'हम अडानी के निवेश का स्वागत करते हैं', विवादों में घिरे गौतम अडानी के लिए ऑस्ट्रेलिया ने खोले दिल
गौतम अडानी को लेकर हिंडनबर्ग की रिपोर्ट ने तहलका मचा रखा है और अडानी समूह को अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है। कंपनी के शेयर्स भी बुरी तरह से नीचे आ गये हैं।

Gautam Adani Australia: विवादों में घिरे भारत के मशहूर उद्योगपति गौतम अडानी के लिए ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने अपना दिल खोल दिया है और उनके निवेश का ऑस्ट्रेलिया में स्वागत किया है। ऑस्ट्रेलिया सरकार ने अडानी इंडस्ट्री को 'अच्छा कॉरपोरेट नागरिक' बताया है और उनके निवेश का ऑस्ट्रेलिया में स्वागत करने की बात कही है। ऑस्ट्रेलिया के व्यापार और पर्यटन मंत्री, डॉन फैरेल ने कहा है, कि अडानी कंपनी का उनके देश में निवेश जारी रखने के लिए स्वागत है। पिछले कुछ महीनों से अडानी ग्रुप संकट में है और हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद अडानी समूह को अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया की तरफ से अडानी समूह को बहुत बड़ी राहत मिली है, क्योंकि ये दर्शाता है, कि अडानी समूह को लेकर बाजार में अभी भी विश्वास कायम है।
अडानी को लेकर ऑस्ट्रेलिया का बयान
कैनबरा में ऑस्ट्रेलियन मंत्री फैरेल ने भारतीय पत्रकारों के एक समूह से बात करते हुए कहा, कि उन्हें उम्मीद है कि भारत में कंपनी को हो रही मौजूदा दिक्कतों का ऑस्ट्रेलिया में उसके निवेश पर कोई असर नहीं पड़ेगा। फैरेल ने कहा, कि "मैंने सार्वजनिक रिपोर्ट देखी है, कि अडानी की किसी भी समस्या का उनके ऑस्ट्रेलियाई निवेश पर कोई असर नहीं पड़ेगा, और मुझे उम्मीद है कि वे रिपोर्ट सही हैं।" उन्होंने कहा, कि "हम भारतीय निवेश का स्वागत करते हैं। हम अडानी के निवेश का स्वागत करते हैं। वे ऑस्ट्रेलिया में रोजगार सृजित कर रहे हैं। वे अच्छे कॉर्पोरेट नागरिक हैं। और वे भारत में लोगों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने की उस प्रक्रिया का हिस्सा हैं, और हम उसका समर्थन करते हैं"।

ऑस्ट्रेलिया में अडानी का व्यापार
अडानी समूह की ऑस्ट्रेलिया में ऊर्जा, खनन और बंदरगाह क्षेत्रों में महत्वपूर्ण उपस्थिति है। अडानी समूह ऑस्ट्रेलिया के पूर्वोत्तर भाग में स्थिति क्वींसलैंड में एक बंदरगाह का मालिक भी है और उसका संचालन करता है। इसकी शोपीस परियोजना, जिसे पर्यावरण के आधार पर बहुत आलोचना का भी सामना करना पड़ा है, वह कारमाइकल कोयला खदान और सड़क परियोजना में अहम हिस्सेदारी रखता है, जो क्वींसलैंड में भी है। इसके साथ ही अडानी समूह के पास ऑस्ट्रेलिया में सौर ऊर्जा परियोजनाएं भी हैं। फैरेल ने कहा, कि महत्वपूर्ण खनिजों के विकास पर ऑस्ट्रेलिया का वर्तमान ध्यान निकट अवधि में कोयला खनन कार्यों को प्रभावित करने की संभावना नहीं है। उन्होंने कहा, कि "कोयला जल्द ही कहीं नहीं जा रहा है। कोयला निकट भविष्य में भारत और कई अन्य देशों को बिजली प्रदान करना जारी रखेगा। लेकिन हमें कुछ बिंदु पर ट्रांजिशन (जीवाश्म ईंधन-आधारित ऊर्जा के स्रोतों जैसे कोयले से नवीकरणीय ऊर्जा तक, जिसे वर्तमान स्थिति में बैटरी से भी समर्थन की आवश्यकता होती है) की तरफ बढ़ना होगा"। उन्होंने कहा, कि यहां ट्रिक ये है, कि आपको पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों में निवेश करना होगा, जबतक कि ऊर्जा के किसी और स्रोत की तलाश पूरी नहीं हो जाती है।
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ऑस्ट्रेलिया का बड़ा निवेशक है अडानी समूह
आपको बता दें, ऑस्ट्रेलिया में अडानी समूह ने अरबों डॉलरा निवेश कर रखा है और इसी महीने ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त बैरी ओ'फारेल ने भी कहा था, कि अडानी समूह का कारोबार सफल है और वह ऑस्ट्रेलिया में भारत के सबसे बड़े निवेशक बने हुए हैं। ओ'फारेल ने दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा था, कि अडानी समूह पर हिंडनबर्ग रिपोर्ट का प्रभाव भारत के नियामकों के लिए एक मामला है, और ऑस्ट्रेलिया में व्यापार समूह के संचालन को बंद करने के बारे में कोई रिपोर्ट नहीं आई है"। उन्होंने कहा था, कि "ऑस्ट्रेलिया में अडानी के निवेश पूरी तरह से काम कर रहे हैं और पूरी तरह से संसाधन प्रदान कर रहे हैं, चाहे वह स्वच्छ ऊर्जा हो या कोयला खनना का हो। ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं आई है, कि ऑस्ट्रेलिया में उनके किसी भी संचालन पर कोई प्रभाव पड़ा हो। इसलिए, वह अभी भी ऑस्ट्रेलिया में भारत का एक महत्वपूर्ण निवेशक है।"












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