पाकिस्तान की अदालत में पेशी के लिए गए बंदर ने मचाया हड़कंप, 20 घंटे तक कर्मचारियों को देते रहे चकमा
पाकिस्तान में गुरुवार को कराची में 2 लोगों को बंदरों के 14 बच्चों की तस्करी करते गिरफ्तार किया गया था। इसके एक दिन बाद शुक्रवार को इन तस्करों की कोर्ट में पेशी हुई। इस दौरान अधिकारी सबूत के रूप में रेस्क्यू किए गए बंदरों को भी ले गए।
इसी दौरान कोर्ट परिसर में बक्से से एक बंदर निकल गया। इससे कोर्ट परिसर में हड़कंप मच गया। बंदर उछल-कूद करते हुए पेड़ पर चढ़ गया। अदालत का स्टाफ काफी देर तक उसे वहां से उतारने की कोशिश करता रहा।

मौके पर मौजूद अधिकारियों को उसे बचाने के लिए संघर्ष करते हुए देखा गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने डॉन को बताया कि बंदर के बच्चे को फिर से पकड़ने के लिए वन्यजीव अधिकारियों और न्यायिक कर्मचारियों को लगभग 20 घंटे तक मशक्कत करनी पड़ी।
बंदरों के इन बच्चों को खैबर पख्तून्ख्वा के पास के जंगलों से पकड़ा गया था और ट्रेनिंग देने के लिए कराची ले जाया जा रहा था। सिंध वन्यजीव विभाग के प्रमुख जावेद महार ने कहा कि बंदरों को बहुत बुरी हालत में आम वाली टोकरियों में रखकर बेचने के लिए ले जाया जा रहा था। ऐसे में वे मुश्किल से सांस ले पा रहे थे।
अदालत ने मामले में फैसला सुनाते हुए सभी तस्करों पर 1 लाख पाकिस्तानी रुपए का जुर्माना लगाया है और सभी बंदरों को कराची के चिड़ियाघर भेजने का आदेश दिया है।
हालांकि पाकिस्तान के वाइल्ड-लाइफ डिपार्टमेंट ने अदालत के इस फैसले पर आपत्ति जताई है। महार ने कहा, "बंदरों को उनके प्राकृतिक आवास में लौटाया जाना चाहिए था, जहां से उन्हें पकड़ा गया था।" महार ने कहा कि पाकिस्तान में जू की हालत बेहद खराब है।
महार ने कहा कि जू में अधिकारी एनिमल वेलफेयर को पूरी तरह से नजरंदाज करते हैं। सरकार जू में मिलने वाले फंड्स में कटौती करती रहती है। इसकी वजह से जानवरों को सही वक्त पर पर्याप्त खाना नहीं मिलता है।
आपको बता दें कि पाकिस्तान के चिड़ियाघर अपनी ख़राब सुविधाओं के लिए कुख्यात हैं और कार्यकर्ता उन पर पशु कल्याण की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हैं। 2020 में एक अदालत ने देश की राजधानी के एकमात्र चिड़ियाघर को उसकी जर्जर स्थिति के कारण बंद करने का आदेश दिया था।
हाल ही में एक नूरजहां हथिनी की मौत भी काफी चर्चा में रही थी। पशु अधिकार संगठनों ने कराची जू के अधिकारियों पर हथिनी की सही से देखभाल न करने का आरोप लगाया था।
पाकिस्तान में जंगली जानवरों का व्यापार या उन्हें रखना गैरकानूनी है, लेकिन कानूनों की नियमित रूप से अनदेखी की जाती है। अक्सर वहां सड़कों पर पालतू जानवरों की बिक्री का बाजार लगा रहता है।
मदारी ग्राहकों का मनोरंजन करने के लिए सड़क पर बंदरों को रखते हैं। कुछ मामलों में मदारी द्वारा बंदरों को घरों में या दुकानों में घुसकर चोरी करने के लिए उन्हें ट्रेनिंग देने का भी मामला सामने आया है।












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