बांग्लादेश के खिलाड़ी भी IPL में बैन? ऑक्शन में पुकारा तक नहीं गया नाम, हिंदुओं से हो रही हिंसा का बदला?
Bangladesh's IPL 2025: आईपीएल 2025 की मेगा नीलामी में विवाद छिड़ गया है, क्योंकि जेद्दा में दो दिनों तक चले ऑक्शन में एक भी बांग्लादेशी क्रिकेटर को खरीदने के लिए किसी भी टीम की तरफ से बोली नहीं लगाई गई थी। जिससे बांग्लादेश में प्रशंसक और क्रिकेट प्रेमी निराश हो गए।
शाकिब अल हसन, मुस्तफिजुर रहमान, मेहदी हसन मिराज और लिटन दास जैसे प्रमुख खिलाड़ी, नीलामी सूची का हिस्सा होने के बावजूद भी अनसोल्ड रह गए। जिसके बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के खिलाफ पक्षपात के आरोपों के साथ आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू कर दिया है।

आईपीएल 2025 नीलामी में बांग्लादेशी खिलाड़ियों की लिस्ट
1. मुस्तफिजुर रहमान- 2 करोड़ रुपये
2. मेहदी हसन मिराज - 1 करोड़ रुपये
3. शाकिब अल हसन- 1 करोड़ रुपये
4. तस्कीन अहमद- 1 करोड़ रुपये
5. रिशद हुसैन- 75 लाख रुपये
6. लिटन दास- 75 लाख रुपये
7. तौहीद हृदयोय - 75 लाख रुपये
8. शौरीफुल इस्लाम- 75 लाख रुपये
9. तंजीम हसन साकिब- 75 लाख रुपये
10. मेहदी हसन- 75 लाख रुपये
11. हसन महमूद- 75 लाख रुपये
12. नाहिद राणा- 75 लाख रुपये
इस अनदेखी के बाद बांग्लादेश में तरह तरह की अटकलें लगाई जाने लगी हैं, कुछ लोगों ने बीसीसीआई पर आरोप लगाया है, कि उसने आईपीएल फ्रैंचाइजी को बांग्लादेशी खिलाड़ियों से दूर रहने का निर्देश दिया था। एक क्रिकेट प्रेमी डॉ. मारूफ ने ट्वीट किया, "आईपीएल 2025 में कोई बांग्लादेशी खिलाड़ी नहीं!! अजीब बात है!!" एक अन्य यूजर अनिल ने व्यंग्यात्मक टिप्पणी की, "वे पहले ही पाकिस्तान को बेच चुके हैं।"
आईपीएल ऑक्शन उस वक्त हुआ है, जब बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ लगातार बेलगाम हिंसा की जा रही है और एक दिन पहले ही चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी, जिन्हें कृष्ण प्रभु दास के नाम से भी जाना जाता है और जो ISKCON बांग्लादेश के पुजारी हैं, उन्हें राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी, हिंदुओं के खिलाफ होने वाली हिंसा को रोकने के लिए लगातार आवाज उठा रहे थे।
तो क्या बांग्लादेशी क्रिकेटर्स को जान-बूझकर अनदेखा किया गया है, क्योंकि ऑक्शन के बाद उनकी बोली तक नहीं लगाई गई।
शाकिब अल हसन जैसे क्रिकेटर, जो पहले आईपीएल में बांग्लादेश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं, उन्हें इस बार खरीदार नहीं मिल पाए, जिससे निराशा और बढ़ गई। हालांकि, कई प्रशंसकों का कहना है, कि बांग्लादेशी क्रिकेटर्स ने पिछले दिनों काफी खराब खेल दिखाया है और ना बिकने की वजह उनका प्रदर्शन है, ना की बांग्लादेश की मौजूदा हालात से कोई लेना देना है।
बांग्लादेश ने पिछले दिनों जब भारत के साथ तीन टी-20 मैच खेले थे, उस दौरान उनका काफी खराब प्रदर्शन रहा था और ना ही बल्लेबाज अपना कोई प्रभाव छोड़ पाए थे और ना ही गेंदबाज।
बांग्लादेश में हिंदुओं पर लगातार हो रहे हैं हमले
विवाद को और हवा देने वाली बात यह है कि ढाका में हिंदू नेता चिन्मय कृष्ण दास प्रभु की हाल ही में हुई गिरफ़्तारी ने बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रहे व्यवहार को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। पिछले कुछ सालों में बांग्लादेश में हिंदू समुदाय को हमलों, उनकी संपत्ति के विनाश और व्यवस्थागत भेदभाव का सामना करना पड़ा है, जिससे अशांति बढ़ रही है।
भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। कई लोग आईपीएल फ्रैंचाइजी से अल्पसंख्यकों पर हमलों में कथित मिलीभगत के कारण बांग्लादेशी खिलाड़ियों का बहिष्कार करने का आग्रह कर रहे हैं। एक यूजर ने कहा, "अगर आतंकवाद के कारण पाकिस्तान को आईपीएल से बाहर रखा जाता है, तो बांग्लादेश को हिंदुओं पर अत्याचार करने के लिए इसी तरह के परिणाम भुगतने चाहिए।"
बांग्लादेशी खिलाड़ियों को बाहर रखने से खेल और राजनीति के बीच के संबंध की ओर ध्यान खिंचा है। आईपीएल ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए पाकिस्तानी खिलाड़ियों को बाहर रखा है, लेकिन यह घटना इस बात पर प्रकाश डालती है, कि किस तरह व्यापक सामाजिक-राजनीतिक मुद्दे खिलाड़ियों के चयन को प्रभावित कर सकते हैं।












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