पाकिस्तान के हिंदुओं को मिलने लगी CAA कानून के तहत नागरिकता, अहमदाबाद में 18 लोग बने भारतीय
Pakistani Hindu Gets CAA Citizenship: मोदी सरकार के नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) कानून लागू करने के बाद अब इसके नतीजे दिखाई देने लगे हैं और गुजरात के अहमदाबाद में रहने वाले पाकिस्तान के 18 हिंदू शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता प्रदान की गई।
भारत की नागरिकता संबंधी ये दस्तावेज, उन्हें शरणार्थी शिविर में एक कार्यक्रम के दौरान दिए गए हैं, जिसमें गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष सांघवी भी मौजूद थे। शनिवार को जिला कलक्टर कार्यालय में शिविर का आयोजन किया गया था।

18 पाकिस्तानी हिंदुओं को मिली नागरिकता
सांघवी ने कहा, "उम्मीद है कि आप सभी देश की विकास यात्रा में भाग लेने के लिए दृढ़ संकल्पित होंगे।" उन्होंने कहा, कि केंद्र और राज्य सरकारें भारतीय नागरिकता प्राप्त करने वाले सभी लोगों को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
सरकार की तरफ से जारी गैजेट नोटिफिकेशन के मुताबिक, 2016 और 2018 की राजपत्र अधिसूचनाओं ने गुजरात में अहमदाबाद, गांधीनगर और कच्छ के जिला कलेक्टरों को पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का अधिकार दिया है। इसके साथ, अहमदाबाद जिले में रहने वाले पाकिस्तान के कुल 1,167 हिंदू शरणार्थियों को अब तक भारतीय नागरिकता प्रदान की जा चुकी है, लेकिन CAA के तहत पहली बार नागरिकता दी गई है।
भारत में CAA कानून लागू होने का असर
11 मार्च को केंद्र सरकार ने नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 को लागू करने की घोषणा कर दी थी, जिससे पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से गैर-दस्तावेज गैर-मुस्लिम प्रवासियों के लिए नागरिकता का मार्ग प्रशस्त हो गया। इसके साथ, सरकार का लक्ष्य तीन देशों के सताए हुए गैर-मुस्लिम प्रवासियों - हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई - को भारतीय राष्ट्रीयता प्रदान करना शुरू करना है।
इस बीच, अमेरिका और दुनिया के अन्य हिस्सों से नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) की आलोचना के बीच, भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, कि इसे विभाजन के संदर्भ में रखना महत्वपूर्ण है, और उन्होंने कई देशों का उदाहरण देते हुए कहा, कि कई देशों में इस आधार पर नागरिकता देने के लिए फास्ट-ट्रैक नागरिकता कानून है।
अमेरिका ने गुरुवार को कहा कि वह भारत में सीएए की अधिसूचना को लेकर चिंतित है और इसके कार्यान्वयन पर करीब से नजर रख रहा है। हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय ने अमेरिका को करारा जवाब देते हुए इसे भारत का अंदरूनी मामला बताया है।












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