Bangladesh elections: बांग्लादेश में 7 जनवरी को आम चुनाव, शेख हसीना को टक्कर देंगी खालिदा जिया?

बांग्लादेश में आम चुनाव 7 जनवरी, 2024 को होंगे। चुनाव के बाद उसी दिन से रात को मतगणना शुरू होगी। बांग्लादेश के मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) काजी हबीबुल अवल ने बुधवार को इसकी घोषणा की। घोषणा से पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ने चुनाव आयुक्तों के साथ बैठक भी की।

यह घोषणा बांग्लादेश के इतिहास में पहली बार टेलीविजन भाषण में की गई थी। ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले, मुख्य चुनाव आयुक्त राष्ट्र को संबोधित करने के लिए चुनाव कार्यक्रम का रिकॉर्डेड संस्करण प्रसारित करते थे।

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रिपोर्ट के मुताबिक 30 नवंबर को नामांकन पत्र दाखिल करने की आखिरी तारीख होगी और 1 दिसंबर से 4 दिसंबर तक इनकी जांच की जाएगी। उम्मीदवारी वापस लेने की आखिरी तारीख 17 दिसंबर है, जबकि 18 दिसंबर को चुनाव आयोग उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न आवंटित करेगा।

सीईसी ने कहा कि राजनीतिक दल 18 दिसंबर से 5 जनवरी 2024 की आधी रात तक प्रचार शुरू कर सकते हैं। इस बार बांग्लादेश में मतदाताओं की कुल संख्या 11 करोड़ 96 लाख 91 हजार 633 है।

30 दिसंबर 2018 को बांग्लादेश में 11वीं नेशनल असेंबली के चुनाव हुए थे। बांग्लादेश के संविधान के अनुसार, अगला संसदीय चुनाव संसद के पांच साल के कार्यकाल की समाप्ति से 90 दिनों के भीतर होना चाहिए।

वर्तमान संसद का कार्यकाल 29 जनवरी 2024 को समाप्त हो रहा है। यानी 12वां संसदीय चुनाव पिछले 90 दिनों के भीतर ही होना था। आयोग ने उस समय सीमा के अनुसार मतदान का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। भारत की तरह ईवीएम नहीं, बांग्लादेश में पेपर बैलेट से वोटिंग होनी है।

2018 के चुनाव में प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग ने 300 में से 257 सीटें जीती थी। उनकी सहयोगी पार्टी के रूप में दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति हुसैन मोहम्मद इरशाद की जातीय पार्टी है। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बीएनपी से उनका मुकाबला है।

आपको बता दें कि बांग्लादेश में लंबे वक्त से बढ़ रहे राजनीतिक तनाव की वजह से विरोध-प्रदर्शन और खून-खराबा का दौर चल रहा है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने प्रधानमंत्री शेख हसीना से इस्तीफे की मांग करते हुए देश भर में प्रदर्शन कर रही है।

बीएनपी ने मांग की है कि चुनाव एक तटस्थ कार्यवाहक सरकार की देखरेख में आयोजित किए जाएं। उनका कहना है कि हसीना की सरकार में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं हैं। वहीं शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार ने इस मांग को खारिज कर दिया है।

बीएनपी ने कार्यवाहक सरकार की देखरेख में चुनाव की मांग पूरी नहीं होने पर जनवरी में होने वाले चुनाव के बहिष्कार की धमकी दी है। अब देखना होगा कि अगले साल होने वाले चुनाव में बीएनपी हिस्सा लेती है या नहीं।

गौरतलब है कि बीएनपी पहले भी चुनाव का बहिष्कार कर चुकी है। खालिदा जिया की पार्टी ने दिसंबर 2014 के चुनाव के बहिष्कार का फैसला किया था। इसकी वजह से अवामी लीग भारी सीटों से सरकार बनाने में सफल हुई थी।

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