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तो क्या 'जाति' की वजह से ऋषि PM नहीं बन पाएंगे! लिज से क्यों पिछड़ रहे हैं सुनक?

लिज ट्रस पीएम की रेस में आगे निकलती जा रही हैं। वहीं ऋषि सुनक पिछड़ गए हैं। क्या इन सबकी वजह उनकी जाति है। एक जातीय अल्पसंख्यक होने के कारण वह सर्वे में पीछे चल रहे हैं?

लंदन, 9 अगस्त : ब्रिटेन में टोरी का कमान कौन संभालेगा, यह आने वाले 5 सितंबर को लोगों को मालूम चल जाएगा। अभी फिलहाल कंजर्वेटिव पार्टी के दो कद्दावर नेता लिज ट्रस और ऋषि सुनक के बीच कांटे की टक्कर जारी है। वहीं, शुरूआती दिनों में लिज ट्रस से आगे रहने वाले ऋषि सुनक एकाएक उनसे क्यों पिछड़ते चले जा रहे हैं। क्या है इसकी वजह, यही जानने की कोशिश करते हैं।

कौन बनेगा टोरी का नेता

कौन बनेगा टोरी का नेता

दूसरे चरण में पार्टी के सदस्यों की ही भूमिका है। कंजर्वेटिव पार्टी के 1.8 लाख सदस्य पोस्टल वोट के जरिए इन उम्मीदवारों में एक को अपना नेता चुनेंगे। दोनों उम्मीदवारों में जिन्हें सबसे ज्यादा वोट मिलेंगे, वह पार्टी का नेता और अगला पीएम बनेगा। हालांकि, वोटिंग से पहले तमाम सर्वे सामने आए हैं, इनमें ऋषि सुनक पिछड़ते नजर आ रहे हैं। हाल ही में हुए एक सर्व में विदेश सचिव लिज ट्रस से 34 पॉइंट पिछड़ते नजर आए। YouGov द्वारा किए गए सर्वे में करीब 60 प्रतिशत लोगों ने ब्रिटेन के नए पीएम के तौर पर लिज ट्रस को अपनी पसंद बताया है। YouGov के सर्वे में लिज ट्रस को 60 फीसदी वोट मिले हैं। जबकि ऋषि सुनक के पक्ष में सिर्फ 26 प्रतिशत वोट पड़े। यानी वे इस सर्वे में 34 पॉइंट पीछे नजर आ रहे हैं।

कौन होगा जॉनसन का उत्तराधिकारी

कौन होगा जॉनसन का उत्तराधिकारी

ब्रिटेन में बोरिस जॉनसन ने पीएम पद से इस्तीफा दे दिया था। अभी ब्रिटेन में कंजर्वेटिव पार्टी की सरकार है। 5 सितंबर को ब्रिटेन में नए पीएम और कंजर्वेटिव पार्टी के नेता का ऐलान होगा। बता दें कि, ब्रिटेन में कंजर्वेटिव पार्टी के नेता का चुनाव दो चरणों में होता है। पहले चरण में पार्टी के सांसद वोट देते हैं। वोटिंग की प्रक्रिया तब तक चलती रहती है, जब तक दो उम्मीदवार न रह जाएं। इस बार 5 चरणों में वोटिंग हुई है। इसके बाद दो उम्मीदवार ऋषि सुनक और लिज ट्रस आखिरी रेस में रह गए हैं. खास बात ये है कि इन सभी 5 चरणों में ऋषि सुनक सांसदों की पहली पसंद रहे। अब यह चरण पूरा हो चुका है। अब लिज और ऋषि दोनों उम्मीदवार देशभर में रैलियां कर पार्टी के सदस्यों से वोट मांग रहे हैं।

कैसे होता है नेता का चुनाव

कैसे होता है नेता का चुनाव

दरअसल, दूसरे चरण में पार्टी के सदस्यों की ही भूमिका है। कंजर्वेटिव पार्टी के 1.8 लाख सदस्य पोस्टल वोट के जरिए इन उम्मीदवारों में एक को अपना नेता चुनेंगे। दोनों उम्मीदवारों में जिन्हें सबसे ज्यादा वोट मिलेंगे, वह पार्टी का नेता और अगला पीएम बनेगा। हालांकि, वोटिंग से पहले तमाम सर्वे सामने आए हैं, इनमें ऋषि सुनक पिछड़ते नजर आ रहे हैं।

ऋषि लोकप्रिय नेता हैं, फिर भी पिछड़ रहे हैं

ऋषि लोकप्रिय नेता हैं, फिर भी पिछड़ रहे हैं

सोचने वाली बात है कि ऋषि सुनक कोरोना लॉकडाउन के समय से काफी लोकप्रिय नेता रहे हैं। उनकी श्रमिकों को लेकर नीतियों की चर्चा सभी लोग करते हैं। वे काफी उदार व्यक्ति भी माने जाते हैं। इसलिए लंदन में लाखों लोग उन्हें पसंद भी करते हैं। हालांकि, इन सबके बावजूद पीएम चुनने के वक्त लोग लिज ट्रस को अपना पसंदीदा उम्मीदवार बता रहे हैं। सर्वेक्षण से पता चलता है कि, लोग जीवन यापन की लागत, एनएचएस, शरण, आवास और रक्षा जैसे मुख्य मुद्दों पर बड़े अंतर से लिज ट्रस को पसंद करते हैं।

बोरिस जॉनसन के पद छोड़ने के पीछे सुनक का हाथ?

बोरिस जॉनसन के पद छोड़ने के पीछे सुनक का हाथ?

कई लोग ब्रिटेन में बोरिस जॉनसन के पीएम पद से इस्तीफे की वजह ऋषि सुनक को मानते हैं। उन्हें लगता है कि सुनक ने पीठ पीछे छुरा घोंपा है। लोगों को लगता है कि उन्होंने चांसलर की पद से इस्तीफा देकर पीएम जॉनसन के साथ विश्वासघात किया।

क्या अल्पसंख्यक होना हार की बड़ी वजह बनेगी

क्या अल्पसंख्यक होना हार की बड़ी वजह बनेगी

चुनाव के वक्त कंजर्वेटिव पार्टी के कई सांसदों ने लिज ट्रस को अपना समर्थन दे दिया। ऐसा हो सकता है कि वे पूर्वाग्रह से ग्रसित रहे हों। ऋषि सुनक एक जातीय अल्पसंख्यक पृष्ठभूमि से आते हैं। ब्रिटेन एक ऐसा देश है जहां समानता की बात की जाती है और ऐसे देश के लिए इन प्रश्नों को कतई नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बेहतर समानता के लिए दोनों पक्षों को एक ही नजर से देखा जाना चाहिए। अगर आप जातीय समानता की बात करते हैं तो बिना किसी भेदभाव के सभी को समान दर्जा दिया जाना चाहिए।

सोचने का विषय है

सोचने का विषय है

डेविड कैमरन जब कंजर्वेटिव पार्टी के नेता थे, उस वक्त उन्होंने जातीय अल्पसंख्यकों को संसदीय दल में शामिल करने के दिशा में बड़ा काम किया था। उन्होंने अपने कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण नियुक्तियां कीं। इस वजह से सीधे तौर पर कोई भी कंजर्वेटिव पार्टी पर दोष नहीं लगा सकता है। लेकिन पार्टी के सदस्यों के बारे में उनकी सोच के बारे में कुछ भी कहना असंभव है। बस सवाल है कि क्या पार्टी के कुछ सदस्य पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर किसी खास पद के लिए ऋषि सुनकी जगह लिज को देखना पसंद करते हो। यदि ब्रिटेन में पीएम का चुनाव पार्टी चुनावों के माध्यम से होता है, तो ऐसे गंभीर विषयों पर विचार अवश्य किया जाना चाहिए। वैसे ऋषि सुनक हमेशा से लोगों की पहली पसंद रहे हैं, लेकिन उनका पीएम की रेस में इस तरह से पिछड़ना कई सवाल खड़े करते हैं।

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