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Bangladesh Hindu attack: 150 देशों में प्रदर्शन करेगा ISKCON,शेख हसीना सरकार को UN ने दी हिदायत

कोलकाता, 19 अक्टूबर: बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रही सांप्रदायिक हिंसा के विरोध में प्रदर्शनों का दौर बढ़ गया है। आने वाले 23 अक्टूबर को इस्कॉन करीब 150 देशों में प्रदर्शन और पीड़ितों के लिए प्रार्थना सभाएं आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। इस बीच यूएन ने वहां हिंदुओं पर हो रहे हमले को संज्ञान में लिया है और शेख हसीना सरकार से कहा है कि वह संविधान का पालन सुनिश्चित करवाए और सांप्रदायिक सौहार्द कायम करने के लिए कदम उठाए। बता दें कि वहां दुर्गा पूजा से ही हिंदू समुदाय को टारगेट किया जा रहा है, उनके घर और संपत्तियां जलाए जा रहे हैं।

हिंदुओं पर हमले के खिलाफ में हो रहे हैं विरोध-प्रदर्शन

हिंदुओं पर हमले के खिलाफ में हो रहे हैं विरोध-प्रदर्शन

बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ जारी धार्मिक हिंसा के खिलाफ विरोध बढ़ता जा रहा है। दुर्गा पूजा के समय से ही कट्टरपंथी ताकतें वहां अल्पसंख्यक हिंदुओं को निशाना बना रहे हैं, जिसमें कम से कम 6 लोगों की मौत हो चुकी है और काफी बड़ी तादाद में लोग जख्मी हुए हैं। इस हिंसा के खिलाफ राजधानी ढाका में भी जोरदार प्रदर्शन हो रहे हैं। कट्टरपंथी ताकतों ने बांग्लादेश में न सिर्फ हिंदू मंदिरों को निशाना बनाया है, बल्कि उनके घरों और संपत्तियों को भी जलाना शुरू कर दिया है। यह हिंसा एक कथित सोशल मीडिया पोस्ट पर 15 अक्टूबर को नोआखाली जिले से भड़की है, जो हिंदुओं को टारगेट करने के लिए आजादी के समय से ही कुख्यात माना जाता रहा है।

यूएन ने शेख हसीना सरकार से निष्पक्ष जांच और हिंसा रोकने को कहा

यूएन ने शेख हसीना सरकार से निष्पक्ष जांच और हिंसा रोकने को कहा

ऐसे मामलों में फौरन कूद पड़ने वाला संयुक्त राष्ट्र भी देर से ही सही जागते हुए बांग्लादेश की शेख हसीना सरकार को वहां के संविधान की दुहाई देते हुए हिंसा की इन घटनाओं की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने को कहा है। बांग्लादेश में यूएन के रेसिडेंट कोकॉर्डिनेटर मिया सेप्पो ने सोमवार को कहा, 'बांग्लादेश में हिंदुओं पर हालिया हमले, सोशल मीडिया पर हेट स्पीच से प्रेरित, संविधान के मूल्यों के खिलाफ हैं और इसे रोकने की जरूरत है। हम सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने का आह्वान करते हैं। हम सभी से समावेशी सहिष्णु बांग्लादेश को मजबूत करने के लिए एकजुट होने का आह्वान करते हैं।'

दुर्गा पूजा के समय से शुरू हुई हिंसा

दुर्गा पूजा के समय से शुरू हुई हिंसा

बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ जिस तरह से हिंसा हुई है, उसने अब धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचना शुरू किया है। जानकारी के मुताबिक इस्कॉन के लोगों के अलावा समुदाय के बाकी नेताओं ने सोमवार को ढाका स्थित भारतीय मिशन के उच्चायुक्त विक्रम दोरईस्वामी से मुलाकात की है। यहां हिंदुओं के खिलाफ यह हिंसा दुर्गा पूजा के समय से ही चल रही है, लेकिन जिस तरह से रविवार रात को रंगपुर जिले के पीरगंज में मछुआरों की एक बस्ती को हथियारबंद कट्टरपंथियों ने निशाना बनाया, उसके बाद यूएन को भी इस मामले में सक्रिय होने को मजबूर होना पड़ा। कोमिला, नोआखाली और चिट्टगांव समेत बाकी इलाकों में उपद्रव करने के बाद भी जब दंगाइयों का मन नहीं भरा तो रविवार रात में उन्होंने हिंदुओं के घरों और संपत्तियों को ही आग के हवाले करना शुरू कर दिया।

'हमारी सरकार को बदनाम करने की कोशिश'

'हमारी सरकार को बदनाम करने की कोशिश'

बांग्लादेश के गृहमंत्री असदुज्जमां खान ने मीडिया के सामने माना है कि 'कोमिला की घटना जिसके चलते हिंसा भड़की, कुछ लोगों की ओर से समुदायों के बीच संबंधों को भंग करने और हमारी सरकार को बदनाम करने के लिए किया गया था।' दरअसल, कोमिला में दुर्गा पूजा के दौरान कथित रूप से कुरान को अपमानित करने की घटना पिछले बुधवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसके बाद कट्टरपंथियों ने पूजा पंडालों को निशाना बनाना शुरू कर दिया था। सोमवार को भी चिट्टगांव और कोमिला में हालात तनावपूर्ण बने रहे, जहां भयानक सांप्रदायिक हिंसा देखने को मिली है। कहा जा रहा है कि चार की मौत पुलिस फायरिंग में हुई और नोआखाली जिले के इस्कॉन मंदिर के दो श्रद्धालुओं की भी मौत हुई है।

23 अक्टूबर को 150 देशों में प्रदर्शन

23 अक्टूबर को 150 देशों में प्रदर्शन

बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हो रहे हमले के खिलाफ अब अंतराष्ट्रीय स्तर पर विरोध-प्रदर्शन और प्रार्थनाओं का आयोजन किया जा रहा है। इसी तरह का एक बड़ा प्रदर्शन 23 अक्टूबर को आयोजित होना है। कोलकाता इस्कॉन के वाइस प्रेसिडेंट राधारमन दास ने कहा है, 'दुनिया के कई हिस्सों में प्रदर्शन हो रहे हैं। हम बांग्लादेश में पीड़ितों के लिए 23 अक्टूबर को एक दिवसीय विरोध प्रदर्शन और प्रार्थना सभाओं की योजना बना रहे हैं। यह पूरी दुनिया में (लगभग 150 देशों में) सभी इस्कॉन केंद्रों पर और विभिन्न स्थानों पर भी आयोजित की जाएगी।'

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