Bangladesh में अप्रैल 2026 में होंगे चुनाव, कोई बड़ा गेम करना चाहते हैं मोहम्मद यूनुस?
Bangladesh News: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने देश में अगले आम चुनावों का ऐलान कर दिया है। शुक्रवार को देश को संबोधित करते हुए मोहम्मद यूनुस ने कहा कि अप्रैल 2026 में चुनाव कराए जाएंगे। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और सेना प्रमुख ने नवंबर तक चुनाव कराए जाने की मांग की थी। यूनुस पहले से ही घरेलू मोर्चे पर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। देश में उनकी लोकप्रियता और सरकार के प्रति आम लोगों का विश्वास कम हो रहा है। हालांकि, यूनुस प्रशासन की ओर से अब तक चुनाव कितने चरणों में और किस तरह होंगे, इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई है।
Bangladesh में चुनाव अगले साल क्यों कराना चाहते हैं यूनुस?

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निष्पक्ष चुनाव को लेकर जताई जा रही आशंका
बांग्लादेश की मौजूदा सरकार में छात्र संगठन एनसीपी की अभी भी अहम भूमिका है। बीएनपी ने इसे लेकर पहले भी आपत्ति जताई है। यूनुस की टीम में कई छात्र सलाहकार शामिल हैं और बीएनपी का मानना है कि सत्ता में असली भूमिका इन सलाहकारों की ही है। अगले साल अप्रैल में चुनाव कराए जाने पर बीएनपी को आशंका है कि इसका फायदा एनसीपी उठा सकती है। इसके अलावा, बीएनपी और सेना समेत कुछ दूसरे संगठनों का भी दावा है कि अगले साल चुनाव होते हैं, तो इससे प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठना लाजिमी है।
एक्सपर्ट और राजनीतिक विश्लेषक भी स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों को लेकर आशंकित हैं। ढाका स्थित एक्टिविस्ट रेजाउर रहमान ने एक भारतीय मीडिया समूह से बात करते हुए कहा कि मौजूदा राजनीतिक हालात में इस बात की आशंका है कि चुनावी कानूनों में गड़बड़ी और राजनीतिक अनिश्चितता की वजह से निष्पक्ष तरीके से चुनाव संपन्न न हो सकें।
बांग्लादेश की सेना से चल रहा है यूनुस का टकराव
बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमान को कुछ महीने पहले तक मोहम्मद यूनुस के सबसे करीबी लोगों में शुमार किया था। बांग्लादेश में शेख हसीना को सत्ता से बेदखल करने और मोहम्मद यूनुस को कार्यवाहक सरकार का मुखिया बनाने में आर्मी चीफ की अहम भूमिका रही थी। हालांकि, कुछ ही महीने में टकराव बढ़ गया। आर्मी चीफ खुलकर यूनुस की मुखालफत कर रहे हैं और सेना का कहना है कि कार्यकारी सरकार नीतिगत फैसले लेने में सक्षम नहीं है। चुनाव नवंबर तक कराने की मांग आर्मी और बीएनपी प्रमुख खालिदा जिया की भी है। अब भले ही यूनुस ने चुनाव तारीखों का ऐलान कर दिया हो, लेकिन देश में बन रहे टकराव के हालात में निष्पक्ष चुनाव कराना संभव नहीं है।
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