कनाडा चुनाव: अबकी बार दक्षिण पंथी सरकार? आज डाले जाएंगे वोट, दांव पर प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की प्रतिष्ठा
कनाडा में प्रधानमंत्री ट्रूडो ने मध्यावधि चुनाव करवाने का फैसला किया, ताकि संसद में पूर्ण बहुमत की सरकार बना सकें, लेकिन चुनावी सर्वेक्षणों में पता चल रहा है कि उनका दांव उल्टा पड़ गया है।
ओटावा, सितंबर 20: कनाडा में मतदाता देश की 44वीं संसद का चुनाव करने के लिए सोमवार को मतदान करेंगे। कनाडा के लिबरल प्रधान मंत्री जस्टिन ट्रूडो के लिए बहुत कुछ दांव पर है, जिनकी लोकप्रियता में भारी गिरावट आई है, जिससे उन्हें कंजर्वेटिव नेता एरिन ओ'टोल ने बड़ी मुसीबत में डाल रखा है। चुनाव पूर्व तमाम सर्वे में कांटे की टक्कर दिखाया गया है और हर सर्वे में जस्टिन ट्रूडो की पार्टी को अपने प्रतिद्वंदी के मुकाबले पिछड़ता दिखाया गया है। लिहाजा ऐसे संभावना है कि इस बार कनाडा में दक्षिणपंथी पार्टी सत्ता में आ सकती है।

पीएम जस्टिन ट्रूडो की स्थिति
कनाडा सरकार के आंकड़ों के अनुसार, इस साल के आम चुनाव में 2 करोड़ 70 लाख से ज्यादा लोग चुनाव में हिस्सा लेने वाले हैं। जिनमें करीब 57 लाख लोग पहले ही मतपत्र से वोट डाल चुके हैं। चुनाव पूर्व सर्वेक्षण के अनुसार, न तो लिबरल्स और न ही दक्षिणपंथी पार्टियों के पास बहुमत के लिए आवश्यक 38% जनता का समर्थन हासिल होने की संभावना है। प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने पूर्ण बहुमत हासिल करने के लिए देश में समय पूर्व चुनाल कराने का ऐलान कर दिया था, लेकिन चुनावी सर्वेक्षणों में पाया गया है कि कोविड-19 संकट और अफगानिस्तान मुद्दे को लेकर जस्टिन ट्रूडो सरकार के प्रति लोगों की नाराजगी है। प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने अपनी ''वामपंथी-केन्द्र'' सरकार को पूर्ण बहुमत दिलाने के लिए 2 साल पहले ही चुनाव कराने का ऐलान कर दिया, लेकिन माना जा रहा है कि 2019 में हुए चुनाव से भी कम सीट जस्टिन ट्रूडो की पार्टी को मिल सकते हैं।

कनाडा चुनाव को जानिए
- देश भर में कई समय क्षेत्र होने के कारण पूरे कनाडा में मतदान केंद्र अलग-अलग समय पर खुलेंगे और बंद होंगे। अंतिम मतदान देश के पश्चिमी तट पर शाम 7 बजे (स्थानीय समयानुसार) बंद होगा।
- संघीय चुनाव अभियान ऐसे समय में आया है जब देश एक कोविड -19 महामारी से गुजर रहा है। इसके अलावा जलवायु संकट, स्वास्थ्य देखभाल, आवास और अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दे भी केंद्र में हैं। कनाडा में इस साल भीषण गर्मी पड़ी है, जिससे सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है। लिहाजा, कनाडा में जलवायु परिवर्तन का मुद्दा अचानक काफी तेजी से उभर आया है। कनाडा के समुद्र इस साल गर्मी में इतने गर्म हो चुके थे कि लाखों जलीय जीव की मौत हो गई।
- सोमवार के मतदान का परिणाम पूरी तरह से अप्रत्याशित होने की संभावना है। कनाडा के इतिहास में 1867 से मतदान हो रहा है और कनाडा में मुख्य तौर पर दो ही दल हैं, जिनके बीच कड़ा मुकाबला होता है। इस बार का चुनाव सबसे ज्यादा दिलचस्प इसलिए है, क्योंकि करीब 31 प्रतिशत मतदाताओं ने कहा है कि वो दोनों ही पार्टियों को वोट डालना चाहते हैं, लिहाजा ये मतदाता किस पार्टी को वोट करेंगे, कुछ कहा नहीं जा सकता है।

कौन जीतेगा कनाडा चुनाव?
कनाडा के चुनावी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ट्रूडो चुनाव जीत जाते हैं, तो सबसे ज्यादा संभावना इस बात की होगी कि उनकी सरकार अल्पमत सरकार होगी, जो उन्हें शासन करने के लिए अन्य दलों पर फिर से निर्भर कर देगी। ट्रूडो और ओ'टोल के अलावा, छोटे गुटों के अन्य नेताओं में वामपंथी न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी के जगमीत सिंह, अलगाववादी ब्लॉक क्यूबेकॉइस के यवेस-फ्रांकोइस ब्लैंचेट और ग्रीन के एनामी पॉल शामिल हैं। अंतिम परिणाम में देरी होने की उम्मीद है क्योंकि मेल-इन मतपत्रों की संख्या हजारों की संख्या में होने की उम्मीद है, जिनकी गणना की जाएगी। सैंतालीस वर्षीय ओ'टोल एक सैन्य दिग्गज और पूर्व वकील हैं। उन्होंने नौ साल तक संसद सदस्य के रूप में कार्य किया।

जस्टिन ट्रूडो ने जुआ खेला?
कनाडा के चुनावी दिग्गजों का मानना है कि समय से 2 साल पहले ही चुनाव कराने का ऐलान कर प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने अपनी राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा जुआ खेला है। ट्रूडो का सोचना था कि उन्होंने कनाडा के लोग महामारी से निपटने और वैक्सीन को सुचारू रूप से चलाने के लिए उन्हें एक मजबूत बहुमत के साथ ओटावा लौटाकर पुरस्कृत करेंगे, जो उन्हें विपक्षी समर्थन के बिना अपना एजेंडा पारित करने की अनुमति देगा। लेकिन, परिणाम जो भी हो, चुनाव लगभग निश्चित रूप से ट्रूडो के लिए एक विफलता माना जाएगा, क्योंकि ये चुनाव उनकी राजनीतिक स्थिति को काफी कमजोर करने वाला है।












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