ब्रिटेन और चीन के बीच बढ़ा तनाव, जॉनसन सरकार ने एक बड़े समझौते को तोड़ा
लंदन। ब्रिटेन ने हांगकांग के साथ प्रत्यपर्ण संधि खत्म कर दी है। प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की तरफ से यह कदम चीन की तरफ से लागू सुरक्षा कानून के मद्देनजर उठाया गया है। अब इस फैसले के बाद हांगकांग को ब्रिटेन से हथियार नहीं मिल सकेंगे। ब्रिटिश विदेश मंत्री डॉमनिक रॉब की तरफ से इस बात का ऐलान किया गया है। माना जा रहा है कि चीन ब्रिटेन के इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया देगा।

चीन पर मानवाधिकार हनन का आरोप
ब्रिटेन और चीन के बीच भी अब तनाव बढ़ने लगा है। ब्रिटिश विदेश मंत्री डॉमनिक रॉब ने हाउस ऑफ कॉमन्स को बताया कि वह हांगकांग में आए चीनी सुरक्षा कानून को लेकर खासे परेशान थे। उन्होंने चीन पर मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप भी लगाया है। उनका कहना था कि चीन की अथॉरिटीज उइगर समुदाय के खिलाफ मानवाधिकार उल्लंघनों में शामिल हैं। रॉब ने सोमवार को सरकार के इस फैसले को तार्किक और उचित करार दिया है। रॉब के शब्दों में, 'हम अपने मूल हितों की सुरक्षा करेंगे। हम हमेशा अपने आदर्शों को मानेंगे और चीन को अंतरराष्ट्रीय बाध्यताओं के लिए जिम्मेदार ठहराएंगे।'
चीन ने तोड़ा अपना वादा
ब्रिटेन से पहले अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने भी हांगकांग के साथ प्रत्यर्पण समझौतों को खत्म कर दिया है। सन् 1997 में ब्रिटेन ने हांगकांग को चीन को वापस सौंपा था और इसके बाद यह का विशेष प्रशासित क्षेत्र बन गया था। पिछले कुछ दिनों से हांगकांग में जो भी घटनाक्रम हो रहे हैं उन्हें लेकर ब्रिटेन की सरकार काफी संवेदनशील है। ब्रिटिश सरकार का कहना है कि चीन 'वन कंट्री, टू सिस्टम्स' पर रजामंद हुआ था। इस नीति का मकसद हांगकांग के आर्थिक और सामाजिक हितों को अगले 50 सालों तक सुरक्षित करना था। ब्रिटेन और बाकी पश्चिमी देशों का मानना है कि हांगकांग पर लगाया गया यह कानून उस समझौते पर खतरा है क्योंकि इससे अभिव्यक्ति की आजादी और न्यायिक स्वतंत्रता पर असर पड़ेगा।












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