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Canada PM In India: भारत-कनाडा के रिश्तों का रीसेट, डोभाल ने पर्दे के पीछे से लिखी कहानी- Explainer

Canada PM In India: पिछले एक साल में भारत-कनाडा संबंध जियो-पॉलिटिकल तनाव के बीच मिडिल पावर पार्टनरशिप (जहां दोनों पक्षों का फायदा हो) अब एक लंबी चर्चा का मुद्दा बन गया है। रिश्तों का ग्राफ एक पैटर्न में चलता रहा, जिसमें पहले राजनीतिक टकराव हुआ, फिर संस्थागत दूरी बढ़ी, उसके बाद बैक-चैनल सुरक्षा बातचीत से धीरे-धीरे मरम्मत शुरू हुई और अब ये वापस पटरी पर आ चुके हैं।

तनाव के बाद दोस्ती

मीडिया में भले ही रिश्ते अभी भी रिकवरी मोड में दिखें, लेकिन अंदरखाने एक बड़ा स्ट्रक्चरल रीसेट चल रहा है। दोनों देश सिर्फ डिप्लोमैटिक नॉर्मलसी बहाल नहीं कर रहे, बल्कि व्यापार, लॉन्ग-टर्म कैपिटल इन्वेस्टमेंट, एनर्रजी सिक्योरिटी, टेक्नोलॉजी सहयोग और स्ट्रक्चर्ड सिक्योरिटी कोऑर्डिनेशन पर आधारित एक ज्यादा संस्थागत और सुरक्षित पार्टनरशिप बना रहे हैं।

Canada PM In India

कैसे शुरू आई थी दरार?

रिश्तों में गिरावट अचानक नहीं आई। इसे कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो (Justin Trudeau) और तत्कालीन विदेश मंत्री (मिलानी जोली) Mélanie Joly की राजनीतिक-राजनयिक रणनीति ने तेज कर दिया। दरअसल कनाडा में कुछ प्रो-खालिस्तानी कट्टरपंथियों पर कनाडा में हमले हुए। जिसके आरोप जस्टिन कनाडा में तैनात भारतीय राजदूतों और भारत सरकार पर लगाए। अगर एक लाइन में कहें तो बैक-चैनल बातचीत से पहले इस मुद्दों को सार्वजनिक कर ट्रूडों ने

सालों के रिश्तों का मटियामेट कर दिया था।

नतीजतन, कनाडा में भारत के उच्चायुक्त समेत सीनियर डिप्लोमेट्स के लिए "Persona Non Grata" जारी कर दिया था। जिसके बाद उन सभी डिप्लोमेट्स को कनाडा छोड़ना पड़ा, जो हाल के दशकों में रिश्तों का सबसे निचला स्तर था। भारत ने भी ऐसी ही कनाडाई डिप्लोमेट के खिलाफ पर्सोना नॉन ग्राटा जारी कर दिया और उन्हें भारत से जाना पड़ा। ऐसे फैसलों ने सिर्फ राजनीति को नुकसान नहीं पहुंचाया बल्कि विदेश मंत्रालयों, खुफिया एजेंसियों और कानून प्रवर्तन संस्थाओं में लंबी गहरी खाई बना दी। इसलिए मौजूदा फोकस सिर्फ सुलह पर नहीं, बल्कि टिकाऊ संस्थागत सुरक्षा तंत्र बनाने पर है। असली नुकसान राजनीतिक से ज्यादा संस्थागत था।

2024 का राजनीतिक झटका

2023 के G20 शिखर सम्मेलन के दौरान कनाडाई प्रधानमंत्री की भारत यात्रा राजनीतिक तनाव के साये में हुई। यहां तक कि आपराधिक गतिविधियों को लेकर कनाडा के सार्वजनिक आरोपों से तत्काल राजनीतिक ठंडापन पैदा कर दिया था। लेकिन दिलचस्प बात ये रही कि आर्थिक रिश्ते टूटे नहीं। दोनों देशों ने एक दूसरे के यहां इन्फ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स, रिन्यूएबल एनर्जी और अर्बन डेवलपमेंट में अपना इन्वेस्टमेंट जारी रखा। वर्तमान में, भारत में केनेडियन इंस्टीट्यूशनल कैपिटल (अलग-अलग संस्थानों में किया गया निवेश) का अनुमान 70-80 अरब अमेरिकी डॉलर के बीच है।

भारत में कहां-कहां लगा है कनाडा का पैसा?

कनाडाई पेंशन फंड भारतीय राजमार्गों, लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर, रिन्युएवल एनर्जी प्लेटफॉर्म और कमर्शियल रियल एस्टेट में सबसे बड़े विदेशी निवेशकों में गिने जाते हैं। इससे साफ है कि लॉन्ग-टर्म कैपिटल, शॉर्ट-टर्म राजनीति से ज्यादा आर्थिक फंडामेंटल्स को फॉलो करती है।

कैसे चुपचाप हुआ रीसेट?

2025 में भारत के विदेश मंत्रालय और Global Affairs Canada के बीच दोबारा कूटनीतिक बातचीत शुरू हुई। इससे टेक्निकल-लेवल ट्रस्ट और कम्युनिकेशन चैनल फिर से एक्टिव हुए। कनाडा के कैननस्किस में आयोजित G7 आउटरीच मीटिंग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद पहुंचे और लीडरशिप-लेवल संवाद जारी रखा। इसके बाद जोहान्सबर्ग में G20 शिखर सम्मेलन के मौके पर हुई बातचीत ने दिखाया कि दोनों देश रिश्तों को फिर से दुरुस्त कर रहे हैं। ये बताता है कि रणनीति जरूरी होती है।

कनाडाई राज्यों से भी जारी रही बातचीत

ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के प्रीमियर डेविड एबी ने भारत की यात्रा की थी। जो बताता है कि प्रांतीय स्तर की बातचीत व्यापार, क्लीन टेक्नोलॉजी और डिजिटल इकॉनमी पार्टनरशिप कनाडा की केंद्र सरकार के तनाव से अलग ट्रैक पर चल रही थी।
इसके बाद कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद (Anita Anand) की यात्रा ने हाई-लेवल राजनीतिक जुड़ाव को फिर से गति दी। बातचीत का फोकस व्यापार, क्लाइमेट चेंज, एनर्जी सिक्योरिटी, साइंस पार्टनरशिप, कृषि और मोबिलिटी फ्रेमवर्क पर रहा। वहीं कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धु के भाषण के दौरान यात्रा ने सप्लाई चेन डाइवर्सिफिकेशन-खासकर क्रिटिकल मिनरल्स, क्लीन टेक और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग-पर कमिटमेंट दोहराया।

AI, शिक्षा और युवा कनेक्शन

भारत के AI शिखर सम्मेलन में कनाडा के AI मंत्री इवान सोलोमन की भागीदारी ने AI गवर्नेंस, स्टैंडर्ड-सेटिंग और एप्लाइड रिसर्च में सहयोग को लेकर बात की। इसके अलावा कनाडाई विश्वविद्यालयों के अध्यक्ष और सीनियर अकेडमिक डेलीगेशन भारत आए। हर साल 3 लाख (300,000) से ज्यादा भारतीय छात्र कनाडा में पढ़ते हैं और लगभग 8-10 अरब कैनेडियन डॉलर का आर्थिक योगदान देते हैं। शिक्षा दोनों देशों के रिश्तों का सबसे मजबूत स्तंभ बना हुआ है।

सबसे बड़ा गेमचेंजर?

एक व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के लिए टर्म्स रिफरेंस को अंतिम रूप देना एक बड़ा कदम हो सकता है। अभी द्विपक्षीय वस्तु व्यापार (Bilateral Trade In Goods) लगभग 8-9 अरब अमेरिकी डॉलर सालाना है, जो दोनों अर्थव्यवस्थाओं के हिसाब से कम है। इसीलिए, कनाडा द्वारा आयोजित G7 विदेश मंत्रियों के कार्यक्रम में विदेश मंत्री S. Jaishankar की भागीदारी ने रणनीतिक संवाद जारी रखने का संकेत दिया।

एनर्जी सेक्टर बना की-प्लेयर

2026 की शुरुआत तक रिश्ते डिप्लोमैटिक स्थिरता से आगे बढ़कर क्षेत्रीय रणनीतिक स्तर पर पहुंचे।जहां एनर्जी एक बड़ा मुद्दा बन गई। कनाडा के पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल भंडार माना जाता है, जिसकी क्षमता 165 अरब बैरल से ज्यादा। दूसरी तरफ, भारत अपनी कच्चे तेल की खपत का 85% से अधिक आयात करता है और 2040 तक बड़े ऊर्जा आयातकों में रहेगा। भारत की LNG मांग 2030 के दशक की शुरुआत तक 65 BCM से बढ़कर 110-120 BCM तक पहुंच सकती है।

कनाडा की पश्चिमी तट LNG एक्सपोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर इंडो-पैसिफिक की मांग के लिए तैयार है। यानी ऊर्जा सहयोग सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि लंबे समय तक की राजनीतिक स्थिरता और कैश फ्लो से जुड़ा रणनीतिक संतुलन है।

न्यूक्लियर पर क्या बात हुई?

भारत अपनी 7.5 GW की मौजूदा न्यूक्लियर कैपेसिटी से आगे बढ़ रहा है, खासकर SMR (Small Modular Reactor) टेक्नोलॉजी में। इससे यूरेनियम सहयोग और गहरा हो सकता है। कृषि व्यापार में कनाडा से भारत को दलहन निर्यात 600 मिलियन से 1 अरब अमेरिकी डॉलर सालाना के बीच रहता है।

फरवरी 2026 में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की कनाडा यात्रा के दौरान लॉ एन्फोर्समेंट कॉर्डिनेशन, इंटेल शेयरिंग और इन्फोर्मेशन ऑफीसर की तैनाती पर सहमति बनी। फोकस था-फेंटेनाइल प्रीकर्सर सप्लाई चेन (ड्रग्स रैकेट), संगठित अपराध, साइबर खतरे और वित्तीय धोखाधड़ी नेटवर्क को कमजोर करना।

क्या है Carney Principle?

प्रधानमंत्री मार्क कार्ने की भारत यात्रा को दोनों देशों में स्थिरता लाने और आगे बढ़ाने के रूप में देखा जा रहा है। उनका बातचीत करने का तरीका सीमित और रणनीतिक है, न कि दिखावे वाला या नाटकीय। कनाडा-अमेरिका संबंधों में अनिश्चितता बढ़ने के बीच ओटावा अपनी साझेदारियों को डाइवर्सिफाई करना चाहता है। इसलिए भारत जैसे बड़े देश के साथ जुड़ाव, उसकी जोखिम कम करने की रणनीति का हिस्सा है।

किसको ज्यादा फायदा?

भारत की अर्थव्यवस्था 4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के करीब है और इस दशक में 5 ट्रिलियन डॉलर पार करने का अनुमान है। कनाडा की अर्थव्यवस्था लगभग 2.1-2.2 ट्रिलियन डॉलर है। भारत से फार्मास्यूटिकल्स, डिजिटल सेवाएं, रिफाइंड पेट्रोलियम, इंजीनियरिंग गुड्स और स्पेशलिटी केमिकल्स; जबकि कनाडा से ऊर्जा संसाधन, पोटाश, दलहन, लकड़ी और एग्री-टेक-दोनों में साफ पूरकता है। एक मजबूत व्यापार ढांचा अगले दशक में व्यापार को दोगुना कर सकता है।

टेक्नोलॉजी सहयोग-क्रिटिकल मिनरल्स, एडवांस्ड मैटेरियल्स, एयरोस्पेस, AI-आधारित मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और क्लीन टेक-में तेजी आने की उम्मीद है। कनाडा में 18 लाख (1.8 मिलियन) से ज्यादा भारतीय मूल के लोग रहते हैं। वे व्यापार, शिक्षा, टेक स्टार्टअप्स और कैश फ्लो में स्थिरता का मजबूत स्तंभ हैं।

असली परीक्षा क्या होगी?

इस चरण की सफलता संयुक्त बयानों से नहीं, बल्कि ठोस नतीजों से तय की जाएगी:

• क्या CEPA समय से फ्रेमवर्क लेता है?
• क्या ऊर्जा सहयोग लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट में बदलता है?
• क्या सुरक्षा संवाद नियमित तौर पर होंगे है?
• क्या एम्बेसी और कॉन्सुलेट्स पूरी क्षमता से काम करते हैं?

भारत और कनाडा जियोग्राफिकल या सैन्य गठबंधनों से नहीं, बल्कि आर्थिक, एक दूसरे पर निर्भर होना और ग्लोबल हितों के सर्कुलेशन से जुड़े हैं। इतिहास बताता है कि सही ढंग से बनी साझेदारियां राजनीतिक उथल-पुथल से ज्यादा टिकाऊ होती हैं।

इस एक्सप्लेनर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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