

घर-घर ऑपरेशन

रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडा के पुलिस अधिकारी राजधानी ओटावा में प्रदर्शन वाले इलाकों में घर घर ऑपरेशन चला रहे हैं और लोगों को उनके घरों से गिरफ्तार कर जेल भेज रहे हैं। अधिकारियों को ओटावा की बर्फ से ढकी सड़कों पर खड़े ट्रकों, कैंपरों और अन्य वाहनों को ले जाते हुए देखा जा रहा है। पुलिस ने कहा कि, कुछ प्रदर्शनकारियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है और उन्हें हिरासत में ले लिया गया। वहीं, दर्जनों प्रदर्शनकारियों को हाथों में हथकड़ी बांधकर पुलिस को जबरदस्ती ले जाते हुए देखा गया है। हालांकि, जस्टिन ट्रूडो ने भले ही लोकतंत्र को अपनी 'जूतों के तले' रौंदना शुरू कर दिया हो, बावजूद इसके सैकड़ों प्रदर्शनकारी अभी भी डटे हुए हैं और सरकार की 'तानाशाही' के खिलाफ सड़क से हल्ला बोल रहे हैं।

आजादी के गाने गाते आंदोलनकारी

मॉन्ट्रियल के ट्रक चालक केविन होमौंड ने पीएम ट्रूडो की 'तानाशाही' पर कहा कि "आजादी कभी भी मुफ्त में नहीं मिलती है"। उन्होंने कहा कि, "तो क्या हुआ अगर उन्होंने हमें हथकड़ी लगाई और हमें जेल में डाल दिया?" आपको बता दें कि, पुलिस ने गुरुवार की देर रात दो प्रमुख विरोध नेताओं को गिरफ्तार कर लिया है और उन्हें जेल में डाल दिया है, वहीं कनाडा की पुलिस काफी तेजी से प्रदर्शनस्थल को खाली कराने की कोशिशों में जुट गई है। वहीं, सरकार ने प्रदर्शनकारियों को पहुंचने वाली सारे मदद को रोक दिया है और और हर उस रास्ते को जाम कर दिया है, जिसके जरिए आंदोलनकारियों तक मदद पहुंच सके। वहीं, लोगों को प्रदर्शनस्थल तक पहुंचने के लिए भी काफी ज्यादा पुलिस जवानों को तैनात किया गया है, लिहाजा अब प्रदर्शकारी अकेले होते जा रहे हैं।

तानाशाह हो रहे हैं जस्टिन ट्रूडो?

तानाशाह हो रहे हैं जस्टिन ट्रूडो?

कनाडा की राजधानी ओटावा में पिछले तीन हफ्तों से ट्रक ड्राइवर्स का प्रदर्शन चल रहा है और अब आंदोलन को बेरहमी से कुचलने की कोशिशें तेज हो गई हैं। वहीं, पहले से ही अल्पमत की सरकार के प्रधानमंत्री बने जस्टिन ट्रूडो की सत्ता पर भी अब खतरा मंडराने लगा है, लिहाजा देश के लोगों का लोकतांत्रिक हक कुचलने के लिए अब वो हर सीमा को पार कर रहे हैं। आश्चर्य की बात ये है, कि जो कनाडा तीन हफ्ते भी किसी आंदोलन को बर्दाश्त नहीं कर पाता है, उसे लोकतंत्र के इंडेक्स में छठवें स्थान पर रखा गया है, भारत जैसे देश, जहां किसी भी पार्टी की सरकार क्यों ना हो, पूरे साल आंदोलन चलते रहते हैं, वो लोकतांत्रिक इंडेक्स में काफी नीचे है और कनाडा जैसे देशों के प्रधानमंत्री अकसर भारत जैसे देशों को लोकतंत्र का ज्ञान देने की कोशिश करते हैं। असली आश्चर्य ये है।

जस्टिन ट्रूडो को राजनीतिक नुकसान

जस्टिन ट्रूडो को राजनीतिक नुकसान

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की सरकार अभी भी अल्पमत की सरकार है और देश की वामपंथी पार्टी के समर्थन की बदौलत जस्टिन ट्रूडो प्रधानमंत्री बने हुए हैं। वहीं, पिछले साल पूर्ण बहुमत के लिए समय से पहले जस्टिन ट्रूडो ने देश में लोकसभा चुनाव भी करवाया था, लेकिन पिछली बार की तुलना में भी कम सीटें मिली हैं, लिहाजा एक्सपर्ट्स का कहना है कि, इस आंदोलन ने जस्टिन ट्रूडो की राजनीति को काफी नुकसान पहुंच रहा है, लिहाजा वो किसी भी हाल में आंदोलन को खत्म करना चाहते हैं, भले उसके लिए उन्हें लोकतंत्र और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लात ही क्यों ना मारनी पड़े।

जस्टिन ट्रूडो के बहाने!

जस्टिन ट्रूडो के बहाने!

प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो आंदोलन के अस्तित्व पर सवाल उठाने के लिए कई 'बहाने' बना रहे हैं। पीएम ट्रूडो कह रहे हैं, कि नागरिकता पाने के लिए बाहरी लोग कनाडा की प्रतिष्ठा से खेल रहे हैं। वहीं, एक बयान में पीएम ट्रूडो ने अमेरिका के लोगों पर आंदोलन को हवा देने का आरोप लगा दिया, जिसके बाद अमेरिका की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया दी गई। वहीं, दो दिन पहले एक बयान में कनाडा सरकार के एक मंत्री ने कहा कि, डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक कनाडा की शांति को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं, यानि, कनाडा की सरकार आंदोलन को लेकर हर तरह के बहाने बना रही है। पीएम ट्रूडो ने आंदोलन को कुचलने के लिए देश में 'कनाडा इमरजेंसी एक्ट' भी लागू कर दिया है और इसके तहत आंदोलनकारियों पर कनाडा सरकार ने अब कहर गिराना शुरू कर दिया है।

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