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बलूचिस्तान से 2048 तक मिटा दिया जाएगा बलूचों का नामोनिशान, जिनपिंग ने पाकिस्तान के साथ बनाया खौफनाक प्लान

Balochistan-China News: पाकिस्तान कहता है, कि चीन के साथ उसकी दोस्ती समुद्र से ज्यादा गहरी है, पर्वत से ज्यादा ऊंची है और शायद अपनी इसी दोस्ती की खातिर, पाकिस्तान ने चीन को बलूचिस्तान की मूल आबादी का विनाश करने का लाइसेंस दे दिया है।

लेकिन, बलूचों का हिम्मत ये पाकिस्तानी तोड़ नहीं पाए हैं और बलूचिस्तान में लगातार चीनियों पर हमले होने शुरू हो गये हैं। इसके अलावा, बलूचों ने चीनी और पाकिस्तानी संपत्तियों पर भी हमले शुरू कर दिए हैं और इसी कड़ी में पाकिस्तान के पीएनएस सिद्धिकी नौसैनिक अड्डे पर पिछले हफ्ते हमला किया गया था। जिसके बाद अब पाकिस्तानी सेना ने क्षेत्र में बलूच विद्रोह को कम करने के लिए इन चीनी लड़ाकू ड्रोनों को तैनात किया हैं।

Balochistan problem

बलूचिस्तान में चीन बनाम बलूच विद्रोही

पीएनएस सिद्दीकी को लेकर कहा जाता है, कि चीन ने वहां पर एक आधुनिक रनवे का निर्माण किया है, जो बड़े विमानों को समायोजित करने में सक्षम है। पाकिस्तानी नौसेना रणनीतिक रूप से स्थित इस बेस से लॉकहीड मार्टिन पी-3सी ओरियन जैसे समुद्री गश्ती विमान संचालित करती है।

पाकिस्तान के चार नौसैनिक हवाई अड्डों में से एक, पीएनएस सिद्दीकी पर तैनात चीनी ड्रोन सर्विलांस और सुरक्षा कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

चीनी ड्रोन CHG-4B को 2021 में पाकिस्तान आर्मी एविएशन कोर में शामिल किया गया था। चार सीएच-4बी यूसीएवी का पहला बैच 2021 की शुरुआत में पाकिस्तान पहुंचा था और इसे बहावलपुर हवाई अड्डे पर तैनात किया गया था, जो पाकिस्तान आर्मी एविएशन सेगमेंट का घर है। लेकिन, अब इनमें से दो UAV अपनी जगह नहीं हैं और माना जा रहा है, कि इनका उपयोग दूसरे सक्रिय अभियानों में किया गया है।

इन ड्रोनों का ट्रांसफर उस समय हुआ है, जब रिपोर्टें सामने आईं हैं, कि सीएच-4बी बलूचिस्तान में हमले कर रहे हैं। इसका मतलब है, कि पाकिस्तान आर्मी एविएशन ने अपनी पहली लड़ाकू तैनाती पर अपने सीएच-4बी तैनात किए हैं। यानि, बलूचिस्तान के लोगों पर हमला करने के लिए चीनी हथियारों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसने बलूचों को भड़का दिया है।

और 26 मार्च को बलूचों का गुस्सा एक बार फिर से चीनियों को भुगतना पड़ा, जब एक हमले में कम के कम 5 इंजीनियरों की हत्या एक बलूच आत्मघाती हमलावर ने कर दी। ये चीनी इंजीनियर दासू डैम में काम कर रहे थे।

पिछले एक हफ्ते के भीतर पाकिस्तान में चीनियों पर यह तीसरा बड़ा हमला था। 29 जनवरी को अलगाववादी समूह ने माच शहर पर हमला किया और 20 मार्च को ग्वादर बंदरगाह पर हमला किया था, जिसमें दो पाकिस्तानी सैनिक और आठ हमलावर मारे गए थे।

बलूचिस्तान को लूट रहा पाकिस्तान

बलूचिस्तान, पाकिस्तान का सबसे बड़ा लेकिन सबसे कम आबादी वाला प्रांत है, जो अफगानिस्तान और ईरान की सीमा से लगा हुआ है। इसे चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना 62 अरब डॉलर की सीपीईसी का केंद्रबिंदु माना जाता है। ग्वादर बंदरगाह चीन के लिए एक तरह से सैन्य अड्डे के तौर पर काम करता है।

2007 के बाद से बलूचिस्तान में आतंकवादी हमलों में भीषण वृद्धि दर्ज की गई है और 2007 में जहां बलूचिस्तान में सिर्फ 35 हमले हुए थे, वहीं 2015 में हमलों की संख्या बढ़कर 483 हो हो गई। इनमें से ज्यादातर हमलों की जिम्मेदारी बलूचिस्तान लिबरेशिन आर्मी ने ली है और इसने ग्वादर और आसपास के इलाकों में चीनी बुनिया परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है।

हमलों का नतीजा ये हुआ, कि ग्वादर के पूरा क्षेत्र में सैनिकों की भारी मौजूदगी हो गई है और ग्वादर क्षेत्र को एक तरह से सैनिक क्षेत्र बना दिया है, जहां एक एक इंच पर सुरक्षा बल मौजूद हैं। चीनी इंजीनियरों और मजदूरों को काम करने वाली जगह ले जाने के लिए पाकिस्तान ने 15 हजार जवानों को लगाया हुआ है। इसके अलावा, पाकिस्तान में काम करने वाली चीनी कंपनियों ने निजी सुरक्षा गार्डों को भी काम पर रखा है।

बलूचिस्तान में चीनी सैन्यीकरण

इसके अलावा, चीनी सैनिकों को भी बलूचिस्तान में देखा गया है। कलात के वर्तमान खान मीर सुलेमान दाऊद CPEC को "चीनी सैन्य परियोजना" के रूप में संदर्भित करते हैं।

नवंबर 2016 में बलूचिस्तान के खुजदार जिले में भीषण बम धमाका हुआ था, जिसमें 52 लोग मारे गये थे और उसके बाद ही चीन ने ग्वादर बंदरगाह की सुरक्षा के लिए अपने युद्धपोत भेज दिए थे।

वहीं, बीजिंग ने बलूचिस्तान में असंतोष को रोकने के लिए पाकिस्तानी सेना को सहायता देना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान सेना ने अक्टूबर 2022 के अंत में बोलान, बलूचिस्तान की पर्वत श्रृंखलाओं में एक बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान ऑपरेशन 'बोलन' शुरू किया था।

चीन, बलूचिस्तान में काम कर रहे चीनी कर्मियों की सुरक्षा को लेकर पाकिस्तानी सरकार पर दबाव बना रहा है। जबकि पाकिस्तानी सेना ने कई वर्षों से बलूच विद्रोहियों के खिलाफ लड़ाकू जेट और सशस्त्र हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया है और अब ड्रोन भी लगाए गये हैं।

बलूच नेता बार-बार चीन पर पाकिस्तान की मदद करने का आरोप लगाते रहे हैं। उन्होंने यहां तक आरोप लगाया कि, बीजिंग बलूच नरसंहार में शामिल है और बलूच लड़ाकों के ठिकानों का पता लगाने में इस्लामाबाद की मदद करता है।

पाकिस्तान सरकार ने 2000 के दशक के अंत में चीनी नागरिकों के देश में आने के बाद से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। हालांकि, हाल ही में, आर्थिक परियोजनाओं पर चीनी अधिकारी और कर्मचारी आतंकवादी हमलों के शिकार हुए हैं।

चीनियों पर बलूचों के हमले

बलूच विद्रोहियों ने लगातार चीनियों पर हमले किए हैं 2018 में बलूच विद्रोगियों ने कराची में चीनी वाणिज्य दूतावास के बाहर हमले किए थे, जिसमें 4 लोगों की मौत हो गई थी।

जबकि, 2021 में दासू डैम में काम करने जा रहे चीनी इंजीनियरों के बस पर हमला किया गया था और 9 चीनी इंजीनियरों की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद चीन के कन्फ्यूशियस संस्थान पर भी हमला किया गया था।

2022 में कन्फ्यूशियस इंस्टीट्यूट पर हुए हमले में एक आत्मघाती बम विस्फोट में तीन चीनी भाषा शिक्षक और उनके पाकिस्तानी ड्राइवर की मौत हो गई थी। विस्फोट से विश्वविद्यालय में उनकी मिनीबस क्षतिग्रस्त हो गई।

बलूचिस्तान पर कब्जा कर लेगा चीन

बलूच लिबरेशन आर्मी ने पाकिस्तान में चीनी निवेश का विरोध करते हुए तर्क दिया है, कि इससे स्थानीय लोगों को कोई फायदा नहीं होता है।

ग्वादर बंदरगाह को इस क्षेत्र के सबसे रणनीतिक गहरे समुद्र बंदरगाहों में से एक के रूप में बनाया और विकसित किया गया है। इसका निर्माण 2007 में शुरू हुआ था, जब बलूच नेता अकबर बुगती की हत्या के बाद बलूच विद्रोह उग्र हो रहा था।

माना जाता है, कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) 2030 तक 3,218 किमी लंबा हो जाएगा और चीन के बाद चीनियों का ये सबसे बड़ा निवेश बन जाएगा, जिसमें राजमार्ग, रेलवे, हवाई अड्डे और पाइपलाइन शामिल हैं, जो पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह को चीन के सिनजियांग प्रांत से जोड़ देंगे। ग्वादर, जहां विशाल अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह का निर्माण किया जा रहा है, वो बलूचिस्तान में स्थित है और क्षेत्र में तनाव के केंद्र में है।

सीपीईसी के विकास के साथ ही, बाहरी लोगों ने बलूचिस्तान में रहना शुरू कर दिया है। जिनमें चीनी नागरिकों की संख्य काफी ज्यादा है। उदाहरण के लिए, 2016 में पाकिस्तान में प्रवेश करने वाले चीनियों की संख्या 71,000 होने का अनुमान है। फेडरेशन ऑफ पाकिस्तान चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की एक रिपोर्ट में कहा गया है, कि 2048 तक चीनी नागरिकों की संख्या, बलूच मूल निवासियों से ज्यादा हो सकती है। जाहिर है, ये बलूचों के खात्मे का इशारा करता है।

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