Canada Election 2025: कैसे चुना जाता है कनाडा का प्रधानमंत्री? आसानी से समझें फेडेरल स्ट्रक्चर
Canada Election 2025: कनाडा में 28 अप्रैल को प्रधानमंत्री पद के लिए वोटिंग हो रही है। यह चुनाव जनवरी में लिबरल पार्टी के नेता के रूप में पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के इस्तीफे के बाद लंबी राजनीतिक अनिश्चितता के बाद हो रहा है। दरअसल ट्रूडो के इस्तीफे के बाद कई कनाडाई नेताओं ने चुनाव करानी की मांग की थी, जिसके बाद सोमवार को वोटिंग कराई जा रही है। इस चुनाव से देश के सामने मौजूद आंतरिक और बाहरी दोनों तरह की चुनौतियों का समाधान होने की उम्मीद है। कनाडा का ये चुनाव दुनिया के नक्शे पर कनाडा का भविष्य तय करेगा।
हर पांच साल में होते हैं चुनाव
कनाडा में हर पांच साल में चुनाव होते हैं, इस लिहाज से 20 अक्टूबर 2025 के लिए चुनाव की तारीख तय की गई थी। हालांकि, राजनीतिक तापमान बदल गया है, जिससे 6 महीने पहले ही चुनाव कराने की नौबत आ गई है। कनाडाई लोकतंत्र में यह फैसला तब होता है जब या तो गवर्नर जनरल ने प्रधानमंत्री की सलाह पर संसद को भंग कर दिया हो या फिर संसद में सत्ताधारी दल बहुमत साबित ना कर सका हो। जिसमें कार्यकारी प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने संसद को भंग करवाने के विकल्प को प्राथमिकता देते हुए लोकतंत्र को मजबूत किया है। कनाडा के लोग अचानक हुए इन चुनावों की तैयारियां लंब अरसे से कर रहे थे, वे उम्मीदवारों के मंचों से भी जुड़ रहे थे और देश के भविष्य के लिए उनके नजरिए को भी परख रहे थे। लिहाजा बेवक्त हुए इस चुनाव में जनता की भागीदारी सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है।

सर्वे में किसके सिर सजेगा ताज?
एक और पार्टी है, ग्रीन पार्टी जो पिछले चुनाव में सिर्फ़ दो सीटें ही जीत पाई थी। चुनाव को लेकर हुए सर्वे में, कंज़र्वेटिव पार्टी को संभावित बढ़त मिल सकती है। हालाँकि, ट्रूडो के इस्तीफ़े के बाद, इन सर्वेक्षणों में लिबरल और कंज़र्वेटिव दोनों बराबरी पर दिख रहे हैं। हांलांकि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा कनाडा पर दिए गए बयानों और टैरिफ को लेकर लिए गए फैसलों के बाद राजनीति में काफी उठापटक देखने को मिलती है। जिसमें बढ़ते हुए कंजर्वेटिव्स पर ट्रंप के बयानों ने एक तरह से रोक लगाने का काम किया था।
भारत जैसा ही है कनाडा का चुनाव
कनाडा का संघीय ढांचा भी भारत से काफी मिलता-जुलता है। यहां भी लोग सीधे प्रधानमंत्री के लिए वोट नहीं देते हैं। इसके बजाय, वे संसद के सदस्यों का चुनाव करते हैं। इसका मतलब है कि कार्नी, विपक्ष के नेता पियरे पोलीवरे और न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता जगमीत सिंह जैसे व्यक्तियों को अपने पदों को सुरक्षित करने के लिए चुनाव लड़कर अपनी पार्टी के लिए केंद्रीय स्तर पर सांसदों का बहुमत जुटाना होगा।
चार दलों में होगी टक्कर
इस बार कनाडा के चुनाव में चार प्रमुख राजनीतिक दल भाग लेने वाले हैं। इनमें लिबरल, कंजर्वेटिव, जगमीत सिंह की न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (NDP) और फ्रेंच बोलने वालों को प्राथमिकता देने वाली ब्लॉक क्यूबेकॉइस शामिल हैं। लिबरल पार्टी 2015 से सत्ता में है जब जस्टिन ट्रूडो प्रधानमंत्री चुने गए थे। संसद भंग होने पर लिबरल पार्टी के पास 153 सीटें थीं। इस बीच, कंजर्वेटिव पार्टी 120 सीटों के साथ मुख्य विपक्षी दल के रूप में काम कर रही थी। ब्लॉक क्यूबेकॉइस ने 33 सीटें हासिल की थीं, जिससे वह संसद में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई। एनडीपी 24 सीटों के साथ चौथे स्थान पर रही।
भारत और ब्रिटेन से मिलती जुलती है कनाडा की डेमोक्रेसी
जैसे भारत में लोकसभा की 543 सीटें हैं, वैसे ही कनाडा में 343 सीटें हैं, जिन्हें निर्वाचन क्षेत्र कहा जाता है। हर एक जिला हाउस ऑफ कॉमन्स के लिए एक सांसद का चुनाव करता है। निचले सदन में इन सीटों के लिए चुनाव आयोजित किए जाते हैं, जबकि ऊपरी सदन में (जैसे भारत में राज्यसभा) सीनेट के सदस्यों को नियुक्त किया जाता है और वे चुनाव में भाग नहीं लेते हैं।
क्या है कनाडा में चुनाव का तरीका?
कनाडा में ब्रिटेन की तरह ही "फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट" वोटिंग प्रक्रिया अपनाई जाती है। इस प्रक्रिया में, जो उम्मीदवार अपने जिले में सबसे अधिक वोट प्राप्त करता है, वह जीत जाता है और संसद सदस्य (मेंबर ऑफ पार्लियामेंट) बन जाता है।
कैसे बनती है सरकार?
सबसे ज़्यादा सीटें पाने वाली पार्टी का नेता आम तौर पर सरकार बनाने का प्रस्ताव पेश करता है। दूसरी सबसे ज़्यादा सीटें पाने वाली पार्टी मुख्य विपक्ष की भूमिका निभाती है। अगर किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिलता है, तो इसका नतीजा संसद में अस्थिरता या अल्पमत वाली सरकार के रूप में सामने आता है। ऐसे में यहां भी भारत की तरह दूसरे दल जो तीसरी-चौथे या और पीछे रहे हों उनका समर्थन लेना होता है। यहां भी गठबंधन से सरकार बनानी की संस्कृति है।
आकड़े से समझें ट्रूडो का गिरता ग्राफ
2025 की शुरुआत में, जस्टिन ट्रूडो ने अपनी पार्टी के बढ़ते दबाव के बीच प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इस बात की चिंता बढ़ गई कि उनकी घटती लोकप्रियता आगामी चुनावों में लिबरल्स को झटका दे सकती है। कनाडाई ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन के नेशनल पोलिंग एवरेज ने 2023 और 2024 के दौरान लिबरल समर्थन में लगातार गिरावट का संकेत दिया, जबकि कंजर्वेटिव समर्थन में बढ़ोतरी हुई। 20 जनवरी, 2025 को जब डोनाल्ड ट्रम्प ने फिर से अमेरिकी राष्ट्रपति पद संभाला, तो कंजर्वेटिव समर्थन 44.8% पर पहुंच गया, जबकि लिबरल 21.9% पर पिछड़ गए। हालाँकि, हाल के सर्वेक्षणों में बदलाव देखने को मिला है, अब लिबरल समर्थन 40% से थोड़ा ज़्यादा है और कंजर्वेटिव 40% से थोड़ा कम है। यह तीन साल में पहली बार है जब लिबरल ने सर्वेक्षणों में बढ़त हासिल की है।
ये हैं पीएम पद के उम्मीदवार
-मार्क कार्नी
60 वर्षीय मार्क कार्नी वर्तमान में कनाडा के प्रधानमंत्री के रूप में कार्यरत हैं। अपनी हाल ही में प्रधानमंत्री बनने के बावजूद, वे जल्दी ही एक बड़ा चेहरा बन गए हैं। जब उन्हें लिबरल पार्टी के नेता के रूप में चुना गया, तो उन्हें पार्टी के सदस्यों से 85% वोट मिले, जो कि काफी बड़ा नंबर है। वित्तीय मामलों में अपनी विशेषज्ञता के कारण कार्नी कनाडा और ब्रिटेन दोनों में चर्चित हैं। कार्नी फाइनेंशियल मामलों के एक्सपर्ट्स हैं और बैंक ऑफ़ कनाडा और बैंक ऑफ़ इंग्लैंड के चीफ रह चुके हैं।
-पियरे पोलीवियरे
45 साल के पियरे पोलीवियरे, कंजर्वेटिव पार्टी का नेतृत्व करते हैं। वे कैलगरी, अल्बर्टा से आते हैं जो, दो दशकों से कनाडाई राजनीति में एक्टिव हैं। वे सिर्फ 25 साल की उम्र में सांसद बन गए, जिससे वे उस समय के सबसे युवा सांसद बन गए थे। पोलीवियरे टैक्स को कम करने और छोटे सरकारी ढांचों को बढ़ावा देने की वकालत करते हैं।
-जगमीत सिंह
46 वर्षीय जगमीत सिंह एनडीपी (न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी) के प्रमुख हैं और मजदूरों के अधिकारों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। उनकी पार्टी को सिखों का बड़े स्तर पर समर्थन हासिल है और वे खुद को मजदूरों के रहनुमा के रूप में पेश करते रहे हैं। 2017 में, उन्होंने एक प्रमुख कनाडाई राजनीतिक दल का नेतृत्व करने वाले अल्पसंख्यक और सिख तबके से आने वाले पहले नेता बनकर इतिहास रच दिया। 2019 में सांसद के रूप में चुने गए सिंह की एनडीपी ने 2021 से ट्रूडो की लिबरल पार्टी का समर्थन किया है। हालांकि जगमीत सिंह का पीएम बनना भारत के लिए ठीक नहीं होगा, क्योंकि जगमीत खालिस्तानी विचारधारा वाले लोगों के साथ खड़े दिखते हैं।
-फ्रेंच बोलने वालों की पार्टी 'ब्लॉक क्यूबेकॉइस'
ब्लॉक क्यूबेकॉइस पार्टी मुख्य रूप से फ्रेंच भाषी क्षेत्रों में चुनाव लड़ती है। हालाँकि इसके नेता के प्रधानमंत्री बनने की संभावना नहीं है, लेकिन पार्टी चुनावों के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अगर किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिलता है, तो ब्लॉक क्यूबेकॉइस किंगमेकर की भूमिका में आ सकती है। ब्लैंचेट ने 2019 से इस पार्टी का नेतृत्व किया है और इसका प्रदर्शन संतोषजनक रहा है।
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